Babulal Marandi ने शराब घोटाले में कह दी बड़ी बात, एसीबी रात में गायब कर रही शराब घोटाले के साक्ष्य
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में नया मोड़ आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय से शराब घोटाले से जुड़े दस्तावेज गायब करने का गंभीर आरोप लगाया है। दावा किया कि डीजीपी की निगरानी में मंगलवार रात अंधेरे में ट्रक के जरिए दस्तावेज ढोए गए जो संदिग्ध है। उ

राज्य ब्यूरो, रांची । झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में नया मोड़ आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कार्यालय से शराब घोटाले से जुड़े दस्तावेज गायब करने का गंभीर आरोप लगाया है।
कहा-डीजीपी की निगरानी में एसीबी हटा रही है फाइल
मरांडी ने दावा किया कि डीजीपी की निगरानी में मंगलवार रात अंधेरे में ट्रक के जरिए दस्तावेज ढोए गए, जो संदिग्ध है। उन्होंने इसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) की जांच से बड़े राजनीतिक व्यक्तियों को बचाने की साजिश बताया।
एसीबी की इस कार्रवाई से शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में बाधा आने की जानकारी भी उन्होंने दी है। मरांडी ने कहा कि यह काम महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने के लिए डीजीपी द्वारा किया जा रहा है।
आने वाले समय में केंद्रीय एजेंसी, ईडी और सीबीआइ की जांच की आशंका को देखते हुए घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेने और सबूतों को नष्ट होने से रोकने की अपील की है। इस बात की जांच करने को भी कहा है कि किसके इशारे में सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो रही है।
शराब घोटाले की अब तक की कहानी
झारखंड में 2022 की नई शराब नीति के तहत लागू छत्तीसगढ़ मॉडल से शुरू हुआ यह घोटाला सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का कारण बना।
जांच में कई बड़े खुलासे हुए, जिनमें नकली होलोग्राम, अवैध शराब बिक्री, और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए गबन शामिल हैं।
इस घोटाले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और जांच का दायरा झारखंड से छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा तक फैल गया है।
2022 में घोटाले का हुआ खुलासा
2022 में झारखंड में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित नई शराब नीति लागू की गई। आरोप है कि इस नीति में बदलाव कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया।
नकली होलोग्राम और अवैध शराब बिक्री से सरकार को 450 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। बीयर की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये की अतिरिक्त वसूली से भी करोड़ों रुपये की कमाई की।
एसीबी की जांच शुरू
एसीबी ने 27 सितंबर 2024 को प्रारंभिक जांच (पीई) शुरू की थी। जांच में कई अहम साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को 20 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया। चौबे पर शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
गिरफ्तारियां और पूछताछ
अब तक इस मामले में 10 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह, और छत्तीसगढ़ के कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया शामिल हैं।
एसीबी ने 27 लोगों को समन जारी किया, जिनमें से कई से पूछताछ जारी है। जांच में छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट से जुड़े माफियाओं की भूमिका भी सामने आई है।
विनय चौबे को जमानत
19 अगस्त 2025 को विनय कुमार चौबे को एसीबी कोर्ट से जमानत मिल गई, क्योंकि एसीबी 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी।
मरांडी ने इसे जांच में ढिलाई का सबूत बताया और आरोप लगाया कि यह सुनियोजित साजिश थी। कोर्ट ने जमानत पर सख्त शर्तें लगाईं, जैसे चौबे का राज्य छोड़कर न जाना और मोबाइल नंबर न बदलना।
बाबूलाल मरांडी के आरोप
मरांडी ने लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि घोटाला सुनियोजित था और इसके तार मुख्यमंत्री तक जुड़े हैं।
मरांडी ने अप्रैल 2022 में ही सोरेन को पत्र लिखकर शराब नीति की खामियों के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जांच में ढिलाई, पूछताछ के दौरान रिकॉर्डिंग न करने, और चार्जशीट दाखिल न करने जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए। मरांडी ने सीबीआई जांच की मांग की है।
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