जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। लौहनगरी के प्रमुख युवा उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। वारदात को बीते 24 घंटे से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन पूर्वी सिंहभूम जिले की पुलिस के हाथ अब तक कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।
हालांकि, पुलिस महकमे में मचे हड़कंप के बीच जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया है। जमशेदपुर पुलिस की कई टीमें संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
बिष्टुपुर का रास्ता और सोनारी का रहस्य
पुलिस के लिए सबसे बड़ी पहेली कैरव गांधी का रूट बना हुआ है। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कैरव घर से बिष्टुपुर स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) जाने की बात कहकर अपनी कार से निकले थे।
जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि उनकी अंतिम मोबाइल लोकेशन सोनारी में मिली। जबकि उनकी कार लावारिस हालत में चांडिल के कांदरबेड़ा के पास बरामद हुई।
पुलिस अब इस सवाल का जवाब ढूंढ रही है कि बिष्टुपुर जाने वाले कैरव सोनारी क्यों गए? क्या उन्हें किसी परिचित ने फोन कर वहां बुलाया था, या अपहरणकर्ताओं ने रास्ते में ही उन्हें जबरन गाड़ी सहित मोड़ लिया?
तकनीकी साक्ष्यों पर टिकी जांच: कॉल डंप और सीसीटीवी
पुलिस ने जांच को दिशा देने के लिए डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया है। सीएच एरिया, रिवेरा और सोनारी लिंक रोड के तमाम सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि कैरव की कार का पीछा कोई संदिग्ध वाहन कर रहा था या नहीं।
इसके साथ ही, पुलिस 'टावर डंप' तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सोनारी और कांदरबेड़ा के उन मोबाइल नंबरों का डेटा निकाला जा रहा है, जो घटना के समय दोनों स्थानों पर सक्रिय पाए गए थे। कैरव के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी बारीकी से जांच की जा रही है ताकि अंतिम बातचीत के बारे में पता चल सके।
पेशेवर अपराधियों की सोची-समझी साजिश!
वारदात के तरीके को देखकर पुलिस को इसमें किसी पेशेवर गिरोह का हाथ होने का अंदेशा है। पुलिस को कार 'इग्निशन ऑन' (चाबी लगी हुई) हालत में मिली है।
चौंकाने वाली बात यह है कि कैरव का मोबाइल कार के नीचे छिपाया गया था। यह इस बात का संकेत है कि अपराधी तकनीक के जानकार थे और वे नहीं चाहते थे कि पुलिस मोबाइल लोकेशन के जरिए तुरंत उनका पीछा कर सके।
पुराने विवादों और जेल से छूटे अपराधियों पर नजर
पुलिस अब गांधी परिवार की पृष्ठभूमि और उनके व्यावसायिक संबंधों की भी पड़ताल कर रही है। कैरव की छह अलग-अलग कंपनियां हैं। पुलिस यह जांच रही है कि क्या किसी कंपनी में कोई विवाद चल रहा था या कोई पूर्व कर्मचारी रंजिश रखता था। इसके साथ ही, हाल ही में जेल से छूटे पेशेवर अपराधियों का भौतिक सत्यापन भी शुरू कर दिया गया है।
फिलहाल, फॉरेन्सिक टीम ने कार से फिंगरप्रिंट के नमूने लिए हैं। शहर की नाकेबंदी जारी है, लेकिन कैरव का कोई पता न चलना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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