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    Himachal News: तेजी से झड़ रहे हैं सेब के पत्ते, आसमायिक पतझड़ ने बढ़ाई बागबानों की चिंता

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 10:29 AM (IST)

    शिमला जिले में अत्यधिक वर्षा के कारण सेब के बगीचों में समय से पहले पत्ते झड़ने लगे हैं जिससे बागबानों को नुकसान हो रहा है और अगले साल की फसल भी प्रभावित हो सकती है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने सेब तोड़ने के बाद पौधों की पत्तियों को बचाने और पोस्ट हार्वेस्ट छिड़काव करने की सलाह दी है जिसमें ब्लाइटाक्स का उपयोग करने की बात कही है।

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    हिमाचल में तेजी से झड़ रहे हैं सेब के पत्ते

     जागरण संवाददाता, शिमला। इस बार ज्यादा वर्षा के कारण शिमला जिले में लगभग सभी बगीचों में सेब के पत्ते झड़ने आरंभ हो गए हैं। पारंपरिक किस्म के सेब बगीचों में यह समस्या ज्यादा है, जबकि नई किस्मों के बगीचों में ज्यादा नहीं है। असामयिक पतझड़ के कारण इस बार बागबानों को जहां काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है, वहीं अगले साल के सीजन पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।

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    बागबानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज का कहना है कि सेब तुड़ान के बाद बागबान बगीचों में पौधों की पत्तियों को बचाने पर ध्यान दें। अगर पत्तियां सुरक्षित रहेंगी तो अगले साल के लिए भी बीमा मजबूत बन पाएगा, लेकिन अगर समय से पहले ही पत्तियां झड़ जाती हैं तो अगले सीजन के लिए बीमा कमजोर तैयार होगा। इससे अगले वर्ष की फसल भी प्रभावित होगी।

    उन्होंने सलाह दी है कि पत्तियां बचाने के लिए बागबान सेब तुड़ान के 10 दिन बाद पोस्ट हार्वेस्ट का छिड़काव करें। पोस्ट हार्वेस्ट में सिर्फ ब्लाइटाक्स का छिड़काव करें। इसके अलावा अन्य छिड़काव करने से भी बचें। उनका कहना है कि 200 लीटर पानी में 600 ग्राम ब्लाइटाक्स के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं।

    डॉ. भारद्वाज का कहना है कि बागबान बगीचों में इस समय कोई अतिरिक्त पोषण तत्वों का छिड़काव करने की भी गलती करते हैं। अभी कोई अतिरिक्त पोषण देने की आवश्यकता नहीं है। मिट्टी में नमी काफी ज्यादा है। जिले में इस बार भारी वर्षा के कारण असामयिक पतझड़ से बागबान परेशान हैं। जिले में 50 से 60 प्रतिशत बगीचों में असामयिक पतझड़ की समस्या है।