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    'परीक्षा कठिन लेकिन हर श्रद्धालु को सुरक्षित निकालेंगे', चंबा में आपदा के बीच सुक्खू सरकार ने दिलाया भरोसा

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:53 PM (IST)

    चंबा में भारी बारिश और रावी नदी के उफान से संकट उत्पन्न हो गया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार हर श्रद्धालु को सुरक्षित निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है और प्रभावित इलाकों में राशन और जरूरी सामान हवाई मार्ग से पहुंचाया जा रहा है।

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    CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आपदा के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने की बात कही (फोटो: जागरण)

    जागरण संवाददाता, चंबा। भारी बारिश, बादल फटने और रावी नदी के उफान से उपजे संकट ने चंबा और भरमौर क्षेत्र को घेर रखा है।

    लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि इस आपदा में कोई भी श्रद्धालु बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जमीनी स्तर पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है।

    प्रशासनिक अमला, सुरक्षा दल, ग्रामीण और विभागीय टीमें दिन-रात एक कर रही हैं ताकि हर यात्री अपने घर सुरक्षित पहुंच सके।

    दो दिन से मंत्री आपदा क्षेत्रों में डटे

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह दो दिनों से आपदा प्रभावित इलाकों में डटे हुए हैं और हर गतिविधि पर नज़र रखे हुए हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग सहित सभी संपर्क मार्गों को खोलने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। जहाँ सड़क बहाली कठिन है, वहां से श्रद्धालुओं को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

    हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों तक न सिर्फ राहत पहुंचाई जा रही है बल्कि जरूरत पड़ने पर फंसे हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों तक ले जाया जा रहा है।

    हवाई मार्ग से पहुँचाया जा रहा राशन

    भरमौर और दूरदराज़ के प्रभावित इलाकों में राशन, खाद्य सामग्री और जरूरी सामान हवाई मार्ग से पहुँचाया गया है ताकि किसी को भी भूखा न रहना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ भी आवश्यकता होगी, वहां हवाई सेवा के जरिए सामग्री पहुंचाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आपदा प्रभावित हर व्यक्ति के साथ खड़ी है और युद्धस्तर पर कार्य जारी है।

    यह संकट कठिन है लेकिन हिमाचल की जनता की हिम्मत और सरकार की तत्परता से हम इस आपदा पर काबू पाएंगे। शिवभूमि की यह परीक्षा है और इस परीक्षा में कोई भी श्रद्धालु अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।

    'झूठी अफवाहों से बचें और प्रशासन पर भरोसा रखें'

    लोगों से अपील की कि इंटरनेट मीडिया पर फैलाई जा रही झूठी अफवाहों से बचें और प्रशासन पर भरोसा रखें।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पठानकोट से राहत सामग्री के साथ निकला हेलीकॉप्टर खराब मौसम और घने कोहरे के कारण भरमौर में लैंड नहीं कर सका। लिहाज़ा उन्होंने स्वयं हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया।

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    बारिश और भूस्खलनों से क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों के साथ-साथ रावी नदी के बढ़े जलस्तर से हुए नुकसान का उन्होंने आकलन किया।

    बाद में हेलीकॉप्टर चंबा मुख्यालय के करियां में उतारा गया, जहाँ मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के साथ आपदा राहत कार्यों पर महत्वपूर्ण बैठक की।

    राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं

    भरमौर से लौटकर मुख्यमंत्री ने चंबा के रकया मे अधिकरियों की बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।

    फंसे हुए श्रद्धालुओं के भोजन, पानी, आश्रय और स्वास्थ्य सुविधा की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है और हर स्तर पर उनकी जरूरतें पूरी की जानी चाहिए।

    उन्होंने निर्देश दिया कि चंबा–भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग 154-ए की बहाली को प्राथमिकता पर लिया जाए ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही बहाल हो सके।बिजली और पेयजल आपूर्ति योजनाओं को भी अस्थायी तौर पर तुरंत बहाल करने के आदेश दिए गए।

    श्रद्धालुओं से मुख्यमंत्री ने की बातचीत

    मुख्यमंत्री ने कलसुंई क्षेत्र का दौरा भी किया और वहां फंसे श्रद्धालुओं से बातचीत की। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालना सरकार की पहली प्राथमिकता है।

    कलसुंई से करीब पाँच हज़ार श्रद्धालुओं को बसों और टैक्सियों के माध्यम से नूरपुर और पठानकोट भेजा गया है।

    जम्मू-कश्मीर से आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सलूणी से आगे छोटे वाहनों की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने सलूणी-खुंडिमरल सड़क को तुरंत बहाल करने के आदेश दिए ताकि किश्तवाड़ और डोडा जिलों से आए श्रद्धालु भी सुरक्षित घर पहुँच सकें।

    सरकार की प्राथमिकता है कोई भी व्यक्ति भूखा-प्यासा न रहे

    श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए एचआरटीसी की अतिरिक्त बसें और निजी संचालकों के वाहन तैनात किए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी व्यक्ति भूखा-प्यासा या बिना आश्रय के न रहे।

    मुख्यमंत्री ने चंबा करियां स्थित एनएचपीसी भवन में जिला प्रशासन के साथ समीक्षा बैठक करते हुए निर्देश दिए कि राहत शिविरों में पर्याप्त व्यवस्था हो और हर परिवार तक समय पर मदद पहुँचे।