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    जो चाहते हैं, वो कर ही लेते हैं एमबापे; कप्तान के तौर पर पहली ट्रॉफी से बस दो कदम दूर

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 09:51 AM (IST)

    काइलियन एमबापे ने छह साल की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू किया और 2017 में वैश्विक पहचान बनाई, जिसके बाद पीएसजी और फिर रीयाल मैड्रिड का सफर तय किया। अब फ ...और पढ़ें

    फ्रांस के जादूगार माने जाते हैं एमबापे

    फ्रांस के जादूगार माने जाते हैं एमबापे

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    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्लीः अगर काइलियन एमबापे कुछ करना चाहता तो आप जितनी चाहें कोशिश कर लें, वो अपने मन की करके ही रहेगा। कई साल पहले एक इंटरव्यू में काइलियन एमबापे की मां फायजा लमारी ने ये बात कही थी लेकिन दुनिया उसके बहुत पहले से इसे सच होते देख रही थी।

    फ्रांस के साथ लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचे एमबापे का वैश्विक उदय लगभग दस साल पहले साल 2017 में हुआ था। बीते दस सालों में उन्होंने फ्रांस के दो फुटबॉल क्लबों से होते हुए स्पेन के रीयल मैड्रिड तक का सफर तय किया और इस सफर के लगभग हर मोड़ पर वो हासिल किया जो उन्हें चाहिए था, सिवाय यूईएफए चैंपियंस लीग के। लेकिन आज का दिन क्लब फुटबॉल पर चर्चा का नहीं है, स्पेन के विरुद्ध होने वाले फीफा विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल से पहले हम बात करेंगे 20 दिसंबर 1998 को जन्मे एमबापे के सफर पर।

    छह साल की उम्र में शुरू किया सफर

    महज छह साल की उम्र में फ्रांस के एक छोटे से क्लब बोंडी से अपना सफर शुरू करने वाले एमबापे 11 वर्ष की उम्र तक आते-आते स्पेन, इंग्लैंड और जर्मनी तक के दिग्गज क्लबों की नजर में आ चुके थे। स्पेन के रीयल मैड्रिड ने तो उन्हें अपनी अंडर-12 टीम के साथ ट्रेनिंग के लिए भी बुलाया था और साल 2013 में 14 साल की उम्र में वह चेल्सी के निमंत्रण पर उनके लिए खेलने भी गए। हालांकि चेल्सी ने उन्हें अपने साथ रखने से मना कर दिया और यहां एंट्री हुई फ्रांस के ही एक अन्य क्लब एएस मोनाको की।

    मोनाको ने इसी साल एमबापे को अपने साथ जोड़ा और अक्टूबर 2015 में उन्हें क्लब के दूसरे दर्जे की टीम के साथ रखा गया, लेकिन वहां एमबापे ने ऐसा खेल दिखाया कि सिर्फ तीन हफ्ते में वह सीनियर टीम का हिस्सा बन गए।

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    बड़ा मौका, बड़ा प्रदर्शन

    एमबापे के करियर में साल 2017 का बहुत महत्व है, ये वही साल था जब पूरी दुनिया के फुटबॉल क्लबों से निकलकर उनकी ख्याति पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों तक पहुंची। अपेक्षाकृत छोटे माने जाने वाले क्लब मोनाको ने इस साल चैंपियंस लीग सेमीफाइनल तक का सफर तय किया और अपने घर यानी फ्रांस की लीग भी जीती। इस जीत में एमबापे ने सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी। वह पहले ही क्लब के लिए खेलने और गोल करने वाले सबसे युवा (16 वर्ष) फुटबॉलर बन चुके थे और अब पूरी दुनिया उनके जादू को देख रही थी।

    फुटबॉल का भविष्य बताए गए एमबापे को अपने साथ जोड़ने के लिए पूरे यूरोप के क्लबों में होड़ मच गई, लेकिन उनकी उम्र देखते हुए परिवार नहीं चाहता था कि एमबापे फ्रांस से बाहर जाएं और इसका फायदा हुआ मौजूदा वक्त में फ्रांस के सबसे बड़े क्लब पेरिस सेंट जर्मेन (पीएसजी) को। पीएसजी ने साल 2017 में एमबापे के लिए मोनाको को 180 मिलियन यूरो चुकाए। भारतीय रुपयों में ये रकम 1323 करोड़ से ज्यादा होती है।

    अगले ही साल विश्व कप था और यहां 19 वर्षीय एमबापे ने कहर ही ढा दिया उन्होंने इस विश्व कप में कुल चार गोल मारे, इसमें फाइनल में आया गोल भी शामिल था। एमबापे फीफा विश्व कप फाइनल में स्कोर करने वाले सिर्फ दूसरे टीनएजर बन गए, उनसे पहले ये कारनामा ब्राजील के पेले ने किया था। फ्रांस विश्व चैंपियन बना और एमबापे को इस विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ी चुना गया। विश्व कप के बाद एमबापे पीएसजी के लिए नित नए रिकॉर्ड बनाते रहे और तकरीबन हर रिकॉर्ड के बाद उनके रियाल मैड्रिड से जुड़ने की खबरें आती रहीं हालांकि इन खबरों के सच होने से पहले साल 2022 का विश्व कप आ गया।

    इस विश्व कप में एमबापे ने फ्रांस को एक बार फिर से फाइनल तक पहुंचाया। आठ गोल मारने वाले एमबापे को इस टूर्नामेंट में गोल्डन बूट मिला, हालांकि फाइनल में उनकी टीम को अर्जेंटीना से हार मिली।

    पूरा हुआ सपना

    साल 2024 में आखिरकार एमबापे का सपना पूरा हुआ और वह रीयाल मैड्रिड से जुड़ गए। इस क्लब में भी उन्होंने बहुत कमाल का प्रदर्शन करते हुए कई खिताब जीते, हालांकि चैंपियंस ट्रॉफी अब भी उनसे दूर रही और पीएसजी ने इनके अलग होते ही इसे लगातार दो बार जीता। रीयल मैड्रिड आने से पहले एमबापे को फ्रांस की कप्तानी मिल चुकी थी हालांकि उनकी कप्तानी में टीम का अभी कुछ जीतना बाकी था यूरो 2024 के सेमीफाइनल में ये टीम स्पेन से हार गई और 2025 के नेशंस लीग में भी ये लोग तीसरे स्थान पर रहे। अब एमबापे और उनकी टीम लगातार तीसरा विश्व कप फाइनल खेलने से महज एक जीत दूर हैं और फाइनल में पहुंचने के बाद अगर ये टीम इसे जीत भी पाती है तो ये फ्रांस के कप्तान के रूप में एमबापे का पहला खिताब होगा।

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