केसरिया रंग पर इतना बवाल क्यों? पूर्व गोलकीपर श्रीजेश ने जर्सी विवाद को बताया फिजूल, कहा- फोकस सिर्फ मेडल पर हो
पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को जर्सी से जुड़े विवादों को पीछे छोड़कर 50 सालों से चला आ रहा पदक का सूखा खत्म करने की ओर ध्यान क ...और पढ़ें

हॉकी टीम की जर्सी
HighLights
जर्सी का विवाद छोड़कर पदक का सूखा खत्म करने पर ध्यान दें
हॉकी टीम की जर्सी से जुड़े विवाद पर पूर्व गोलकीपर की दो टूक
जर्सी का रंग 2014 और 2018 विश्व कप के लिए भी बदला था
नई दिल्ली, पीटीआई। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम को जर्सी से जुड़े विवादों को पीछे छोड़कर 50 सालों से चला आ रहा पदक का सूखा खत्म करने की ओर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। दो बार के ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता श्रीजेश का ये भी कहना है जर्सी का रंग बदले जाने में कुछ भी अजीब नहीं है। साल 2014 और 2018 के विश्व कप के दौरान भी ऐसा हुआ था।
श्रीजेश ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे दिए गए कारण (टर्फ का नीला रंग) पर सवाल करते हुए श्रीजेश ने जोर देकर कहा कि अगर खिलाड़ियों ने फैसले पर सहमति जता दी है तो बहस वहीं खत्म हो जानी चाहिए।
श्रीजेश ने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो मुझे शुरू में समझ ही नहीं आया कि इतना विवाद क्यों हो रहा है क्योंकि जर्सी का रंग 2014 और 2018 विश्व कप के लिए भी बदला था। यहां तक कि हमारी ट्रेनिंग की एक किट भी केसरिया रंग की थी। इस बार विश्व कप से पहले इस पर इतनी चर्चा क्यों हो रही है। क्या इसलिए कि ये केसरिया रंग की है या इसलिए कि रंग बदला गया। अगर विवाद रंग बदलने का है तो ये 2014 और 2018 में भी होना चाहिए था, जब हमने पीली और आसमानी नीले रंग की जर्सी पहनी थी।
उन्होंने कहा कि मुझे जर्सी का रंग बदलने में कोई परेशानी नहीं है लेकिन इसके पीछे बताया गया कारण अजीब है। अगर रंग इसलिए बदला जा रहा कि खिलाड़ियों को देखने में दिक्कत होती है तो नीली जर्सी दोबारा वापस नहीं आनी चाहिए। श्रीजेश ने कहा कि सही बात है कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी होने से देखने में थोड़ी दिक्कत आती है लेकिन टर्फ आए हुए 14 साल हो गए और जर्सी का रंग बस दो बार बदला है हम टोक्यो और पेरिस ओलिंपिक में भी नीली जर्सी ही पहनकर खेले।
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हालांकि श्रीजेश का ये भी मानना है कि अगर खिलाड़ियों को इससे समस्या नहीं है तो बहस नहीं होनी चाहिए। श्रीजेश ने कहा कि जहां तक मैंने मीडिया में देखा, रंग खिलाड़ियों की इच्छा के मुताबिक बदला गया है। हॉकी इंडिया ने एफआइएच से अनुमति भी ली होगी।
नीदरलैंड्स भी इसी रंग की जर्सी पहनता है इसलिए उनके विरुद्ध हम अपनी सफेद जर्सी पहन सकते हैं। अगर खिलाड़ियों ने इस फैसले से सहमति जताई है तो मामला वहीं खत्म हो जाता है क्योंकि अंत में मैदान पर खिलाड़ियों को ही रहना और अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि अपनी सर्वश्रेष्ठ हॉकी खेलिए, पदक का 50 साल का इंतजार खत्म कीजिए।