पानी से नाक और फिर सीधे दिमाग तक, शरीर पर कैसे हमला करता है 'ब्रेन-ईटिंग' अमीबा? इन लक्षणों को न समझें मामूली
'ब्रेन-ईटिंग' अमीबा दूषित पानी से नाक के रास्ते शरीर में घुसकर जानलेवा दिमागी संक्रमण फैला सकता है। ...और पढ़ें

गर्मियों में नहाते समय नाक में पानी जाना हो सकता है खतरनाक (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि गर्मी से राहत पाने के लिए जिस पानी में आप डुबकी लगा रहे हैं, वहां कोई ऐसा सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकता है जो सीधे आपके दिमाग पर हमला कर दे? जी हां, यह कोई साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि एक डरावनी हकीकत है।
इस जानलेवा माइक्रोऑर्गेनिज्म का नाम है Naegleria fowleri, जिसे आम बोलचाल में 'ब्रेन-ईटिंग' यानी दिमाग खाने वाला अमीबा कहा जाता है। आइए जानते हैं कि यह सूक्ष्म जीव कैसे काम करता है और क्यों यह पूरी दुनिया के लिए एक नई चिंता का विषय बन गया है।
दूषित पानी से सीधा दिमाग पर हमला
यह खतरनाक अमीबा मुख्य रूप से गर्म पानी की झीलों, झरनों और उन स्विमिंग पूल्स में पनपता है जिनकी साफ-सफाई नहीं की जाती।
- जब कोई व्यक्ति ऐसे दूषित पानी में नहाता या तैरता है, तो यह अमीबा पानी के साथ नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश कर जाता है।
- नाक से घुसने के बाद यह जीव बेहद तेजी से दिमाग के टिश्यूज की तरफ बढ़ता है और उन्हें नष्ट करना शुरू कर देता है।
- इस संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज होती है कि एक बार पानी के संपर्क में आने के महज साढ़े सात दिन के भीतर एक स्वस्थ इंसान की मौत हो सकती है।
इंसान की पहचान छीन लेता है यह संक्रमण
नेगलेरिया फाउलेरी से होने वाले इस जानलेवा दिमागी संक्रमण को मेडिकल भाषा में प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस कहा जाता है। इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह इंसान के विचारों और उसकी पहचान तक को मिटा देता है।
शुरुआत में मरीज को तेज सिरदर्द और उल्टियां होती हैं। डॉक्टर अक्सर इसे 'मेनिनजाइटिस' समझ लेते हैं, क्योंकि दोनों के शुरुआती लक्षण बिल्कुल एक जैसे होते हैं। जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, दिमाग में गंभीर सूजन आ जाती है। मरीज को अजीबोगरीब चीजें दिखने लगती हैं, जैसे छत पर कीड़े रेंगना।
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हालत इतनी बिगड़ जाती है कि मरीज अपने परिवार वालों को पहचानना बंद कर देता है और यहां तक कि अपनी खुद की पहचान भी भूल जाता है। इसके बाद मरीज को दौरे पड़ते हैं और आखिरकार उसकी मौत हो जाती है।
भारत समेत दुनिया भर में बज रही है खतरे की घंटी
यह अमीबा कितना जानलेवा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 1962 से 2023 के बीच दुनिया भर में इसके 488 मामले सामने आए, जिनमें से लगभग 97 फीसदी मरीजों की मौत हो गई।
अब यह संक्रमण भारत के लिए भी एक बड़ा अलर्ट है। बता दें, पिछले साल भारत में इस अमीबा संक्रमण के 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए। यह पूरी दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा आउटब्रेक है। इससे पहले तक पूरी दुनिया का कुल आंकड़ा 500 से भी कम था, लेकिन भारत में अब भी नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
गर्म इलाकों से ठंडे देशों तक पहुंचा खतरा
पारंपरिक रूप से यह सूक्ष्म जीव अमेरिका के दक्षिणी राज्यों, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर पाया जाता था, लेकिन अब यह अपना दायरा बढ़ा रहा है:
- ठंडे देशों में दस्तक: पिछले दो दशकों में यह इटली, बेल्जियम, अमेरिका के मिनेसोटा जैसे ठंडे राज्यों और स्लोवाकिया तक पहुंच गया है।
- झीलों से आगे बढ़ा खतरा: साल 2023 में ताइवान की एक इनडोर सर्फिंग फैसेलिटी और अमेरिका में एक दूषित 'स्प्लैश पैड' के संपर्क में आने से भी मौतें दर्ज की गई हैं।
बचाव के लिए जरूर रखें इन 3 बातों का ध्यान
बेशक ब्रेन-ईटिंग' अमीबा का संक्रमण बेहद जानलेवा है, लेकिन आपको इससे घबराने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, बढ़ते जोखिम के प्रति सतर्क रहकर इससे बचा जा सकता है। चूंकि यह अमीबा पानी के जरिए नाक से शरीर में घुसता है, इसलिए आप इन बातों का ध्यान रख सकते हैं:
- खतरनाक जगहों से बचें: उन स्विमिंग पूल्स में जाने से बचें जो बेकार पड़े हैं या जिनकी नियमित साफ-सफाई नहीं होती है। साथ ही, दूषित 'स्प्लैश पैड' और इनडोर सर्फिंग फैसेलिटीज का यूज करते समय सतर्क रहें।
- गर्म पानी में खास सावधानी: प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों, झीलों और तालाबों में नहाते समय ज्यादा सावधानी बरतें। वैज्ञानिक बताते हैं कि जब पानी गर्म होता है, तो यह अमीबा बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है।
- नाक का रखें ध्यान: हमेशा यह ध्यान रखें कि पानी में उतरते या तैरते समय पानी तेजी से आपकी नाक में न जाए, क्योंकि इस अमीबा के शरीर में प्रवेश करने और दिमाग तक पहुंचने का यही एकमात्र रास्ता है।
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