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    Weather Update: रांची के 'अर्बन हीट आईलैंड' बनने का खतरा, मौसम वैज्ञानिक ने बताए बचाव के उपाय 

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 03:24 PM (IST)

    रांची में 'अर्बन हीट आईलैंड' बनने का खतरा बढ़ रहा है, जिससे तापमान में वृद्धि हुई है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण जैसे ...और पढ़ें

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    अभिषेक आनंद ने बताए मौसम के खतरे। ग्राफिक्स एआई जनरेटेट

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    जागरण संवाददाता, रांची। झारखंड की राजधानी रांची समेत पूरे देश का मौसम बदल रहा है, स्थिति नहीं सुधरी तो हम अलार्मिंग स्टेज तक पहुंच सकते हैं। हमें पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ नियमित अंतराल पर पौधारोपण करना होगा, ताकि धरा को हरा भरा और शीतल बना सकें, इसके लिए सामूहिक प्रयास करना होगा। उक्त बातें दैनिक जागरण के जागरण विमर्श कार्यक्रम को संबोधित करते मौसम विज्ञान केंद्र रांची के वरीय विज्ञानी अभिषेक आनंद ने कही।

    उन्होंने कहा कि आधुनिक संसाधनों के कारण अब मौसम का पूर्वानुमान करना आसान और सटीक हो गया है। पर्यावरण संरक्षण आज इंसानों के बीच बड़ी चुनौती है, मौसम में बदलाव के कई कारक हैं, इन्हें पहचानना होगा, ताकि इसका निवारण भी हो सके। हम जल जंगल जमीन की बात तो करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ विशेष नहीं के पाते हैं।

    लगातार कंक्रीट जंगल बढ़ रहा है और जंगल क्षेत्र सिमट रहा है। यही कारण है कि रांची जैसे पहाड़ी क्षेत्र का तापमान 40 पहुंच चुका है, जबकि यहां के पुराने वाशिंदे बताते हैं कि रांची का तापमान हमेशा 30 के आसपास ही रहा करता था।

    आज अर्बन हीट आईलैंड बनने की ओर रांची अग्रसर है। इसका असर हमारे पर्यावरण पर भी पड़ता है। आमतौर बादल संघनन की प्रक्रिया तो होती है लेकिन अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट के कारण ये बादल शहरी क्षेत्र से दूर जंगली क्षेत्रों में बरसते हैं और हमें इसका लाभ नहीं मिल पाता है।

    मौसम वैज्ञानिक ने बताए उपाय 

    वहीं, उत्तर पश्चिमी क्षेत्र वाले जिलों में पड़ने वाली गर्मी के बारे उन्होंने कहा कि झारखंड का ये क्षेत्र पलामू प्रमंडल अंतर्गत आता है। यहां देश की पश्चिमी क्षेत्र से आने वाली गर्म और सर्द हवाओं का असर सबसे पहले पड़ता है, साथ ही अधिकांश भूभाग पठारी होने के कारण भी यहां तपती गर्मी पड़ती है।

    उन्होंने कहा कि अर्बन हीट आईलैंड इफेक्ट से बचने के लिए हमें आधुनिक उपाय यानी वर्टिकल गार्डेनिंग के साथ-साथ परंपरागत पद्धति भी अपनानी होगी। घरों में एसी और एसी लगे वाहनों का प्रयोग सीमित करना होगा।

    घर के निर्माण में उन बातों का विशेष ख्याल रखना होगा की किस तरह हम तापमान बढ़ने से रोकें। वहीं, एक अन्य पूछे गए सवाल का जवाब देते अभिषेक आनंद ने कहा कि आज मौसम विज्ञान केंद्र रांची आधुनिक संसाधनों से लैस है।

    यहां वेदर फोरकास्टिंग के साथ साथ रडार एंड सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलाजी का प्रयोग किया जाता है। अब तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से काम बहुत आसान हो गया है।

    हालांकि, प्रखंडों से प्राप्त इनपुट के आधार पर हमारे विज्ञानी स्थानीय तौर पर मौसम अपडेट देते हैं। इसका भरपूर लाभ किसानों को मिलता है। वहीं, वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध का असर भी पर्यावरण पर पड़ने की बात उन्होंने कही।

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