Easter Sunday 2026: ईस्टर पर अंडों को सजाने की रस्म क्यों और कैसे हुई शुरू? पढ़ें इसके पीछे छिपा राज
ईसाई समुदाय के लिए ईस्टर संडे का दिन कैलेंडर की महज एक तारीख नहीं है, बल्कि यह परमेश्वर पर उनके अटूट विश्वास की सबसे बड़ी पहचान है। ...और पढ़ें

Easter Sunday 2026: क्यों ईस्टर एग्स के बिना अधूरा माना जाता है यह त्योहार (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इस साल ईस्टर संडे का पर्व आज यानी 5 अप्रैल को मनाया जा रहा है। यह पवित्र दिन गुड फ्राइडे के गहरे और भारी दुख को एक महान आनंद में बदल देता है। गुड फ्राइडे के ठीक दो दिन बाद आने वाला यह 'ईस्टर संडे' मुख्य रूप से प्रभु यीशु मसीह के चमत्कारिक रूप से फिर से जीवित हो उठने की याद में मनाया जाता है। आइए, डिटेल में जानते हैं इस बारे में।
अपार खुशियों में बदल गया दुख
मान्यताओं के अनुसार, जब यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया और उन्हें दफना दिया गया, तो उन्होंने मौत को हरा दिया। सूली पर चढ़ाए जाने के ठीक तीसरे दिन वे चमत्कारिक रूप से दोबारा जीवित हो गए। यह दिन बुराई पर अच्छाई की और मृत्यु पर जीवन की सबसे बड़ी जीत का एक शानदार उत्सव है।
सबसे खास बात यह है कि यीशु मसीह ने सूली पर चढ़ाए जाने से पहले ही अपने वापस लौटने की भविष्यवाणी कर दी थी। जब मौत के बाद वापस लौटकर उन्होंने अपना यह वादा पूरा किया, तो ईश्वर के प्रति लोगों का भरोसा हमेशा-हमेशा के लिए पक्का और अटूट हो गया। संक्षेप में कहें तो, ईस्टर संडे वह महान दिन है जो यह साबित करता है कि सारा दुख आखिरकार एक बहुत बड़े आनंद में बदल जाता है।

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गुड फ्राइडे से भी बढ़कर है इसका महत्व
कम ही लोग जानते हैं कि ईसाई धर्म में ईस्टर संडे का महत्व गुड फ्राइडे से भी ज्यादा माना गया है। यह पर्व केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, यह पापों से मुक्ति पाने और बिगड़ी हुई चीजों को फिर से संवारने का संदेश देता है।
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यीशु का पुनर्जीवित होना ईश्वर के प्रेम, उनकी अपार शक्ति और उनके द्वारा किए गए वादों के सच होने का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। यही कारण है कि यह दिन दुनियाभर के लोगों को ईश्वर के करीब लाता है और आज के समय में भी उनके भीतर एक सच्ची उम्मीद जगाता है।

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रंगीन अंडों से क्यों है ईस्टर का कनेक्शन?
ईस्टर संडे के दिन 'ईस्टर एग्स' को सजाने की बहुत ही अनूठी और पुरानी परंपरा है। ईस्टर के पूरे वीक में मीट और अल्कोहल से पूरी तरह परहेज किया जाता है, लेकिन अंडों को रंगने की शुरुआत आज से नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी से हुई थी। उस समय मुर्गियों के अंडों को बेहद पवित्र माना गया और उन्हें एक नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में रंगा जाने लगा।
अंडे और यीशु के पुनर्जन्म का संबंध
अंडों को सजाने के पीछे एक बेहद खूबसूरत सोच छिपी है। दरअसल, जिस तरह एक अंडे के कड़े खोल को तोड़कर उसके अंदर से एक नया जीवन बाहर आता है, ठीक उसी तरह यीशु मसीह भी मौत को हराकर कब्र से बाहर आ गए थे।

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इस परंपरा में एक पुरानी रूढ़िवादी मान्यता भी शामिल है। इस शाखा को मानने वाले लोग अंडों को विशेष रूप से लाल रंग से रंगते हैं। यह लाल रंग उस पवित्र खून का प्रतीक माना जाता है, जो यीशु मसीह ने सूली पर बहाया था।
आज भी दुनिया भर में लोग अंडों को सजाने की इस खूबसूरत परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभाते हैं, जो उन्हें उनके धर्म और इतिहास से जोड़े रखती है।
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