अब स्वाद के लिए सेहत से समझौता नहीं! आपकी गट हेल्थ के लिए वरदान हैं ये रिफ्रेशिंग स्मूदीज और शेक्स
दूध और दही पर आधारित इन गाढ़े पेय पदार्थों में आए बदलावों पर विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर ओएमओ-गुरुग्राम की कलिनरी डायरेक्टर चेतना चोपड़ा का आलेख। ...और पढ़ें

दूध का दमदार अवतार (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हमारा मन कुछ ठंडा, पूरी तरह ताजगी से भरा और अंदर तक संतुष्ट करने वाला पेय पीने का करता है, तो अक्सर अपनी सेहत को लेकर एक चिंता पैदा हो जाती है। हम सोचने लगते हैं कि स्वाद के चक्कर में कहीं हम सेहत के साथ कोई समझौता तो नहीं कर रहे हैं।
तो इसका सही जवाब है, दूध और दही पर आधारित गाढ़े पेय यानी शेक्स और स्मूदीज। पहले लोग इन्हें केवल कभी-कभार ही शौक के तौर पर पीते थे। लेकिन आज इन रंग-बिरंगे और ऊर्जा से भरपूर पेयों ने खानपान की दुनिया के केंद्र में अपनी मजबूत जगह बना ली है।
बड़े शहरों के आधुनिक कैफे से लेकर महंगे और शानदार होटलों के खानपान के विशेष मेनू में इन्हें मुख्य स्थान दिया जा रहा है। नई पीढ़ी और जागरूक उपभोक्ताओं के बीच इनकी मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है।
ताजा मौसमी फलों का महत्व
मिल्क एंड योगर्ट शेक्स और स्मूदीज अब भोजन अनुभव को बेहतर बनाने का काम करते हैं। आजकल इस क्षेत्र में मौसम के अनुकूल मिलने वाले स्थानीय फलों और प्राकृतिक चीजों के उपयोग पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। पारंपरिक रूप से पसंद किए जाने वाले चाकलेट या स्ट्राबेरी के मेल से आगे बढ़कर अब लोगों की रुचि बहुत नई और अनसुनी सामग्रियों में बढ़ रही है।
लोग अब माचा, भुने हुए सूखे मेवे, खजूर, किण्वित किए गए फल, देसी गुड़, शुद्ध केसर, संतरों के सूखे छिलके, कोकोनट कल्चर, स्टोन फ्रूट जैसे विशेष पहाड़ी फल, भीगे हुए बीज और विभिन्न जड़ी-बूटियों के अर्क से बने पेयों को बहुत चाव से पसंद कर रहे हैं। दुनिया भर की बेहतरीन खाद्य तकनीकों से प्रेरित होकर तैयार किए गए यह अलग स्वाद अब भारतीय भोजन संस्कृति में अपनी स्थायी जगह बना रहे हैं।
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(Picture Courtesy: Freepik)
बनाने का अनोखा कलात्मक तरीका
शेक्स और स्मूदीज को तैयार करने के तरीके में भी अब कलात्मक बदलाव आया है। शेफ इनको केवल एक मशीन में तैयार नहीं करते, बल्कि वे इन्हें किसी खास बर्तन में सजे मुख्य भोजन या किसी विशेष पेय की तरह बहुत ही बारीकी से सजाकर तैयार करते हैं।
दूध और दही पर आधारित पेय का गाढ़ापन, उसमें हल्की सी महक या स्मोकी फ्लेवर देना, उसे अलग-अलग खूबसूरत परतों में सजाना, प्राकृतिक मिठास का बहुत संतुलित उपयोग करना और यहां तक कि हल्के नमकीन या चटपटे तत्वों को शामिल करना अब इस कला का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
इस प्रकार आपकी गट हेल्थ के लिए अच्छे बैक्टीरिया से भरपूर पेय तैयार किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसा पेय बनाना है जो पीने में लाजवाब हो, जबकि उसकी सेहत से जुड़ी तमाम खूबियां भी पूरी तरह से सुरक्षित रहें।
विदेशी तकनीक और भारतीय स्वाद
आज के उपभोक्ता ऐसे पेयों को खुले दिल से अपनाने के लिए तैयार हैं जो विदेशी तकनीक और स्थानीय भारतीय सामग्रियों का बेहतरीन और संतुलित मिश्रण पेश करते हैं। उदाहरण के लिए, कोंबुचा (खमीर वाली विदेशी चाय) में अब कोकम, गंधराज, जामुन, कच्चा आम, करी पत्ता या पारंपरिक काली गाजर की कांजी जैसे अनूठे भारतीय स्वादों को मिलाया जा रहा है।
स्मूदीज और शेक्स में गुड़, हल्दी, तुलसी, भुने हुए मसाले, गुलकंद, सौंफ और स्थानीय स्तर पर मिलने वाले क्षेत्रीय फलों को इस तरह शामिल किया जा रहा है कि वे पीने में आधुनिक होने के साथ-साथ बहुत जाने-पहचाने और अपने से लगते हैं।
सही संतुलन और सही तकनीक
अगर आप अपने घर पर ही एक बेहतरीन और सेहतमंद स्मूदी या शेक बनाना चाहते हैं, तो पूरा खेल केवल सही संतुलन और सही तकनीक का है। लोग अक्सर घर पर स्मूदी बनाते समय एक बहुत आम गलती करते हैं। वे मशीन के जार में बहुत सारी सामग्रियां, बहुत ज्यादा चीनी या मीठी चीजें और ढेर सारी बर्फ एक साथ डाल देते हैं।
ऐसा करने से पेय का असली स्वाद और उसका मलाईदार गाढ़ापन पूरी तरह से खत्म हो जाता है और वह पानी जैसा पतला हो जाता है। एक अच्छी स्मूदी या शेक में उसके गाढ़ेपन, हल्के खट्टेपन, ताजगी और प्राकृतिक मिठास के बीच एक सटीक संतुलन होना जरूरी है। इसके लिए हमेशा मौसम के अनुसार मिलने वाले ताजे और पके फलों का ही उपयोग करना चाहिए।
पेय में बहुत ज्यादा बर्फ डालने के बजाय, बनाने से पहले ही फलों और अन्य सामग्रियों को कुछ देर के लिए फ्रिज में रखकर ठंडा कर लेना चाहिए। इसके अलावा, पेय को प्राकृतिक रूप से गाढ़ा बनाने के लिए भीगे हुए बादाम या काजू, गाढ़ा दही, खजूर, जई या पौष्टिक बीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। खमीर वाली चीजें जैसी कोंबुचा और अच्छे बैक्टीरिया से भरपूर दही न केवल पेय के स्वाद को गहरा और लाजवाब बनाते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी बहुत दुरुस्त रखते हैं।
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