Surya Hansda: 2009 में अपराध से राजनीति में एंट्री, बीजेपी सहित इन पार्टियों का रह चुका है दुलारा
गोड्डा में पुलिस मुठभेड़ में अपराधी से नेता बने सूर्या हांसदा की मौत हो गई जिस पर 32 मामले दर्ज थे। सूर्या ने 2009 में झाविमो से राजनीतिक सफर शुरू किया और 30 हजार वोट पाए। 2014 में जेवीएम से 31 हजार वोट मिले फिर 2019 में भाजपा से 65 हजार वोट हासिल किए। 2024 में जेकेएलएम से लड़े लेकिन कम वोट मिले।

संवाददाता, गोड्डा। अपराधी से नेता बने सूर्या हांसदा की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। उस पर कुल 32 आपराधिक मामले दर्ज थे। सूर्या हांसदा का अपराध और राजनीति से चोली-दामन का साथ रहा है।उसका राजनीतिक सफर वर्ष 2009 से शुरू हो गया था। वर्ष 2009 में सूर्या ने पहला विस चुनाव झाविमो के टिकट पर लड़ा था। इसके पहले सूर्या की पहचान केवल एक अपराधी के रूप में थी। वर्ष 2009 के बाद सूर्या का राजनीतिक सफरनामा शुरू हो गया था। सूर्या को 2009 के विधानसभा चुनाव में 30 हजार वोट मिले थे। इसके बाद सूर्या व उनकी मां नीलमणि मुर्मू राजनीतिक रूप से और भी सक्रिय हो गए।
हालांकि सूर्या हांसदा का बोआरीजोर क्षेत्र में दबदबा था ही, राजनीति में प्रवेश के बाद से सूर्या राजनीतिक रूप से भी सक्रिय हो गया। उसने दोबारा वर्ष 2014 में जेवीएम के टिकट से चुनाव लड़ा। इसमें भी सूर्या को तकरीबन 31 हजार वोट मिले, लेकिन इसके बाद सूर्या ने अगले विधानसभा चुनाव में अपनी दावेदारी जेवीएम के बजाय बीजेपी से पेश कर दी।
वर्ष 2019 के चुनाव में सूर्या ने जेवीएम के बजाय भाजपा के टिकट पर विस का चुनाव लड़ा, जिसमें सूर्या को दोनों चुनाव से ज्यादा कुल 65 हजार मत प्राप्त हुए। बीजेपी के टिकट पर चुनाव लडने से सूर्या का राजनीतिक रसूख उस क्षेत्र में बढ गया, लेकिन इस बार के विस चुनाव वर्ष 2024 में सूर्या ने जेकेएलएम का दामन थाम लिया। जेकेएलएम के टिकट पर सूर्या ने चुनाव भी लड़ा था, जिसमें सूर्या हांसदा के मत पिछले तीन बार के विस चुनाव से बहुत कम वोट प्राप्त हुए थे।
मां नीलमणि मुर्मू रह चुकी है जिप सदस्य
सूर्या हांसदा की मां नीलमणि मुर्मू बोआरीजोर क्षेत्र से जिप सदस्य भी रह चुकी हैं। वह राजनीतिक रूप से इस क्षेत्र में कई बार सक्रिय रही हैं। सूर्या की मां ने जिप सदस्य जीतने के उपरांत जिप उपाध्यक्ष बनने का प्रयास किया था, हालांंकि इसमें वे असफल रही थीं ।
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