ईसा मसीह के बलिदान के दिन को क्यों कहा जाता है ‘गुड फ्राइडे’? पढ़ें इससे जुड़ी कहानी
गुड फ्राइडे ईसा मसीह के बलिदान का दिन है। ईसाई समुदाय के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। ...और पढ़ें

शोक के दिन गुड फ्राइडे को क्यों कहा जाता है गुड? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ईसाई धर्म में गुड फ्राइडे बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र दिन है। यह दिन ईसा मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है। दुनिया भर में ईसाई समुदाय के लोग इस दिन को चर्च जाते हैं और प्रार्थना करते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था, फिर भी इसे गुड फ्राइडे क्यों कहा जाता है? आइए जानें इसके पीछे के कारण।
गुड फ्राइडे का महत्व क्या है?
बाइबिल और ईसाई मान्यताओं के अनुसार, आज से लगभग दो हजार साल पहले यरूशलेम में ईसा मसीह को मानवता की भलाई और प्रेम का संदेश फैलाने के लिए राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें कांटों का ताज पहनाया गया और सूली पर चढ़ा दिया गया।
ईसाई धर्म के अनुसार, ईसा मसीह ने अपनी मृत्यु के जरिए पूरी मानवता के पापों का प्रायश्चित किया। उन्होंने खुद कष्ट सहकर लोगों को क्षमा और प्रेम का मार्ग दिखाया। यही कारण है कि यह दिन शोक का नहीं, बल्कि मानवता के उद्धार और ईश्वर के असीम प्रेम के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
इसे गुड फ्राइडे क्यों कहते हैं?
पहली नजर में यह अजीब लग सकता है कि जिस दिन ईसा मसीह को इतनी क्रूरता से मृत्युदंड दिया गया, उसे गुड क्यों कहा जाए, लेकिन इसके पीछे भी कुछ कारण छिपे हैं। पुराने समय में अंग्रेजी में गुड शब्द किसी ऐसे दिन के पहले लगाया जाता था, जिसे पवित्र माना जाता हो। इस शुक्रवार को ईसाई धर्म में काफी पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे गुड फ्राइडे कहा गया।
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इसका दूसरा कारण धार्मिक मान्यता से जुड़ा है। धार्मिक दृष्टिकोण से, ईसा मसीह की मृत्यु को मानवता के उद्धार के लिए एक अच्छी घटना मानी गई है। अपनी बलिदान के जरिए ईसा मसीह ने मनुष्यों के लिए अपने प्रेम का संदेश दिया था। साथ ही, यह भी मान्यता है कि ईसा मसीह के बलिदान के बिना ईस्टर संभव नहीं होता। ईस्टर के दिन ही ईसा मसीह का पुनर्जन्म हुआ था। इसलिए उनके बलिदान के कारण इसे गुड फ्राइडे कहा जाता है।
इस दिन को कैसे मनाया जाता है?
- प्रार्थना सभाएं- चर्चों में खास प्रार्थना सभाएं होती हैं जो दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच आयोजित की जाती हैं, क्योंकि माना जाता है कि इसी समय ईसा मसीह सूली पर थे।
- उपवास- इस दिन चर्च में सजावट नहीं की जाती और ऑल्टर को खाली रखा जाता है। साथ ही, इस दिन लोग मीट से परहेज करते हैं।
- मौन और आत्म-चिंतन- लोग इस दिन शांत रहकर अपने जीवन की गलतियों पर विचार करते हैं और दूसरों को क्षमा करने का संकल्प लेते हैं।