PM Awas Yojana: 17 साल बाद भी स्लम फ्री सिटी नहीं बन पाया रांची, गरीबों के पक्के घर का सपना अब भी अधूरा
रांची शहर को स्लम मुक्त बनाने का सपना 17 सालों में भी पूरा नहीं हो सका है। बीएसयूपी राजीव आवास और अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर देने के वादे किए गए लेकिन कई परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं। आनी में पीएम आवास योजना धीमी गति से चल रही है क्योंकि लाभार्थी अंशदान देने को तैयार नहीं हैं।

जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी रांची 17 साल बाद भी स्लम फ्री सिटी नहीं बन पाई। पहले बीएसयूपी योजना के तहत, उसके बाद राजीव आवास योजना के तहत और इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विभिन्न बस्तियों में रहने वालों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने का वादा किया गया था।
साल 2017 में नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से राजधानी में 447 स्लम चिह्नित किए गए थे। इनमें से 41 स्लम एचईसी क्षेत्र में, पांच स्लम नगर निगम क्षेत्र में, सरकारी भूमि पर 43 स्लम, आंशिक रूप से सरकारी भूमि पर 19 व निजी भूमि पर 347 स्लम चिह्नित किए गए थे।
इन स्लमों के लिए 13,102 आवासों का निर्माण कराना था, जिसके लिए 180 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी। वर्तमान में एचईसी क्षेत्र स्थित आनी में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,400 आवासों का निर्माण होना है।
इस योजना के तहत एचईसी क्षेत्र के 16 स्लमों को चिह्नित किया गया है। आवास के लिए प्रत्येक लाभुक को नौ लाख रुपये का अंशदान करना है, लेकिन लाभुक नौ लाख रुपये अंशदान कि लिए तैयार नहीं है।
इस कारण आवास योजना का निर्माण धीमी गति से चल रहा है। नगरीय प्रशासन निदेशालय की ओर से नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन 4,400 आवासों को हाउसिंग फार आल के तहत स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।
आनी में 4,400 पीएम आवास का निर्माण कार्य चल रहा है। राज्य सरकार के स्तर से लाभुकों को चयन किया जाना है। ई-लाटरी के माध्यम से ही चयनित लाभुकों को आवास आवंटित किया जाएगा। -अभिलाषा कुमारी, सहायक निदेशक, डीएमए।
बीएसयूपी योजना के तहत मधुकम में कराया गया था आवास निर्माण
बीएसयूपी योजना के तहत मधुकम में 336 जी प्लस-3 आवासों का निर्माण कराया गया था, जिसमें खादगढ़ा बस स्टैंड के 136 लाभुकों को आवास आवंटित किया गया। राज्य सरकार के निर्देशानुसार, मधुकम में बाल्मीकि नगर के 162 लाभुकों को भी आवास देने की स्वीकृति प्रदान की गई थी।
इसके अलावा वार्ड-19 स्थित बिरसा मुंडा कारागार पार्क के एक छोर पर बसे 144 व्यक्तियों को भी संबंधित आवासों में आवासित करना था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से 144 व्यक्तियों को पार्क परिसर के पिछले हिस्से में ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास निर्माण कराकर आवासित कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर, बाल्मीकि नगर के 60 लाभुकों ने रांची नगर निगम में अंशदान जमा किया था। शेष लाभुकों की ओर से अंशदान की राशि जमा नहीं किए जाने के कारण आवास आवंटन की प्रक्रिया रद कर दी गई।
बाद में राज्य सरकार की ओर से घोषणा की गई थी कि बाल्मीकि नगर के 162 लाभुकों को बाल्मीकि नगर में ही आवास निर्माण कराकर आवासित किया जाएगा। हालांकि बाल्मीकि नगर के 162 लोगों को अब तक आवासीय सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया।
राजीव आवास योजना के तहत 1294 आवासों का कराया गया निर्माण
राजीव आवास योजना के तहत पांच स्लमों में कुल 1565 आवासों का निर्माण कराया गया। बड़ा घाघरा में 984, उरांव टोली बरियातू में 174, महुवा टोली में 217, नामकुम बस्ती में 108 व लोहरा कोचा में 82 एकल आवासों का निर्माण होना था।
हालांकि जमीन विवाद के कारण 271 आवास सरेंडर कर दिए गए। इन आवासों की प्रति इकाई मूल्य 3.88 लाख रुपये थी। प्रत्येक आवासीय इकाई में दो कमरा, एक रसोई, एक स्नानागार व एक शौचालय (कुल 300 वर्गफीट) सेप्टिंक टैंक के साथ निर्माण कराया गया।
राजीव आवास योजना
परियोजना की स्वीकृत राशि : 7982.16 करोड़
केंद्रांश : 3808.0 करोड़
राज्यांश : 1959.26 करोड़
नगर निकाय : 1593.11 करोड़
लाभुक : 621.78 करोड़
रुगड़ीगढ़ा में निर्मित जी प्लस-3 आवासों की संख्या : 352
रुगड़ीगढ़ा में आवंटित व आवासित आवासों की संख्या : 259
रुगड़ीगढ़ा में खाली आवासों की संख्या : 93
मधुकम में निर्मित जी प्लस-3 आवासों की संख्या : 336
मधुकम में आवंटित व आवासित आवासों की संख्या : 146
मधुकम में खाली आवासों की संख्या : 190
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