Friendship Day Special: लाइट्स, कैमरा और पक्की यारी! स्नेहा, स्नेहलता और कृष्णा के लिए क्या हैं दोस्ती के मायने?
छोटे पर्दे पर धारावाहिकों के सेट पर कलाकारों के बीच गहरी दोस्ती की कहानी सामने आई है, जहां प्रतिस्पर्धा से ज्यादा भरोसे और अपनेपन को महत्व दिया जाता ह ...और पढ़ें

प्रियंका सिंह, मुंबई। सेट पर दोस्ती के रिश्तों की असली कहानी छोटे पर्दे पर धारावाहिकों के पात्रों की कहानी जितनी दिलचस्प होती है,उतनी ही खास होती है उनके सेट पर बनने वाली दोस्ती। अक्सर माना जाता है कि अभिनय की दुनिया में प्रतिस्पर्धा रिश्तों पर भारी पड़ती है, लेकिन कुछ कलाकार इस सोच को गलत साबित कर रहे हैं।
उनके लिए सेट सिर्फ काम की जगह नहीं, बल्कि भरोसे, अपनेपन और टीमवर्क से जुड़ा एक ऐसा परिवार है, जहां एक-दूसरे की सफलता का जश्न मिलकर मनाया जाता है। सच्ची दोस्ती को लेकर अभिनेत्री स्नेहा वाघ और स्नेहलता वसईकर के साथ ही अभिनेता कृष्णा कौल से बात की प्रियंका सिंह ने...
एक संवाद है कि प्यार दोस्ती है, फिर दोस्ती क्या है?
अभिनेत्री स्नेहा वाघ के लिए दोस्ती का मतलब हमेशा से ऐसे लोगों का साथ रहा है, जो हर दिन को और खूबसूरत बना दें व सकारात्मकता से भर दें। इन दिनों महादेव एंड संस धारावाहिक में काम कर रहीं स्नेहा कहती हैं कि मेरे लिए दोस्ती बिना किसी उम्मीद के हमेशा साथ खड़े रहने और व्यस्त से व्यस्त शूटिंग को भी मजेदार बना देने वाला रिश्ता है, जो केवल इस पेशे में ही मिल सकता है, जहां आप ज्यादा से ज्यादा समय एक-दूसरे के साथ बिताते हैं।

सेट पर लंबे समय तक होते हैं साथ
ऐसी दोस्ती मुझे इसी शो के सेट पर मिली। जबसे इस शो के कलाकारों ने साथ में काम करना शुरू किया है, हममें से कोई एक भी अगर एक दिन शूट पर नहीं आता तो उसकी कमी महसूस होती है। यही हमारे रिश्ते की सबसे बड़ी खूबसूरती है। लोग सेट पर प्रतिस्पर्धा की बात जरूर करते हैं, लेकिन टीवी के सेट पर हम सभी कलाकार लंबे समय के लिए साथ होते हैं।
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यहां कोई अकेले नहीं बैठ सकता है। साथ काम करना, खाना-पीना, सीन की रिहर्सल करना, शाट्स के बीच हंसी-मजाक करना यह सब होता रहता है। यही कारण है कि आपस में दोस्ती हो जाती है। इस सेट पर मेरे जो भी साथी हैं, हमने एक-दूसरे को केवल अपने किरदारों से नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी जाना और महसूस किया है। अब तो दोस्ती का पक्का वाला ऐसा रिश्ता बन गया है कि हम सेट पर भी और सेट के बाहर भी एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं।
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हम दिल से एक-दूसरे की कामयाबी पर खुश होते हैं, एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हैं और हर छोटी-बड़ी उपलब्धियों का जश्न साथ मिलकर मनाते हैं। हमारे बीच टीमवर्क की भावना इतनी मजबूत है कि प्रतिस्पर्धा की कोई गुंजाइश ही महसूस नहीं होती।
बिना शर्त हो गई दोस्ती
अभिनय के पेशे में प्रतिस्पर्धा से वाकिफ धारावाहिक वशीकरणं: किस पर रखे विश्वास की अभिनेत्री स्नेहलता वसईकर कहती हैं कि हमारे पेशे में कई लोगों से मुलाकात होती है, लेकिन हर कोई दोस्त नहीं बन पाता है। कारण, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हर पेशे का हिस्सा होती है। अगर दोस्ती सच्ची हो तो वह रिश्ते के बीच में नहीं आती है। इसी शो के सेट पर मेरी एक अच्छी दोस्त पृथ्वी काले बनीं। धीरे-धीरे हमारी दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि आज वह मेरी जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा हैं। हम अब सह-कलाकार ही नहीं, बल्कि परिवार हैं।
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हमने हमेशा एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाया है। मुश्किल समय में एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया है। मेरा मानना है कि किसी और की सफलता आपके हिस्से की सफलता कम नहीं करती, इसलिए हमारी दोस्ती में प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सहयोग और सम्मान रहा है। मेरी और पृथ्वी की दोस्ती की शुरुआत बिल्कुल सामान्य बातचीत से हुई थी। शूट के बीच में बातें करना, साथ में चाय पीना, हंसी-मजाक करना सब होता था। समय के साथ मैंने महसूस किया कि वह बहुत सच्ची और ईमानदार हैं।
वह कभी दिखावा नहीं करती हैं और हर परिस्थिति में मेरे साथ खड़ी रहती हैं। मुझे लगता है कि भरोसा किसी एक पल में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे अनुभवों से धीरे-धीरे बनता है। हम दोनों के बीच भी वही हुआ है। मेरे लिए दोस्ती मतलब एक ऐसा रिश्ता है, जहां आप बिना डरे या झिझके अपने दिल की हर बात कह सकते हैं। वहां फिर आपको कोई जज नहीं करता है। वह आपको समझकर आपका साथ देता है। दोस्त वही होता है, जो आपकी खुशी में दिल से खुश हो और मुश्किल समय में बिना बुलाए आपके साथ खड़ा हो जाए।
तोहफा है सेट की दोस्ती
सेट पर प्रतिस्पर्धा और दोस्ती को सैराब धारावाहिक के अभिनेता कृष्णा कौल अलग-अलग रखते हैं। वह कहते हैं कि अभिनय के इस पेशे ने मुझे सबसे बड़ा तोहफा ही दोस्तों का दिया है। इस सफर में कई ऐसे लोगों से मेरी मुलाकात हुई है, जो दोस्त बनते चले गए। जब आप सेट पर पूरा दिन बिताते हैं, सह-कलाकारों का जन्मदिन मनाते हैं, छोटी-छोटी बातों पर दिल खोलकर हंसते हैं तो भला दोस्ती कैसे नहीं होगी। वहां प्रतिस्पर्धा के लिए फिर कोई जगह नहीं बचती है, जिसे हम प्रतिस्पर्धा समझते हैं, वह एक-दूसरे से बेहतर करने का नहीं, बल्कि जो बेहतर कर रहा है, उससे सीखने वाली भावना होती है।
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मैं खुशकिस्मत हूं कि इस शो के सेट पर मुझे कई शानदार दोस्त मिले। शो में मदिराक्षी मुंडले मेरी सह-कलाकार होने के नाते अच्छी दोस्त भी बन गई हैं। उन्होंने हर कदम पर मेरा हौसला बढ़ाया।
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