शराब नहीं, आपका लाइफस्टाइल बन रहा है 'फैटी लिवर' की वजह, बचने के लिए तुरंत करें ये बदलाव
अस्त-व्यस्त जीवनशैली व खानपान की खराब आदतें चुपके से गंभीर बीमारियों के चपेट में ले सकती हैं। इन्हीं में से एक है एमएएसएलडी यानी फैटी लिवर की समस्या। ...और पढ़ें
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लेट नाइट जागना और बाहर का खाना लिवर को कर रहा डैमेज! (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। यदि वजन घटाने का प्रयास लगातार थका देने वाला है तो आपको तुरंत अपनी दिनचर्या पर दोबारा नजर डाल लेनी चाहिए। कामकाज की आपाधापी और समय बचाने की धुन में बाहर से खाना मंगा लेने की आदत, बढ़ता स्क्रीन टाइम और लगातार नींद हो रहा समझौता आपको नई मुसीबत में डाल सकता है।
अस्त व्यस्त दिनचर्या आपको फैटी लिवर का शिकार बना सकती है। फैटी लिवर के बारे में यह सामान्य मिथक है कि खानपान में थोड़ा बदलाव या तय समय पर मार्निंग वाक या दौड़ लगा लेने भर से ठीक हो सकता है। लेकिन अब इस सोच से उबरें और दिनचर्या में उचित बदलाव करने के लिए तैयार हो जाएं, अन्यथा समय के साथ यही फैटी लिवर फाइब्रोसिस व सिरोसिस जैसी भयावह और घातक बीमारी का रूप ले सकता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
एमएएसएलडी में क्या होता है?
एमएएलएडी लिवर से जुड़ी बीमारियों का ऐसा समूह है जिसमें अल्कोहल प्रमुख कारक नहीं होता। दरअसल, एमएएलएडी के बारे में एक सामान्य धारणा यह भी है कि अल्कोहल अधिक लेने से यह समस्या होती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे लिवर में कोशिकाओं में फैट बढ़ने पर सूजन हो जाती है।
इससे लिवर की कार्यक्षमता खराब होने लगती है। इसके कारणों की बात करें तो इसे आप अपनी अस्त-व्यस्त जीवनशैली व खराब खानपान की आदतों व निष्क्रियता से जोड़ सकते हैं। बता दें कि इन दिनों मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध, कोलेस्ट्रोल का उच्च स्तर, उच्च रक्तचाप की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे लोगों को एमएएलएडी के खतरे से बचने की जरूरत है।
टाइप 2 डायबिटीज है तो बरतें अधिक सावधानी
यदि फैटी लिवर है तो इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा रहता है। टाइप 2 डायबिटीज यानी जिस स्थिति में आपका पैंक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तो वहां समय के साथ लिवर से जुड़े जोखिम तेजी से बढ़ते हैं। समय पर जांच व ध्यान नहीं देने पर यह अपेक्षाकृत तेजी से हेपेटाइटिस और सेरोसिस जैसी खतरनाक स्थिति में पहुंचा सकती है। डायबिटीज के साथ कोलेस्ट्रोल का स्तर उच्च होने के साथ हार्ट डिजीज भी है तो यह अधिक गंभीर और जानलेवा स्थिति है। फैटी लिवर को कम करने के लिए कोई एक विशेष दवा भी नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि डायबिटीज की दवा नियमित लें और चिकित्सक के परामर्श को गंभीरता से पालन करें।
डॉ. नवल विक्रम, प्रोफेसर एवं डायबेटोलाजिस्ट, एम्स, नई दिल्ली
द लैंसेट गैस्ट्रोएंटेरोलाजी एंड हेपेटोलाजी पर प्रकाशित नए अध्ययन के अनुसार, 2050 तक 180 करोड़ लोग एमएएसएलडी यानी फैटी लिवर के शिकार हो सकते हैं।

(AI Generated Image)
इन बातों पर गौर करना जरूरी
सुबह जिम जाने या टहलने के बाद दिन भर लंबे समय तक निष्क्रिय रहने का कोई लाभ नहीं है। यदि आप सक्रिय नहीं रहते तो मसल्स मास कम होने लगता है, मेटाबोलिक प्रक्रिया धीमा होने लगती है, रक्त संचार बिगड़ जाता है और फैट भी बढ़ने लगता है। यह दिल की बीमारियों, जोड़ों से जुड़े जोखिम के साथ लिवर की समस्याओं को जन्म देती है।
ज्यादातर बीमारियां उम्र बढ़ने पर धीरे-धीरे विकसित होती हैं। उचित समय पर जांच नहीं कराने पर इनका देर से पता लगता है जिससे इलाज कठिन हो सकता है। रेगुलर स्क्रीनिंग और हेल्थ चेकअप की मदद से आप हाइ बीपी, डायबिटीज, कोलेस्ट्रोल का पता करते ही हैं आपके लिवर की सेहत का भी सही समय पर पता चल सकता है।
3 कारकों का है बड़ा योगदान
ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी में धूमपान, उच्च बीएमआइ और हाइ फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज को फैटी लिवर का प्रमुख कारक माना गया है।
- धूमपान- धूमपान की आदत है तो इससे स्ट्रेस बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी। यह लिपिड मेटाबोलिज्म को खराब कर देता है, यह लिवर में फैट की मात्रा बढ़ाता है और इससे सूजन भी बढ़ती है।
- अधिक बीएमआई- जिनका बाडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई 30 से अधिक है उनके लिवर में फैट संग्रह का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस व टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम अधिक रहता है। यह एमएएसएलडी को बढ़ावा देता है।
- फास्टिंग- यदि ब्लड ग्लूकोज फास्टिंग यानी बिना कुछ खाए 100 एमजी/डीएल से ज्यादा रहता है तो एमएएसएलडी का जोखिम और अधिक रहता है।
मोटापा नहीं है? तो भी रहें सतर्क
मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, उच्च कोलेस्ट्रोल, हाइपरटेंशन व निष्क्रियता रहती है तो आपको फैटी लिवर को लेकर सतर्क होना चाहिए। अगर मोटापा नहीं है, लेकिन पेट पर चर्बी अधिक है, तो आपको भी सजग दिनचर्या का पालन करना चाहिए। आपका खानपान खराब रहता है, कम उम्र से ही गलत आदतें जैसे धूमपान, लंबे समय तक जागना, डेस्क पर बैठे रहने जैसी दिनचर्या फैटी लिवर का शिकार बना सकती है और एक समय के बाद दूसरे कई जोखिम को जन्म दे सकती है।
स्वस्थ लिवर के लिए-
- दिन के किसी भी समय सामान्य शर्करा स्तर को 160 मिलीग्राम/डीएल से कम बनाए रखना लिवर के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होता है।
- फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और कम वसा वाले प्रोटीन से भरपूर आहार रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और लिवर में वसा की मात्रा को कम करने में मदद कर सकता है।
- एवोकाडो, मेवे, बीज और जैतून के तेल जैसे स्वस्थ वसा को शामिल करें। संतृप्त वसा, अतिरिक्त चीनी और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट से परहेज करें।
- थोड़ा सा वजन कम करने से भी लिवर की कार्यप्रणाली में सुधार होता है।
- नियमित व्यायाम लीवर पर पड़ने वाले दबाव को कम कर सकता है।
- दवाएं और सप्लीमेंट को बिना डाक्टर के सलाह के लेने से बचें। लीवर से जुड़ी गंभीर समस्या का यह कारण बन सकती हैं।
लिवर शरीर का एक ऐसा अंग है जो सत्तर प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हो जाने पर भी स्वयं ठीक कर लेने मे माहिर है। लेकिन निरंतर बरती जाने वाली लापरवाही और खराब दिनचर्या इसकी यह क्षमता को कम कर देती है और इसे हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है।
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