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    साइबर अपराधियों ने पूर्व वायुसेना अधिकारी को लगाया ₹53 लाख का चूना, 9 दिनों तक रखा 'डिजिटल अरेस्ट'

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 04:00 AM (IST)

    साइबर ठगों ने जम्मू में एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी को 'डिजिटल अरेस्ट' कर 52.90 लाख रुपये ठग लिए। अधिकारी की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्मक तस्वीर

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    जागरण संवाददाता, जम्मू। साइबर ठगों ने वायुसेना के एक सेवानिवृत अधिकारी को नौ दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 52.90 लाख रुपये ठग लिए। ठगों के चंगुल में फंसे अधिकारी ने छह फरवरी को इस मामले की जानकारी क्राइम ब्रांच को दी, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने 39.90 लाख रुपये की राशि बचा ली है।

    अधिकारी से शिकायत मिलते ही क्राइम ब्रांच ने तुरंत जांच शुरू की और धनराशि के ट्रांजेक्शन की कड़ियों को ट्रेस करते हुए संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की। शिकायत मिलने के मात्र तीन घंटे के भीतर 11.90 लाख रुपये जोधपुर स्थित येस बैंक के एक संदिग्ध खाते में पाई गई, जिसे कानूनी प्रक्रिया के तहत तुरंत होल्ड कर दिया गया।

    इसके अतिरिक्त, संबंधित खातों की अगली कड़ी में 4.90 लाख रुपये की भी राशि को होल्ड करवा दिया है। क्राइम ब्रांच के अनुसार इस मामले में बैंकों के साथ समन्वित प्रयासों के चलते 28 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी अन्य संदिग्ध खातों में ट्रेस की गई। इस प्रकार कुल 39,90,482 रुपये की राशि सुरक्षित करने में सफलता मिली, जिसे न्यायालय के माध्यम से शीघ्र ही शिकायतकर्ता के खाते में वापस जमा कराया जाएगा।

    यह कार्रवाई डीएसपी अलबीना मलिक, एसएचओ पुलिस स्टेशन सीआइसीइ जम्मू के नेतृत्व में इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह और हेड कांस्टेबल राकेश चौधरी की टीम ने की।

    क्या है डिजिटल अरेस्ट

    डिजिटल अरेस्ट एक साइबर धोखाधड़ी है, जहां जालसाज खुद को पुलिस, सीबीआई या ईडी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल/मैसेज के जरिये डराते हैं कि आप ड्रग्स तस्करी या मनी लान्ड्रिंग जैसे किसी गंभीर अपराध में फंस गए हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। डिजिटल अरेस्ट कानून में कोई चीज नहीं है और यह सिर्फ डराकर पैसे ठगने का एक तरीका है।

    यह करता है ऐसे काम

    • नकली पहचान: ठग पुलिस, आयकर या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं
    • गंभीर आरोप : वे पर ड्रग्स, मनी लान्ड्रिंग या बैंक धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाते हैं
    • डराने का तरीका : वे फर्जी वारंट, नकली पुलिस स्टेशन के बैकग्राउंड वाली वीडियो कॉल, एआई वायस क्लोनिंग और डरावनी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, ताकि डर जाएं
    • पैसे की मांग : गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई से बचने के बहाने (जमानत या जांच में सहयोग) वे तुरंत पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं


    इससे ऐसे बचें

    • सत्यापित करें : किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। अगर कोई अधिकारी होने का दावा करे, तो कॉल काट दें और उस विभाग के आधिकारिक नंबर पर खुद काल करके पुष्टि करें
    • पैसे न भेजें : कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती है