Matka King Review: क्राइम ड्रामा में 'मटका किंग' बनकर छाए Vijay Varma, असल कहानी से कितना न्याय कर पाई सीरीज?
विजय वर्मा स्टारर 'मटका किंग' (Matka King) प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो चुकी है, यहां पढ़ें क्राइम ड्रामा सीरीज का रिव्यू- ...और पढ़ें
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क्राइम ड्रामा सीरीज मटका किंग रिव्यू

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एकता गुप्ता, नई दिल्ली। जुए में ईमानदारी...ये लाइन सुनने में ही थोड़ी अजीब लगती है क्योंकि दो शब्द एक दूसरे से एकदम अलग। लेकिन क्या ये हो सकता है? बिल्कुल हो सकता है। आज जुआ सिर्फ एक खेल है लेकिन 60 के दशक में यह सिर्फ एक खेल नहीं बल्कि धंधा भी था। इसी दशक में जुए के किंगपिन (मटका किंग) माने जाने वाले रतन खत्री से प्रेरित सीरीज प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हुई है।
रतन ने बेईमानी के माहौल में ईमानदारी से जुए का धंधा चलाया और उसे ना सिर्फ मुंबई शहर बल्कि पूरे देश में फैलाया और सफल भी हुए। आइए जानते हैं कैसी है सीरीज और क्या है इसकी कहानी?
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क्या है सीरीज की कहानी?
भारतीय जुआ सरगना और फिल्म निर्माता रतन खत्री (RataN Khatri) की जिंदगी से प्रेरित सीरीज मटका किंग भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद बॉम्बे में उनके जुए के धंधे चलाने से शुरू होती है। सीरीज में विजय वर्मा ने ब्रिज भट्टी (Brij Bhatti) का लीड कैरेक्टर प्ले किया है जो बॉम्बे में अपने सेठ ( गुलशन ग्रोवर ) से अलग होकर अपना खुद का धंधा चलाना शुरू करता है। लेकिन जब ये खेल ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाता और मार्केट में भट्टी की हंसी उड़ने लगती है तो भट्टी के दिमाग में इस खेल को चलाने का एक अलग आइडिया सूझता है- मटके के साथ लोगों की किस्मत आजमाना।
जब जुए का खेल मटके से जुड़ जाता है तो यह और भी ज्यादा रोमांचक हो जाता है और ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ने लगते हैं। यह इतना पॉपुलर हो जाता है कि रात 9 बजे से 12 बजे तक शहरों की टेलिफोन लाइन तक बिजी हो जाती है, यहां तक कि पुलिस वाले भी किसी को फोन नहीं कर पाते। इस तरह ब्रिज भाटी का ये आइडिया हिट हो जाता है और वो बन जाते हैं 'मटका किंग'।
इस कहानी में पॉलीटिकल एंगल भी दिखाया गया है खासकर इंदिरा गांधी के वक्त लगी इमरजेंसी का दौर। वहीं ब्रिज भाटी की पर्सनल लाइफ भी करीब से दिखाई गई है। इन सबके बीच क्या ब्रिज भाटी अपने इस खेल को आखिरी तक ले जा पाते हैं? कानून की आंखों से बचकर क्या मटका किंग अपने हाथ में गैरकानूनी खेल की सत्ता अपने हाथ में ले पाते हैं? या फिर उनका ये खेल इमरजेंसी के चलते खत्म हो जाता है? यह सब जानने के लिए सीरीज देखनी होगी।
मटका किंग रिव्यू (Matka King Review)
नागराज मंजुले (Nagraj Manjule) के निर्देशन में बनी मटका किंग आपको सीधे 1960 के दशक के बॉम्बे में लेकर जाती है। डायरेक्टर ने उस दशक के बॉम्बे को बनाने में कोई सकर नहीं छोड़ी, कलाकारों के कपड़ो से लेकर, टेलीफोन और कलर्स तक उस जमाने की दुनिया में ले जाते हैं।
सीरीज में 'मटका किंग' ब्रज भट्टी (विजय वर्मा) की प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ पर्सनल लाइफ भी दिखाई गई है। वहीं उस वक्त देश में चल रही उथल-पुथल जैसे इमरजेंसी का भट्टी के धंधे पर क्या असर पड़ता है? यह सब सीरीज में बेहतर तरीके से दिखाया गया है।
सीरीज की सबसे मजबूत कड़ी इसके कलाकारों की एक्टिंग है। विजय वर्मा, ब्रिज भट्टी का किरदार में पूरी तरह ढ़ले हुए नजर आए। हमेशा की तरह की तरह उनकी नेचुरल एक्टिंग स्क्रीन पर छा जाती है। उनके साथ गुलशन ग्रोवर ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है, 60 के दशक के सेठ किस तरह से आम लोगों का शोषण करते थे उनके किरदार ने साफ तरीके से दिखाया है।
कृतिका कामरा और साईं ताम्हणकर भी अपने-अपने किरदारों में जंची है। इतना ही नहीं 60 एक पत्नी और गर्लफ्रेंड होने के साथ-साथ उनके किरदार मजबूत भी रहे हैं। 60 के दशक में सिर्फ एक हाउसवाइफ बनकर रह जाने की टीस, अपनी पहचान अलग बनाने की चाहत सीरीज में एक अच्छा एक्सपीरियंस जोड़ती है। वहीं सिद्धार्थ जाधव ने सपोर्टिंग रोल में अपनी शानदार छाप छोड़ी है।
क्या है कमी?
सीरीज थोड़ी लंबी है यानी हर एपिसोड औसतन 50 मिनट का है जिससे कहानी थोड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। पहला एपिसोड आधा होने के बाद सीरीज देखने की रिदम बनती है। वहीं कुछ चीजें जिन्हें सीरीज में नजरअंदाज किया जा सकता था, जिससे इसका रनटाइम कम हो जाता। इसीलिए कुछ दर्शकों को स्टोरीटेलिंग थोड़ी धीमी लग सकती है।
इतना रनटाइम होने के बावजूद रतन खत्री से इंस्पायर किरदार का बैकग्राउंड पूरी तरह से नहीं दिखाया गया कि वो ऐसा क्यों बना?
फिल्म का बैक्ग्राउंड म्यूजिक और गाने कुछ खास नहीं है, अच्छा म्यूजिक इस तरह की सीरीज को और भी बेहतर बनाती है जिसकी कमी इसमें खलती है। खासकर जब मटके का खेल होता है, या ब्रिज भाटी और उसके भाई की लव स्टोरी वाले सीन में। क्लाईमैक्स का म्यूजिक ठीक-ठाक है।
देखें या नहीं
अगर आपको रेट्रो थीम बेस्ड सिनेमा और क्राइम ड्रामा पसंद है तो 'मटका किंग' (Matka King) देखने लायक है।
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