बर्फ की सिल्लियां ढोने वाला थैला कैसे बना Gen-Z का फैशन स्टेटमेंट? पढ़ें Tote Bag की दिलचस्प कहानी
टोट बैग, जो आज कॉलेज कैंपस और ऑफिस में लोकप्रिय हैं, का इतिहास फैशन से नहीं बल्कि बर्फ ढोने वाले 'आइस बैग' से जुड़ा है। जी हां, शुरुआत में इन्हें फैशन ...और पढ़ें
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कैसे टोट बैग्स बने जेन-जी के फैशन स्टेटमेंट? (Picture Courtesy: Pinterest)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में अगर आप किसी कॉलेज कैंपस, ऑफिस या कैफे में जाएं, तो एक चीज आपको हर जगह दिखेगी, कंधे पर लटका एक बड़ा-सा चौकोर बैग, जिसे हम ‘टोट बैग’ (Tote Bag) कहते हैं। इन बैग्स की खासियत है इन पर बने डिजाइन और इनकी सादगी।
जेन-जी इन बैग्स को खूब पसंद करते हैं और अपनी पर्सनैलिटी के हिसाब से अपने लिए टोट बैग चुनते हैं। इनकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि लगभग हर मार्केट में ये बैग आपको जरूर मिल जाएंगे। लेकिन क्या आपको मालूम है आज जिस बैग को सभी अपने स्टाइल स्टेटमेंट का हिस्सा मानते हैं, उसका इतिहास फैशन से नहीं, बल्कि बर्फ की सिल्लियों से जुड़ा है? आइए जानें आपका फेवरेट टोट बैग, टोट बैग कैसे बना।
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(Picture Courtesy: Pinterest)
टोट बैग से पहले था आइस बैग
टोट बैग का इतिहास जानने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि टोट का मतलब क्या होता है। इस शब्द का मतलब है ‘ले जाना’ या ‘ढोना’ और इस बैग को बनाने का मकसद भी यही था। इस कहानी की शुरुआत साल 1944 में हुई, जब अमेरिकी ब्रांड L.L. Bean ने अपना मशहूर आइस बैग लॉन्च किया। उस समय रेफ्रिजरेटर आज की तरह आम नहीं थे। लोगों को घर तक बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियां ले जानी पड़ती थीं।
यह बैग कैनवस के मोटे कपड़े से बनाया गया था ताकि यह भारी वजन सह सके और कार से फ्रीजर तक ले जाते समय पिघलती बर्फ का पानी जल्दी बाहर न निकले। तब किसी ने नहीं सोचा था कि बर्फ ढोने वाला यह थैला एक दिन पेरिस और मिलान के रैंप पर दिखाई देगा।
उपयोगिता से स्टाइल तक का सफर
1960 के दशक तक आते-आते, L.L. Bean ने महसूस किया कि लोग इसका इस्तेमाल सिर्फ बर्फ के लिए नहीं, बल्कि ग्रोसरी और सामान रखने के लिए भी कर रहे हैं। उन्होंने इसे थोड़ा और स्टाइलिश बनाया और इसे ‘बोट एंड टोट’ (Boat and Tote) नाम दिया।
लेकिन असली बदलाव 1980 के दशक में आया, जब न्यूयॉर्क के मशहूर बुकस्टोर द स्ट्रैंड ने अपने स्टोर के प्रचार के लिए कॉटन टोट बैग्स निकालना शुरू किया। अचानक, हाथ में टोट बैग होना इस बात का प्रतीक बन गया कि आप पढ़े-लिखे हैं, कला प्रेमी हैं और पर्यावरण को लेकर जागरूक हैं।
इस टोट बैग को लेने हजारों की संख्या में लोग बुक स्टोर के बाहर जुटे और ऐसे शुरू हुआ टोट बैग का क्रेज। इसके बाद कई फैशन ब्रांड ने भी अपने लोगो के साथ टोट बैग लॉन्ज किए।
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(Picture Courtesy: Pinterest)
कैसे बना सेल्फ एक्सप्रेशन का जरिया?
2010 तक टोट बैग्स फैशन स्टेटमेंट के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरुकता का भी प्रतीक बन गए। आज बाजार में 100-200 रुपए के लोकल बैग्स से लेकर बड़े-बड़े लग्जरी ब्रांड्स भी हजारों-लाखों रुपए में टोट बैग्स बेच रहे हैं।
क्यों सभी को पसंद है टोट बैग?
- मिनिमलिज्म और टिकाऊपन- प्लास्टिक बैन के दौर में, कपड़े या कैनवस का यह बैग पर्यावरण के अनुकूल विकल्प बनकर उभरा। इसे बार-बार धोकर इस्तेमाल किया जा सकता है।
- यूनिसेक्स अपील- यह बैग किसी जेंडर तक सीमित नहीं है। पुरुष हों या महिलाएं, हर कोई इसे आसानी से कैरी कर सकता है।
- कस्टमाइजेशन- आज टोट बैग्स पर आपकी पसंदीदा फिल्म के कोट्स, मीम्स या आर्टवर्क होते हैं। यह व्यक्ति की पसंद और व्यक्तित्व को जाहिर करने का एक जरिया बन गया है।
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