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    हाथी अपने समूह से बिछड़ने के बाद इसलिए हो जाते हैं उग्र, कारण जानकर हो जाएंगे हैरान

    Updated: Sun, 11 Jan 2026 06:26 PM (IST)

    पश्चिमी सिंहभूम में एक जंगली हाथी ने 20 लोगों को मार डाला है, जिससे वन विभाग उसे पकड़ने में जुटा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हाथी सामाजिक प्राणी होते है ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो।

    डिजिटल डेस्‍क, जमशेदपुर। पश्चिमी सिंहभूम जिले में दस दिनों के भीतर एक जंगली हाथी ने 20 लोगों को मार डाला है। यह हाथी अब तक वन विभाग की पकड़ से दूर है।

    झारखंड के कई जिलों के वन कर्मचारी व अधिकारी और विशेषज्ञ इस हाथी को पकड़ने के लिए प्रभावित इलाकों की खाक छान रहे हैं। लगातार लोगों की हत्याएं कर रहा हाथी उग्र है।

    वन्य जीवन में ये समूह में रहते हैं

    ऐसे में अहम सवाल यह है कि हाथी समूह से बिछड़ने के बाद आखिर उग्र क्यों हो जाते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे के रोचक कारण- 

    हाथी हमेशा से ही सामाजिक और समझदार जानवरों के रूप में जाने जाते हैं। वन्य जीवन में ये समूह में रहते हैं और परिवार, भोजन और सुरक्षा के लिए आपसी सहयोग करते हैं।

    जानें हाथियों का सामाजिक और जैविक व्यवहार 

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब हाथी किसी कारणवश अपने समूह से बिछड़ जाते हैं, तो उनका व्यवहार अचानक उग्र और असामान्य रूप से आक्रामक हो सकता है। वन्यजीव वैज्ञानिक इसे उनके सामाजिक और जैविक व्यवहार के साथ जोड़कर समझाते हैं।

    हाथी सामाजिक जीव हैं। मादा हाथियों का समूह सदैव परिवार और बच्चों के इर्द-गिर्द रहता है। इन समूहों में वरिष्ठ हाथी अनुभव साझा करते हैं, मार्गदर्शन देते हैं और तनाव के समय अन्य हाथियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।

    समूह से बिछड़ने पर होता है असुरक्षा का बोध

    समूह से बिछड़ने पर हाथी इस सुरक्षा और मार्गदर्शन से वंचित हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह असुरक्षा अकेले हाथियों में तनाव और घबराहट पैदा करती है, जो जल्दी उग्र व्यवहार में बदल जाती है।

    विशेषकर नर हाथी, जिन्हें वन्य जीवन में सालिटरी बुल कहा जाता है, प्रजनन उम्र में हार्मोनल बदलाव से अधिक आक्रामक हो जाते हैं। समूह में वरिष्ठ नर उन्हें नियंत्रित करते हैं, लेकिन अकेले रहने पर यह नियंत्रण नहीं रहता, जिससे उनका आक्रामक व्यवहार बढ़ जाता है।

    अनुभवहीनता भी उग्र व्यवहार को बढ़ाती है

    वहीं युवा हाथियों की अनुभवहीनता भी एक बड़ा कारण है। समूह में वे वरिष्ठ हाथियों से सुरक्षा और भोजन की खोज के अनुभव सीखते हैं, लेकिन अकेले होने पर उन्हें स्वयं ही निर्णय लेने पड़ते हैं। यह अनुभवहीनता भी उनके उग्र व्यवहार को बढ़ाती है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि अकेले हाथियों की भूख और प्यास भी उनकी चिड़चिड़ाहट बढ़ा देती है। भोजन और जल के लिए लंबे रास्ते तय करना पड़ता है और मनुष्य या अन्य जानवरों के संपर्क में आने पर सतर्कता आसानी से आक्रामकता में बदल जाती है।

    अकेले हाथी दिखाई देने पर भीड़ न जमा करें

    यही कारण है कि वन क्षेत्रों में अकेले हाथियों की घटनाओं में अधिकतर हमले और झड़पें देखी जाती हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अकेले हाथियों के आक्रामक होने के पीछे पर्यावरणीय और जैविक कारक एक साथ काम करते हैं।

    सामाजिक संरचना का टूटना, हार्मोनल बदलाव, अनुभवहीनता और भूख-प्यास ये सभी मिलकर अकेले हाथी को अधिक खतरनाक बना देते हैं।

    वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण संगठन लोगों से अपील करते हैं कि हाथियों के आक्रामक व्यवहार को समझें और उन्हें अकेले परेशान न करें। जंगल के किनारे या ग्रामीण इलाकों में अकेले हाथी दिखाई देने पर भीड़ न जमा करें और उनसे दूरी बनाए रखें।

    विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि वन्यजीवों के लिए पर्याप्त वन आवास और जल-स्रोत सुनिश्चित करना भी उनकी हिंसक प्रवृत्ति को कम करने में मदद करता है।

    वन्य जीवन विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि हाथियों के उग्र व्यवहार को केवल उनके अकेलेपन और बिछड़ने की घटना से समझा जा सकता है। इन जानवरों की सामाजिक और जैविक संरचना उनके व्यवहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए वन्य जीवन प्रबंधन में अकेले हाथियों की सुरक्षा और मानव-सुरक्षा दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।