राज्य ब्यूरो, पंचकूला। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत हरियाणा में नियुक्त स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित वेतन तथा अन्य सुविधाएं नहीं मिलने का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में रखा गया।
रोहतक से कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने लोकसभा में प्रश्न काल के दौरान सवाल किया कि स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित वेतन तथा अन्य सुविधाएं क्यों नहीं दी जा रही है।
इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव ने हरियाणा सरकार के दावे के अनुरूप बताया कि सभी एनएचएम कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन दिया जा रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि एनएचएम के अंतर्गत लगे कर्मचारियों को मानव संसाधन बजट के अनुरूप पांच प्रतिशत वेतन वृद्धि के रूप में स्वीकृत किया जाता है और कुल मानव संसाधन बजट का तीन प्रतिशत मानव संसाधन प्रोत्साहन के लिए अनुशंसित किया जाता है, जिसके अंतर्गत राज्य को वास्तविक वेतन वृद्धि तय करने का विवेकाधिकार होता है।
एनएचएम कर्मचारियों के लिए 13.36 प्रतिशत की दर से एक अप्रैल, 2015 के बाद से 15000 प्रति माह ईपीएफ (नियोक्ता का अंशदान) में भी योगदान दिया जाता है। हालांकि सांसद दीपेंद्र हुड्डा केंद्रीय राज्य मंत्री के जवाब से सहमत नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि स्थाई सेवा के बावजूद एनएचएम कर्मचारियों को अस्थायी वेतन, असुरक्षा की स्थिति और महीनों तक महंगाई भत्ते में वृद्धि का भुगतान नहीं होने का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को सेवा लाभों से वंचित कर दिया है और सेवा संबंधी उप-नियमों को जून 2024 से निलंबित कर दिया है। कर्मचारियों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अनेक कर्मचारी अपने बच्चों की स्कूल फीस भी समय पर नहीं भर पा रहे हैं। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि यह राज्य का मामला है, जबकि एनएचएम की फंडिंग और नीतिगत नियंत्रण केंद्र के हाथ में है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों की सेवा नियमावली को ठंडे बस्ते में डालकर सीधे उनके अधिकारों पर चोट की है।
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