हजारीबाग की प्रियांशु कुमारी बनीं JAC 10वीं बोर्ड की स्टेट टॉपर, 99.6% अंक हासिल कर रचा इतिहास
हजारीबाग की प्रियांशु कुमारी ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 99.6% अंक प्राप्त कर राज्य में टॉप किया है। ...और पढ़ें

हजारीबाग की प्रियांशु कुमारी बनीं JAC 10वीं बोर्ड की स्टेट टॉपर

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संवाद सहयोगी, हजारीबाग। कटकमसांडी प्रखंड के लुपुंग गांव से निकलकर एक साधारण परिवेश में पली-बढ़ी छात्रा ने असाधारण सफलता की कहानी लिख दी है। इंदिरा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की मेधावी छात्रा प्रियांशु कुमारी ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में स्टेट टॉपर बनकर पूरे राज्य में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है।
उनकी इस उपलब्धि ने न केवल हजारीबाग, बल्कि पूरे झारखंड को गौरवान्वित किया है। प्रियांशु ने 498 (99.6 प्रतिशत) अंक हासिल कर इतिहास रचा है।
प्रियांशु ने दिए सक्सेस टिप्स
प्रियांशु की यह सफलता किसी एक दिन की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की निरंतर साधना, अनुशासन और आत्मविश्वास का नतीजा है।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में मिलने वाली नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उनकी नींव को मजबूत किया, लेकिन असली फर्क स्वाध्याय ने पैदा किया। स्कूल से लौटने के बाद वे हर दिन निर्धारित समय तक पढ़ाई करती थीं, कठिन विषयों को बार-बार दोहराती थीं और अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने का प्रयास करती थीं।
'समय की बर्बादी नहीं की'
उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान कभी भी समय की बर्बादी नहीं की। मोबाइल और अन्य व्यर्थ चीजों से दूरी बनाकर उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा। उनका मानना है कि अगर छात्र नियमित अभ्यास और अनुशासन बनाए रखें, तो कोई भी परीक्षा कठिन नहीं होती।
भविष्य को लेकर प्रियांशु का लक्ष्य भी उतना ही बड़ा है जितनी उनकी यह सफलता। उन्होंने बताया कि 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती हैं, ताकि समाज और देश के लिए कुछ बेहतर कर सकें।
खाली समय में प्रियांशु क्या करती हैं?
पढ़ाई के साथ-साथ प्रियांशु का रुझान संगीत की ओर भी है। वे खाली समय में संगीत सुनना और सीखना पसंद करती हैं। इसी रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने 11वीं में संगीत को विषय के रूप में चुनने का निर्णय लिया है, ताकि शिक्षा के साथ अपनी रचनात्मकता को भी निखार सकें।
उनकी इस उपलब्धि के पीछे परिवार का मजबूत सहयोग भी रहा है। पिता दिनेश्वर प्रसाद मेहता एक व्यवसायी हैं, जो हर परिस्थिति में अपनी बेटी के सपनों को समर्थन देते रहे, वहीं माता लता देवी ने संस्कार और प्रेरणा देकर हमेशा उनका हौसला बढ़ाया।
आज प्रियांशु की यह सफलता हजारों विद्यार्थियों के लिए एक संदेश है कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो।
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