Jharkhand News: सिंगापुर की तर्ज पर विकसित होगा बिरसा मुंडा जैविक उद्यान, पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव
रांची स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान को सिंगापुर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य उद्यान को आत्मनिर्भर बनाना और आय के स्रोत बढ़ाना है। चिड़ियाघर को जानवरों की देखभाल और कर्मचारियों के वेतन के लिए अब सरकार पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी। अधिकारियों का एक दल सिंगापुर और वियतनाम की यात्रा पर गया है ताकि वहां के उद्यानों की कार्यप्रणाली को समझा जा सके।

आशीष झा, रांची। राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा जैविक उद्यान को सिंगापुर की तर्ज पर बदला जाएगा। इससे जैविक उद्यान को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही कमाई के साधन भी बढ़ाए जाएंगे।
चिड़ियाघर में जानवरों की देखरेख से लेकर कर्मियों को मानदेय भुगतान के लिए अब किसी सरकार पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। तैयारियों के अनुसार चिड़ियाघर की आमदनी ही इतनी बढ़ जाएगी कि खुद के कार्यों के लिए किसी आर्थिक मदद की आवश्यकता नहीं होगी।
कार्यप्रणाली को समझने के लिए अधिकारियों का दल सिंगापुर और वियतनाम के लिए रवाना हो चका है। तीन-चार दिनों में सभी लौटकर आ भी जाएंगे।
झारखंड में जैविक उद्यानों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर सरकार रणनीति बनाने की तैयारियों में है। इसके लिए सिंगापुर का मॉडल अपनाने की बात की जा रही है।
वहां के जैविक उद्यान के संचालन के लिए किसी की मदद की आवश्यकता नहीं होती है। यह दुनिया के सबसे महंगे चिड़ियाघरों में से एक है। इसके साथ ही इस चिड़ियाघर में लुप्तप्राय जानवरों के संरक्षण के लिए काम किया जाता है।
ऐसे पशुओं की प्रदर्शनी के माध्यम से चिड़याघर की आमदनी में इजाफा होता है। प्रदर्शनी नियमित तौर पर होते हैं।
ओपन कंसेप्ट डिजाइन है खास
सिंगापुर का चिड़ियाघर ओपन कंसेप्ट डिजाइन पर बनाया गया है। इसमें कई बार ऐसा लगता है कि जानवर अपने प्राकृतिक आवास में मनुष्यों के बेहद करीब मौजूद हैं। हालांकि जानवरों और आगंतुकों के बीच बड़ी खाई, कांच और प्राकृतिक रुकावटें बनाई गई होती हैं।
सिंगापुर के चिड़ियाघर में 300 से अधिक प्रजातियों के चार हजार से अधिक जानवर मौजूद हैं। इतना ही नहीं, इस चिड़ियाघर में जो लुप्तप्राय जानवरों के संरक्षण का काम भी किया जाता है। जानवरों को खुले प्रदर्शनों में रखा जाता है, जिससे वे अपने प्राकृतिक व्यवहार का प्रदर्शन कर पाते हैं।
विविध प्रजातियों के जानवर हैं मौजूद
यहां के चिड़ियाघरों में विभिन्न प्रकार के जानवर मौजूद हैं। शांत शाकाहारी से लेकर सबसे खतरनाक जानवर तक शामिल हैं। इस चिड़ियाघर में बच्चों के लिए खास क्षेत्र बनाया गया है जहां पानी से संबंधित खेल, बाधा दौड़ आदि खेल जानवरों के साथ खेले जा सकते हैं।
चिड़ियाघर के अंदर कई खाने-पीने के विकल्प उपलब्ध होंगे जिनमें स्वदेशी व्यंजन से लेकर पश्चिमी फास्ट फूड तक शामिल हैं। सिंगापुर चिड़ियाघर मंडई वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है, जिसमें नाइट सफारी और बर्ड पैराडाइज़ जैसे अन्य आकर्षण भी शामिल हैं।
सचिव के नेतृत्व में चार अधिकारी गए हैं सिंगापुर और वियतनाम
सिंगापुर के चिड़ियाघर का अध्ययन करने के लिए वन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीख पी. के नेतृत्व में चार अधिकारियों का दल सिंगापुर और वियतनाम गया है।
यहां के चिड़ियाघरों की तर्ज पर झारखंड में भी बदलाव लाने की कोशिश की जाएगी। इस दल में पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) पारितोष उपाध्याय, बिरसा जू के निदेशक जब्बार सिंह, रांची के डीएफओ श्रीकांत वर्मा भी गए हैं।
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