बनारसी से लेकर कांजीवरम तक: भारत के कोने-कोने में बुनी जाने वाली इन साड़ियों में बसती है असली खूबसूरती
भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह की साड़ियां मशहूर हैं। ...और पढ़ें

भारत की बुनाई विरासत का एक शानदार सफर (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में साड़ी केवल एक कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक विरासत है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
उत्तर के पहाड़ों से लेकर दक्षिण के समुद्र तटों तक, भारत के हर राज्य की अपनी एक खास बुनाई शैली, कपड़ा और कहानी है। आइए, भारत के अलग-अलग कोनों से आने वाली इन खूबसूरत साड़ियों के बारे में जानते हैं।
उत्तर भारत

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- उत्तर प्रदेश- यहां की बनारसी साड़ी अपनी भारी सोने और चांदी की जरी के काम के लिए दुनिया भर में मशहूर है।
- पंजाब और हरियाणा- पंजाब की फुलकारी अपने खूबसूरत और चटकीले रंगों और फूलों की कढ़ाई के लिए जानी जाती है, जबकि हरियाणा की रेशम धुरिया सूती कपड़े पर रेशमी कढ़ाई का सुंदर कॉम्बिनेशन पेश करती है।
- हिमाचल और उत्तराखंड- हिमाचल की कुल्लू पट्टी साड़ियों में ज्योमेट्रिक बॉर्डर होते हैं, वहीं उत्तराखंड की पंचचूली बुनावट अपनी बारीक कारीगिरी के लिए पहचानी जाती है।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत

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- पश्चिम बंगाल और बिहार- बंगाल की बालूचरी साड़ी के पल्लू पर रामायण और महाभारत के दृश्य उकेरे जाते हैं। बिहार का भागलपुरी टसर रेशम अपनी इको-फ्रेंडली प्रकृति और बेहतरीन बनावट के लिए मशहूर है।
- ओडिशा- यहां की संबलपुरी इकत अपनी टाई-एंड-डाई तकनीक और प्राकृतिक मोटिफ्स के लिए जानी जाती है।
- पूर्वोत्तर का जादू- असम का सुनहरा मूगा सिल्क दुनिया का इकलौता ऐसा रेशम है जिसकी चमक हर धुलाई के साथ बढ़ती है। मेघालय का एरी सिल्क और मणिपुर की बारीक सूती मोइरांग फी अपनी नाजुक और मंदिरनुमा बॉर्डर के लिए मशहूर हैं। नगालैंड, मिजोरम और त्रिपुरा की साड़ियों में कबीलाई पैटर्न की झलक मिलती है।
पश्चिम और मध्य भारत

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- राजस्थान और गुजरात- राजस्थान की बंधनी रेगिस्तान के रंगों को दर्शाती है, जबकि गुजरात की पटोला साड़ी अपनी बारीक और डबल-इकत बुनाई के कारण बेहद कीमती मानी जाती है।
- महाराष्ट्र और गोवा- महाराष्ट्र की पैठणी अपने मोर वाले पल्लू के लिए मशहूर है, वहीं गोवा की कुनबी सूती साड़ी भारत के तटीय विरासत को संजोए हुए है।
- मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़- मध्य प्रदेश की चंदेरी साड़ी अपने हल्केपन के कारण गर्मियों के लिए सबसे बेहतरीन है, जबकि छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क अपनी मजबूती और जनजातीय कला के लिए जाना जाता है।
दक्षिण भारत

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- तमिलनाडु- कांचीपुरम या कांजीवरम को भारतीय साड़ियों का सम्राट कहा जाता है। शुद्ध शहतूत रेशम और सोने की जरी इसे बेहद भव्य बनाती है।
- केरल- केरल की कसावू साड़ी सफेद सूती कपड़े पर सुनहरे बॉर्डर के साथ सादगी का प्रतीक है।
- आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक- कर्नाटक की इल्कल अपनी लाल टोपे टेनी पल्लू के लिए पहचानी जाती है। तेलंगाना की पोचमपल्ली इकत और आंध्र की उप्पाड़ा जामदानी अपने जरी के काम के लिए मशहूर हैं।
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