धनबाद में दो दिनों तक लैब में पड़ा रहा सैंपल, जिंदगी-मौत से अस्पताल में जूझती रही बच्ची
धनबाद में जापानी इंसेफेलाइटिस से एक 9 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। एसएनएमएमसीएच अस्पताल में इलाज में लापरवाही सामने आई है जहां सैंपल जांच में देरी हुई और बच्ची की हालत बिगड़ गई। रिम्स अस्पताल ने भी बच्ची को वापस भेज दिया था। स्वास्थ्य विभाग अब टीकाकरण को लेकर जागरूकता अभियान चला रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस मामले पर ध्यान दिया है।

मोहन गोप, धनबाद। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से 9 वर्षीय सोनम कुमारी को लेकर एसएनएमएमसीएच की इलाज को लेकर बड़ी उदासीनता सामने आई है।
दो दिनों तक बच्ची का सैंपल अस्पताल के लैबोट्री में पड़ा रहा। लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। दूसरी ओर, जेई का असर बच्ची पर धीरे-धीरे असर करता गया। मस्तिष्क पर अहरा असर हुआ और वह अचेत हो गई।
जांच देने में ही लगभग तीन दिन लगा दिए गए, जिससे बच्ची का समय पर उचित इलाज नहीं हो पाया। आखिरकार 15 अगस्त को सोनम की जान चली गई।
बताया जाता है कि आठ अगस्त को शाम चार बजे सोनम का सैंपल जांच के लिए लिया गया था। दूसरे दिन (9 अगस्त को राजकीय अवकाश) और 10 को रविवार था।
ऐसे में सैंपल देकर चिकित्सक व कर्मी भी बेपरवाह हो गए। रिपोर्ट 12 बजे तक मरीज के पास पहुंचा। तब तक सोनम की स्थिति और खराब हो गई थी।
चिकित्सक ने नहीं लिखा अर्जेंट, तो जांच होने में और देरी
सोनम का इलाज एसएनएमएमसीएच के शिशु रोग विभाग में हो रहा था। माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच के लिए सैंपल आने पर मरीज के स्थिति के बारे में शिशु रोग विभाग के चिकित्सकों ने अवगत नहीं कराया था।
ऐसे मरीजों के लिए पर्ची पर अर्जेंट लिखा जाता है, लेकिन सोनम के केस में गंभीरता का कोई जिक्र नहीं था। ऐसे में किसी ने सैंपल की गंभीरता को भी नहीं समझा।
बताया गया कि लैबोट्री में पहली बार जेई की जांच भी शुरू हुई थी और पहली जांच रिपोर्ट ही पॉजिटिव आ गई। उदासीनता पर अब अधिकारी एक दूसरे पर फेंका-फेंकी कर रहे हैं।
रिम्स ने इलाज की जगह वापस जाने को कह दिया
पांच अगस्त काे अचानक बच्ची की तबीयत खराब हो गई। दूसरे दिन मस्तिष्क का दाैरा पड़ने लगा। सोनम अचेत हो गई। घर वाले किसी तरह इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच ले गए। यहां चिकित्सकों ने जांच कर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर दिया।
सात को रिम्स लेकर स्वजन चले गए। रिम्स में एक दिन रखा गया, इसके बाद चिकित्सकों ने फिर एसएनएमएमसीएच रेफर कर दिया। 8 अगस्त काे पुन: बच्ची काे लेकर एसएनएमएमसीएच पहुंचे।
स्थिति काे देख डॉक्टराें ने बच्ची काे भर्ती कर लिया गया। इसी दिन जेई की जांच के लिए सैंपल लिए गए। लेकिन सैंपल आने में 12 अगस्त लग गए। अंतत: 15 अगस्त काे दिन के 10 बजे बच्ची की माैत हाे गई।
टीकाकरण को लेकर बढ़ाई होगी जागरूकता
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जेई टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन सोनम के पिता संजय राम ने टीका नहीं लगाया था। अब ऐसे इलाकों में विभाग सर्वे कर रहा है। लोगों को जागरूक करके बच्चों को टीका से जोड़ा जाएगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी संज्ञान लिया है। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाएगी। इसकी तैयारी की जा रही है।
मरीज की गंभीरता के बारे में नहीं बताया गया था। लैब में अवकाश में भी काम होता है। 11 अगस्त को दो बार सैंपल की जांच की गई, इसमें समय लगते हैं। इस कारण समय पर रिपोर्ट नहीं दिए जा सके। -डॉ. सुजीत कुमार सिंह, एचओडी, माइक्रोबायोलाजी विभाग
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