राजनीति का अखाड़ा बने मंडी जिला के तीन बड़े शिक्षण संस्थान, CM के बयान पर हलचल तेज ...सियासी खींचतान से बढ़ी उलझन
Himachal Pradesh News मंडी जिले के तीन प्रमुख शिक्षा संस्थान राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गए हैं। सरदार पटेल विश्वविद्यालय थुनाग औद्यानिक एवं वानिकी महाविद्यालय और अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी नेरचौक में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दर्जा घटा दिया गया थुनाग महाविद्यालय को गोहर स्थानांतरित कर दिया गया

हंसराज सैनी, मंडी। जिला मंडी के तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान इन दिनों ज्ञान व शोध का केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक खींचतान का अखाड़ा बन गए हैं। जहां छात्र-छात्राओं को सपनों की ऊंचाई पकड़नी चाहिए थी, वहीं अब सियासी खींचतान उनके भविष्य को उलझा रही है।
पहले सरदार पटेल विश्वविद्यालय के पर कतरे गए
सरदार पटेल विश्वविद्यालय, जिसका सपना निचले हिमाचल की युवा पीढ़ी को नया आयाम देने का था। घरद्वार पर उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाना था। सत्ता परिवर्तन के बाद विश्वविद्यालय के ओर सुदृढ़ होने की उम्मीद थी, लेकिन एक के बाद एक निर्णयों से पर काट दिए गए। दर्जा घटा दिया गया। विश्वविद्यालय पूर्व भाजपा सरकार के समय स्थापित हुआ था। अब विश्वविद्यालय की स्वतंत्र पहचान दांव पर लगी है। छात्र असमंजस में खड़े हैं।
फिर थुनाग औद्यानिक एवं वानिकी महाविद्यालय को छेड़ा गया
30 जून की प्राकृतिक आपदा के बाद थुनाग के औद्यानिक एवं वानिकी महाविद्यालय की दिशा बदली गई। किसानों व बागबानों की उम्मीदों से जुड़े इस संस्थान में भी राजनीति का हस्तक्षेप गहराता चला गया। महाविद्यालय को वैसे तो यहां से स्थानांतरित करने की चर्चा कई माह से चल रही,लेकिन शायद सरकार सही समय का इंतजार कर रखी थी। आपदा की आड़ में महाविद्यालय को थुनाग से गोहर स्थानांतरित कर दिया। हालांकि आपदा से विश्वविद्यालय भवन को कोई नुकसान नहीं हुआ है।
अब अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी नेरचौक की बारी
नवीनतम विवाद नेरचौक के अटल आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय को लेकर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस विश्वविद्यालय को सरकाघाट स्थानांतरित करने की घोषणा की है। वहां सैनिक प्रशिक्षण संस्थान में इसे स्थापित करने की योजना बनाई गई है। हालांकि अभी वहां जमीन चिन्हित नहीं हुई है। करीब 100 बीघा से अधिक जमीन चाहिए। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाने वाला यह संस्थान भी अब राजनीतिक विवादों की गिरफ्त में आ गया है।
चुनावी वेला पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दिया था मंडी को विश्वविद्यालय
अटल विश्वविद्यालय चुनावी वेला में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मंडी को दिया था। प्रदेश के दूसरे बड़े जिले में कोई विश्वविद्यालय नहीं था। कांगड़ा में कृषि, सोलन में औद्यानिक एवं वानिकी, शिमला में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय तथा हमीरपुर में तकनीकी विश्वविद्यालय पहले से स्थापित था।। उनका उद्देश्य मंडी को चिकित्सा शिक्षा के केंद्र के रूप में स्थापित करना था। पर आज वही विरासत राजनीतिक सौदेबाजी में उलझी नजर आ रही है।
सियासी पालने में झूल रहे दोनों विश्वविद्यालय
मंडी को मिले दोनों विश्वविद्यालय अब सियासी पालने में झूल रहे हैं। कभी इन्हें दर्जा घटाने की बातें होती हैं, तो कभी स्थानांतरण की। यह अस्थिरता छात्रों व अभिभावकों के सपनों को तोड़ने लगी है।
दर्जा घटाने व स्थानांतरित किए जाने से खुश नहीं सत्ताधारी दल के नेता
चौंकाने वाली बात यह है कि सत्ताधारी दल के कई नेता भी इन निर्णयों से खुश नहीं हैं। वह जानते हैं कि शिक्षा के नाम पर राजनीति करना जनता की नाराजगी को जन्म देगा।
चुनाव में भाजपा बना सकती है मुद्दा
इस पर भाजपा पहले ही तेवर दिखा चुकी है। चुनावों के समय यह मुद्दा विपक्ष के हाथ में बड़ा हथियार बन सकता है। सत्ताधारी दल के नेताओं को जनता के प्रश्नों का सामना करना पड़ेगा। जब अभिभावक व युवा यह पूछेंगे कि उनकी शिक्षा व भविष्य क्यों राजनीति की भेंट चढ़ा, तब उत्तर देना आसान नहीं होगा।
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