इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर बच्चों की स्किन से न करें खिलवाड़, नामी ब्रांड्स के काले सच का पर्दाफाश!
सोशल मीडिया पर 'ग्लास स्किन' की चाहत में बच्चे एडल्ट स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। ...और पढ़ें

बच्चों की 'स्किनकेयर एक्टिव्स' का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर ग्लास स्किन की चाह, महंगे सीरम और इन्फ्लुएंसर्स की लुभावनी बातें आज बेहद आम हो गई हैं, लेकिन इस चकाचौंध के पीछे कॉस्मेटिक कंपनियों की एक बहुत गहरी चाल छिपी है। अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए ये कंपनियां छोटे बच्चों तक को अपना शिकार बना रही हैं और उन्हें एंटी-एजिंग क्रीम जैसे एडल्ट प्रोडक्ट्स बेच रही हैं।

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इटली सरकार की सख्त कार्रवाई
इटली के प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण ने इसे बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत के साथ एक बड़ा खिलवाड़ माना है। इस मामले में फ्रांस के मशहूर लग्जरी ग्रुप एलवीएमएच (LVMH) के दो बड़े ब्यूटी ब्रांड्स- सेफोरा और बेनिफिट के खिलाफ कड़ी जांच बैठा दी गई है।
इटैलियन अथॉरिटी का आरोप है कि इन ब्रांड्स ने अपने फेशियल मास्क, सीरम और एंटी-एजिंग क्रीम का इस भ्रामक तरीके से प्रचार किया कि 10 साल से कम उम्र की बच्चियां भी इनकी ओर आकर्षित होने लगीं। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इन उत्पादों पर यह जानकारी या तो गायब थी या उसे छिपाकर रखा गया था कि ये उत्पाद नाबालिगों के लिए बिल्कुल नहीं बनाए गए हैं और न ही मासूम त्वचा पर इनका कोई ट्रायल किया गया है।
नाजुक त्वचा पर केमिकल्स का प्रहार
स्वस्तम वेलनेस, नई दिल्ली में कंसल्टेंट - डर्मेटोलॉजिस्ट, डॉ. नीहारिका गोयल के अनुसार, आजकल छोटे बच्चे भी अपनी रोजमर्रा की स्किनकेयर में ऐसे 'एक्टिव' तत्वों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं, जो केवल बड़ों के लिए होते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- रेटिनॉल (विटामिन -ए बेस्ड प्रोडक्ट्स)
- एक्सफोलिएटिंग एसिड (जो डेड स्किन सेल्स को हटाते हैं)

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हाई-डोज विटामिन-सी डर्मेटोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट साफ बताती है कि बच्चों की नाजुक और कोमल त्वचा पर इन एक्टिव तत्वों का कभी भी पर्याप्त रूप से टेस्ट नहीं हुआ है। बिना किसी डॉक्टर की निगरानी के इनका इस्तेमाल करने से बच्चों में कई गंभीर त्वचा रोग हो सकते हैं, जैसे:
- त्वचा पर रेडनेस और रैशेज
- धूप के प्रति संवेदनशीलता
- डर्मेटाइटिस और लंबे समय तक परेशान करने वाली एलर्जी
भारत में भी तेजी से फैल रहा है 'सेफोरा किड्स ट्रेंड'
यह खतरा केवल यूरोप या अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में भी तेजी से उभर रहा है। सौंदर्य प्रसाधन कंपनियों के आक्रामक प्रचार और सोशल मीडिया से प्रभावित होकर, भारत में 10 से 13 साल के बच्चे भी रेटिनॉल और 'के-ब्यूटी' स्टाइल वाले कई स्टेप्स के स्किनकेयर रूटीन को अपना रहे हैं। इसके सीधे नतीजों के रूप में देश में बच्चों में रैशेज और एलर्जी के मामले बढ़ गए हैं।
बच्चों को रखें ब्यूटी प्रोडक्ट्स से दूर
डर्मेटोलॉजिस्ट की सख्त हिदायत है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चों को ब्यूटी क्रीम्स से पूरी तरह दूर रखा जाना चाहिए। यह समस्या सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे मानसिक दुष्प्रभाव भी हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कम उम्र में सिर्फ अपने लुक्स पर ध्यान केंद्रित करने से बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और एंग्जाइटी जैसे मानसिक जोखिम भी बढ़ रहे हैं। यह स्थिति भारतीय बच्चों के लिए भी उतनी ही वास्तविक और खतरनाक है, जितनी कि पश्चिमी देशों में देखने को मिल रही है।
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