हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: पुलिस हिरासत में मौत और उत्पीड़न पर मिलेगा मुआवजा, नई नीति का मसौदा तैयार
हरियाणा सरकार पुलिस हिरासत में मौत और उत्पीड़न के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की तैयारी कर रही है। गृह विभाग ने नई नीति का मसौदा तैयार कर कानून ...और पढ़ें

पुलिस हिरासत में मौत-उत्पीड़न पर मुआवजे की तैयारी। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में अब पुलिस हिरासत में मौत व उत्पीड़न के मामलों में भी पीड़ितों को मुआवजा देने की तैयारी है। गृह विभाग ने नई मुआवजा नीति का प्रारूप तैयार कर कानूनी राय के लिए महाधिवक्ता के पास भेज दिया है। न्यायिक हिरासत में अप्राकृतिक मौत के मामलों में पहले ही मुआवजे का प्रविधान किया जा चुका है।
पुलिस हिरासत में मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित मामले में सुनवाई के दौरान हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रतिवेदन में यह जानकारी साझा की गई। सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन और महाधिवक्ता की टिप्पणी मिलने के बाद इसे वित्त विभाग की सहमति के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद अधिसूचना जारी कर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने पुलिस महानिदेशक और प्रदेश सरकार से संस्थागत सुधारों, जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजा प्रदान करने की नीति के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर जगदीश चंदर (सेवानिवृत्त) पर लगाए गए दंड की पुनः समीक्षा के आदेश के तहत संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।
मानवाधिकार आयोग की पहल पर ही न्यायिक हिरासत में कैदियों की अप्राकृतिक मौत के मामलों में मुआवजे के लिए 29 जून 2021 को नीति लागू की गई थी। इसके अनुसार, कैदियों के बीच झगड़े, जेल कर्मचारियों की यातना या पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा ड्यूटी में लापरवाही के कारण कैदी की मौत होने पर साढ़े सात लाख रुपये मुआवजे का प्रविधान किया गया है।
चिकित्सा अधिकारियों या पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा लापरवाही के कारण मौत होने पर पांच लाख मुआवजा देने की नीति को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अपनाया है। मानवाधिकार आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉक्टर पुनीत अरोड़ा ने बताया कि मामले को अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।