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    'रकम लौटाने पर ही मिलेगी जमानत', साइबर ठगी मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपराधियों के सामने रखी अनोखी शर्त

    Updated: Mon, 23 Mar 2026 06:09 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने साइबर ठगी के मामलों में आरोपितों को जमानत के लिए सख्त शर्त रखी है। अब ठगी गई राशि पीड़ित को लौटानी होगी या अदालत में जम ...और पढ़ें

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    पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की अनोखी शर्त। सांकेतिक फोटो

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में आरोपित को जमानत देने से पहले ठगी गई राशि पीड़ित को लौटाना या अदालत में सुरक्षित जमा कराना अनिवार्य होगा। 

    अदालत ने कहा कि जिस रकम के आरोपित के खाते में जमा होने के स्पष्ट साक्ष्य हों, उसे या तो शिकायतकर्ता को वापस किया जाए या फिर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) के रूप में अदालत में जमा कराया जाए, ताकि पीड़ित को बिना देरी राहत मिल सके। अदालत ने कहा कि केवल ट्रायल के भरोसे पीड़ित को राहत नहीं मिलती, इसलिए उसके हितों की तत्काल सुरक्षा जरूरी है।

    होटल रेटिंग का टास्क

    यह अहम टिप्पणी जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ ने महेंद्रगढ़ साइबर थाना में दर्ज एक ठगी मामले की सुनवाई के दौरान की। मामले में सूरज चौधरी और हेमराज ने नियमित जमानत की मांग की थी।
    अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता शुभम को व्हाट्सएप के जरिए होटल रेटिंग का टास्क दिया गया।

    शुरुआत में छोटी रकम देकर भरोसा बनाया गया, लेकिन बाद में अधिक पैसे निवेश करवाकर कुल करीब 5.30 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। आरोप है कि यह रकम विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर करवाई गई।

    सुनवाई के दौरान हेमराज की ओर से अदालत को बताया गया कि उसके खाते में आई 95 हजार रुपये की राशि को वह फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडीआर) के रूप में अदालत में जमा कराने को तैयार है। वहीं, सूरज चौधरी की ओर से कहा गया कि उसके खाते में कोई रकम ट्रांसफर नहीं हुई और उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य भी नहीं है।

    सख्त दृष्टिकोण अपनाना जरूरी 

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आज के समय में बैंक खाताधारकों में अपनी जमा पूंजी को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। साइबर अपराध तेजी से फैल रहे हैं और इनसे निपटने के लिए सख्त दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

    कोर्ट ने यह भी माना कि कई मामलों में पीड़ित को वर्षों तक ट्रायल का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन उसे तत्काल राहत नहीं मिलती। इसलिए यह जरूरी है कि जिस खाते में ठगी की रकम गई है, उसे या तो पीड़ित को वापस किया जाए या अदालत में जमा कराया जाए, ताकि भविष्य में पीड़ित को न्याय मिल सके।

    इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत दे दी, लेकिन हेमराज की जमानत को 95 हजार रुपये एफडीआर के रूप में जमा कराने की शर्त से जोड़ा। साथ ही निर्देश दिया कि आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और नियमित रूप से अदालत में पेश होंगे।