नारी वंदन अधिनियम पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र, कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की तैयारी
हरियाणा मंत्रिमंडल ने 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें नारी वंदन अधिनियम पर कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस ...और पढ़ें

नारी वंदन अधिनियम पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र (जागरण फोटो)
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। लोकसभा में नारी वंदन अधिनियम के 54 वोटों से गिर जाने के बाद भाजपा जहां राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष खासकर कांग्रेस के विरुद्ध आंदोलन कर रही है, वहीं भाजपा शासित राज्यों में विधानसभाओं के विशेष सत्र बुलाकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी है।
हरियाणा मंत्रिमंडल की बुधवार को गुरुग्राम में हुई बैठक में विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को बुलाने का निर्णय लिया गया। इस सत्र में कांग्रेस के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है।
ऐसा ही निंदा प्रस्ताव कांग्रेस की ओर से भी भाजपा के विरुद्ध लाने की तैयारी है, लेकिन विधानसभा में भाजपा का बहुमत होने की वजह से उसके द्वारा कांग्रेस के विरुद्ध लाया जाने वाला निंदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने की उम्मीद है, जबकि कांग्रेस की ओर से भाजपा के विरुद्ध लाया जाने वाला निंदा प्रस्ताव स्वीकार होने में भी संशय है।
27 अप्रैल को बुलाया जाएगा विशेष सत्र
हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 27 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाने का फैसला होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने बुधवार को ही चंडीगढ़ में राज्यपाल प्रो. असीम घोष से मुलाकात की।
राज्यपाल और स्पीकर के बीच एक दिवसीय विशेष सत्र के संभावित कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दिन भाजपा की ओर से हरियाणा में ग्रुप डी के कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए बिल लाए जाने की संभावना है। हरियाणा क्लेरिकल सर्विसेज रिक्रूटमेंट एंड कंडीशंस आफ सर्विस बिल लाने का निर्णय भी राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में किया जा चुका है।
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राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशेष सत्र के आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र की सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध, सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित की जाएं।
देश के इतिहास में एक काला अध्याय: सीएम सैनी
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 16 और 17 अप्रैल को संसद में हुई घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि देश के सामने विपक्षी दलों का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। विपक्ष ने खुद को महिला-विरोधी और सत्ता का भूखा साबित कर दिया है। इन दिनों को देश के इतिहास में एक ''काला अध्याय'' के तौर पर याद किया जाएगा।
विपक्षी दलों ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को मात्र एक ''वोट बैंक'' के तौर पर इस्तेमाल किया है। देश की महिलाओं को फैसले लेने की प्रक्रियाओं में सार्थक भागीदारी से वंचित रखा है। विपक्ष के विरोध के चलते ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है।
दान नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार है: सीएम सैनी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणियों का हवाला देते हुए नायब सैनी ने कहा कि महिलाओं की राजनीति में भागीदारी कोई ''दान'' नहीं, बल्कि उनका ''अधिकार'' है।' उन्होंने परिसीमन को लेकर विपक्ष के दावों को भी खारिज कर दिया।
नायब सैनी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही तथ्यों के साथ यह साफ़ कर चुके हैं कि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं की जाएगी।
आने वाले समय में महिला मतदाता ऐसी राजनीति का कड़ा जवाब देंगी। महिलाएं अपनी वोट की ताक़त का इस्तेमाल कर उन दलों को करारा जवाब देंगी जो उनके सशक्तीकरण का विरोध करते हैं।
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