जोड़ों के दर्द की असली वजह आपके मसूड़े तो नहीं? डॉक्टर बोले- पायरिया दोगुना कर देता है गठिया का खतरा
मुंह का बैक्टीरिया शरीर की प्रतिरक्षा के लिए मुसीबत तो बनता ही है, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंचकर आर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं ...और पढ़ें

आपके जोड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है ये बैक्टीरिया (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आप दांतों और मसूड़ों की सही ढंग से सफाई नहीं करते हैं, तो इससे होने वाली समस्या केवल मुंह तक सीमित रहने वाली नहीं है। इससे होने वाले संक्रमण से शरीर अन्य हिस्से भी प्रभावित होंगे। पायरिया मुंह में होने वाले रोगों में एक प्रमुख रोग है।
वर्ष 2021 में हुए एक शोध में पाया गया कि भारत में 51 प्रतिशत लोग हल्के, 26 प्रतिशत मध्यम और 19 प्रतिशत लोग पायरिया के गंभीर लक्षणों से ग्रसित हैं। पायरिया कीटाणु के कारण मसूड़ों में होने वाला एक गंभीर प्रकार का संक्रमण है। बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों के बीच प्लाक जमा होने के कारण पनपते हैं।
डॉ. अमित नागर (एमडीएस, एफएएमएस, आर्थोडोंटिस्ट एवं पूर्व प्रोफेसर, केजीएमयू, लखनऊ) के मुताबिक, इसके प्रारंभिक लक्षणों में मसूड़ों में सूजन और खून आता है, सांसों से लगातार बदबू आती है। धीरे-धीरे दांतों को सहारा देने वाली हड्डी गलने लगती है जिसके कारण दांत हिल कर गिरने लगते हैं। हाल में हुए कई शोधों में पाया गया है कि रुमेटाइड आर्थराइटिस के मरीजों में पायरिया की आशंका लगभग दोगुनी होती है अर्थात पायरिया और आर्थराइटिस के बीच एक गहरा संबंध है।

(Image Source: AI-Generated)
पायरिया होने के पीछे मुख्य कारण
जो लोग मुंह की सही ढंग से सफाई नहीं रखते, डायबिटीज ग्रस्त हैं या जिन्हें धूमपान की आदत है, ऐसे लोगों में पायरिया होने की आशंका सर्वाधिक रहती है। पायरिया के प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर पता नहीं चलते। दंत चिकित्सक से समय समय मुंह की जांच कराने और एक्स-रे आदि से शुरुआती स्टेज में इसका पता लगाया जा सकता है। पायरिया से रूमेटाइड आर्थराइटिस या गठिया जैसी बीमारियों जैसी कई अन्य बीमारियों की आशंका रहती है, इसलिए पायरिया को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।
आर्थराइटिस और पायरिया का संबंध
रुमेटाइड आर्थराइटिस एक ऐसी ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर के एक या अधिक जोड़ों में सूजन, दर्द और कुछ समय बाद विकृति उत्पन्न हो जाती है। आटोइम्यून रोग में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही शरीर के स्वस्थ ऊतकों, कोशिकाओं और अंगों पर हमला करने लगती है। आटोइम्यून बीमारी के पीछे आनुवंशिक या वातावरण में उपस्थित कारक भी जिम्मेदार होते हैं।
आर्थराइटिस में मुख्य कारक आरएच फैक्टर और एंटी-सीसीपी एंटीबाडी में बदलाव प्रमुख हैं। विभिन्न शोध से स्पष्ट है कि पायरिया के कारण पी जिंजीवालिस नामक कीटाणु की अधिकता से मुंह में स्थित प्रोटीन सीसीपी एंटीबाडीज में परिवर्तित हो जाती है जिससे रुमेटाइड आर्थइटिस के लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। पायरिया में कुछ और रसायन जैसे साइटोकाइंस और इंटरल्यूकिन पैदा होते हैं जो रुमेटाइड आर्थराइटिस या गठिया के विकास और प्रगति के कारक है।

(Image Source: AI-Generated)
जोड़ों के दर्द में कैसे कारण बनता है पायरिया
पायरिया के कीटाणु खून के रास्ते शरीर के अन्य हिस्सों जैसे जोड़ों आदि में फैल जाते हैं।
- यह बैक्टीरिया जोड़ों के तरल पदार्थ साइनोवियल फ्लुइड या जोड़ों की झिल्ली को प्रभावित करते हैं जिससे शरीर का इम्यून सिस्टम उन पर हमला करता है जिससे दर्द और सूजन उत्पन्न होते हैं।
- अगर किसी को पहले से गठिया है तो पायरिया के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है, क्योंकि पायरिया के कीटाणु जोड़ों की हड्डी और कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाते हैं।
- गठिया के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देते ही आप दंत चिकित्सक से मुंह की जांच करानी चाहिए। इससे आर्थराइटिस की आशंका को दूर किया जा सकता है।
जानें बचाव के कुछ जरूरी उपाय
- नियमित रूप से दंत चिकित्सक से जांच कराएं। स्केलिंग और रूट प्लानिंग (डीप स्केलिंग) जैसे उपाय किए जा सकते हैं।
- दिन में दो बार ब्रश करे और फ्लास का उपयोग करें। फ्लास दांतों के बीच फंसे अन्न कणों को निकालने में कारगर है।
- गंभीर पायरिया में संक्रमित दांत को निकलवाया जा सकता है, इससे मसूड़ों का संक्रमण भी कम हो सकता है।
यह भी पढ़ें- सुबह की ये 'हेल्दी ड्रिंक' कहीं आपके दांतों को तो नहीं कर रही खराब?
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।