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    बार-बार शिकायत करने से बदल जाती है दिमाग की वायरिंग, जानिए क्या है इसके पीछे का साइंस

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 10:42 AM (IST)

    बार-बार शिकायत करने की आदत से दिमाग की संरचना में बदलाव होता है और स्ट्रेस हार्मोन भी बढ़ता है। ...और पढ़ें

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    आप भी बात-बात पर करते हैं शिकायत? (Picture Courtesy: Freepik)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नापसंद बातों या काम के बारे में शिकायत करना काफी अच्छा लगता है। इससे आपको बेहतर महसूस होता है, लेकिन हर अच्छी लगने वाली चीज आपके लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं। बार-बार शिकायत करने की आदत आपके दिमाग को प्रभावित करती है। 

    शिकायत करना सिर्फ एक नकारात्मक आदत नहीं है, बल्कि यह दिमाग की बनावट में भी बदलाव करती है। इसलिए अगर आप भी हर बात पर शिकायत करते हैं, तो रुककर यह खबर जरूर पढ़ लीजिए।

    न्यूरल पाथवे का दोबारा बनना 

    हमारा दिमाग किसी काम को करने के लिए कम से कम समय और एनर्जी बर्बाद करना चाहता है। जब आप बार-बार शिकायत करते हैं, तो आपका दिमाग उन न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन को मजबूत कर देता है, जो नकारात्मक विचारों को ले जाते हैं। इसे सिक्सथ लॉ ऑफ लर्निंग के रूप में समझा जा सकता है, जो आप बार-बार करते हैं, दिमाग उसी में माहिर हो जाता है। धीरे-धीरे, आपका दिमाग सकारात्मकता के बजाय कमियों को खोजने के लिए हार्डवायर्ड हो जाता है।

    Constant complaining (1)

    (AI Generated Image)

    हिप्पोकैम्पस का सिकुड़ना

    बार-बार शिकायत करने पर शरीर स्ट्रेस हार्मोन को रिलीज करता है। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से दिमाग के हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुंचा सकता है। हिप्पोकैम्पस वह हिस्सा है जो नई चीजें सीखने, लॉजिक और याददाश्त के लिए जिम्मेदार होता है। लगातार शिकायत करने से यह हिस्सा धीरे-धीरे सिकुड़ सकता है, जिससे आपकी फैसले लेने की क्षमता प्रभावित होती है।

    काम करने की क्षमता घटना

    जब आप शिकायत करते हैं, तो आपका फाइट या फ्लाइट रिस्पांस एक्टिव हो जाता है। इससे बीपी बढ़ता है और ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव आता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने से न केवल दिमाग की काम करने की क्षमता घटती है, बल्कि दिल की बीमारियों और इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

    सेकेंड हैंड कंप्लेनिंग का असर

    दिमाग में मिरर न्यूरॉन्स होते हैं। जब हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बैठते हैं जो लगातार शिकायत कर रहा है, तो हमारा दिमाग अनजाने में उनकी भावनाओं की नकल करने लगता है। यानी, दूसरों की शिकायतें सुनना भी आपके दिमाग के लिए उतना ही हानिकारक है जितना खुद शिकायत करना। यह आपकी मानसिक ऊर्जा को सोख लेता है।

    इस आदत को कैसे बदलें?

    • सॉल्यूशन ओरिएंटेड बनें- समस्या पर फोकस करने के बजाय, सॉल्यूशन पर बात करें।
    • ग्रैटिट्यूड की प्रैक्टिस- दिन में केवल तीन ऐसी चीजें लिखें जिनके लिए आप आभारी हैं। यह प्रैक्टिस दिमाग को पॉजिटिव पाथवे बनाने के लिए प्रेरित करता है।
    • सचेत रहें- जैसे ही आप शिकायत करने लगें, खुद को टोकें और सोचें कि क्या यह शिकायत जरूरी है? अगर नहीं, तो रुक जाएं। 


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