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    Kolhan University में क्लस्टर प्रणाली पर बड़ा फैसला: कई कॉलेजों ने बंद किए पुराने विषय; जानें किस कॉलेज में कौन सा विषय बदलेगा

    By Ch Rao Edited By: Sanjeev Kumar
    Updated: Tue, 26 May 2026 10:35 PM (IST)

    कोल्हान विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में क्लस्टर प्रणाली लागू करने और शिक्षण कार्यक्रमों के पुनर्गठन पर चर्चा हुई। कई कॉलेजों में पुराने विष ...और पढ़ें

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    मंगलवार को चाईबासा में कुलपति प्रो. (डाॅ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में शैक्षणिक परिषद की बैठक हुई।

    HighLights

    1. कोल्हान विश्वविद्यालय में क्लस्टर प्रणाली लागू करने का निर्णय।

    2. कई कॉलेजों में पुराने विषय बंद कर नए जोड़े जाएंगे।

    3. क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण पर विश्वविद्यालय का जोर।

    जागरण टीम, जमशेदपुर/चाईबासा। कोल्हान विश्वविद्यालय (KU) चाईबासा में मंगलवार को कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता की अध्यक्षता में शैक्षणिक परिषद (Academic Council) और सभी अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों की आपात बैठक आयोजित की गई।

    इस बैठक का मुख्य एजेंडा झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित क्लस्टर प्रणाली (Cluster System) को लागू करना और कोल्हान विश्वविद्यालय के कॉलेजों में शिक्षण कार्यक्रमों का पुनर्गठन करना था। बैठक में कई कॉलेजों ने कम नामांकन वाले पुराने विषयों को बंद कर नए रोजगारपरक और क्षेत्रीय विषयों को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। 
     

    जानिए किस कॉलेज में क्या बदलाव है प्रस्तावित? 

    बैठक में विभिन्न महाविद्यालयों के लिए विषय संयोजनों (Subject Combinations) और संशोधनों पर विस्तृत चर्चा हुई, जो इस प्रकार हैं: 
    •     टाटा कॉलेज, चाईबासा: यहां मुंडारी विषय के स्थान पर अब कुरमाली विषय को शामिल करने का प्रस्ताव है। 
    •     महिला कॉलेज, चाईबासा: स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के लिए समाजशास्त्र (Sociology) की जगह ‘हो’ भाषा को शामिल करने पर सहमति बनी।
    •     घाटशिला कॉलेज: यहां समाजशास्त्र के स्थान पर मनोविज्ञान (Psychology) लाने का प्रस्ताव है। 
    •     एसबी. कॉलेज, चांडिल: मानवशास्त्र (Anthropology) के स्थान पर संताली भाषा जोड़ने पर विचार किया गया।
    •     बहरागोड़ा कॉलेज: मनोविज्ञान के स्थान पर मुंडारी विषय प्रस्तावित किया गया है।
    •     जेएलएन कॉलेज, चक्रधरपुर: यहां समाजशास्त्र के स्थान पर कुरमाली विषय रखने का प्रस्ताव है। 
    •     बहरागोड़ा और जेएलएन कॉलेज: इन दोनों कॉलेजों में ओड़िआ भाषा को टीआरएस (TRS) से अलग करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
    •     केएस. कॉलेज, सरायकेला: यहां गणित और कुरमाली विषय की सीटों के पुनर्निर्धारण और फैकल्टी मैनेजमेंट पर बात हुई। 
    •     जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज: इस कॉलेज में इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी और अंग्रेजी विषयों की सीटों के पुनर्निर्धारण और नए संकाय पुनर्विन्यास को मंजूरी देने का प्रस्ताव है।


    इन कॉलेजों में नहीं होगा कोई बदलाव  

    कोल्हान के कई बड़े कॉलेजों ने अपने वर्तमान विषय संयोजन को यथावत (जैसा है वैसा ही) रखने का प्रस्ताव दिया है। इनमें जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जीएससीडब्ल्यू (वर्कर्स महिला कॉलेज) जमशेदपुर, एलबीएसएम कॉलेज (करंडिह), जीसी. जैन कॉमर्स कॉलेज (चाईबासा), महिला कॉलेज सरायकेला, को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज और सभी नए डिग्री व मॉडल कॉलेज शामिल हैं। 
     

    कम सीटों वाली क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं का संरक्षण करेगा KU 

    बैठक में विभिन्न प्राचार्यों ने कहा कि क्लस्टर प्रणाली के तहत कुछ स्थानीय, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं को सिर्फ इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि उनमें छात्रों की संख्या (Intake Capacity) 60 से कम है।

    इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राचार्यों की मांग का समर्थन किया। कुलपति ने कहा कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय आवश्यकताओं से जुड़े इन विषयों को बंद नहीं होने दिया जाएगा। 
     

    एडमिशन के लिए कॉलेज वेबसाइट पर जारी हो गाइडलाइन  

    विश्वविद्यालय इसके संरक्षण के लिए झारखंड सरकार के उच्च शिक्षा विभाग को अपनी विशेष अनुशंसा भेजेगा। कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने कहा कि क्लस्टर प्रणाली विद्यार्थियों के लिए बिल्कुल नई व्यवस्था होगी, इसलिए उन्हें कोई भ्रम न हो। इसके लिए उन्होंने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
    •     वेबसाइट पर हो पूरी जानकारी: कोल्हान यूनिवर्सिटी के अंतर्गत आने वाले सभी कॉलेजों की वेबसाइट पर क्लस्टर सिस्टम से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश, विषय संयोजन (Subject Combination) और जरूरी सूचनाएं तुरंत अपलोड की जाएं। 
    •     एडमिशन हेल्पलाइन: सभी प्राचार्य अपने-अपने कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले एक समर्पित हेल्पलाइन काउंटर और फोन नंबर जारी करें, ताकि छात्रों को भटकना न पड़े। 
    •     अखबारों में विज्ञापन: ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों और छात्रों तक जानकारी पहुंचाने के लिए समाचार पत्रों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए।


    आरक्षित वर्ग के छात्र पहले से तैयार रखें ये 3 कागजात 

    बैठक के दौरान प्राचार्या डॉ. वीणा प्रियदर्शी ने सुझाव दिया कि एडमिशन के समय आरक्षित वर्ग के कई छात्र जरूरी दस्तावेज नहीं ला पाते हैं, जिससे उनकी सीट छूट जाती है।

    इसे देखते हुए कुलपति ने विशेष रूप से एसटी, एससी और ओबीसी (ST, SC & OBC) वर्ग के विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे एडमिशन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही अंचल या अनुमंडल कार्यालय से अपने अपडेटेड दस्तावेज बनवाकर रख लें:
    •     जाति प्रमाण-पत्र (Caste Certificate)
    •     आवासीय प्रमाण-पत्र (Residential Certificate)
    •     आय प्रमाण-पत्र (Income Certificate) 
    बैठक के अंत में नई क्लस्टर प्रणाली को छात्रहित में सुचारू रूप से लागू करने के लिए सभी पदाधिकारियों ने अपनी प्रतिबद्धता जताई।