दूसरों के चबाने या पेन की टिक-टिक से आता है गुस्सा? जानें छोटी-छोटी आवाजों से होने वाली इस चिढ़ की वजह
कुछ लोगों के लिए छोटी-छोटी आवाजें काफी परेशान करने वाली होती हैं। किसी के सांस लेने या चबाने की आवाज से भी उन्हें तेज गुस्सा आने लगता है। ...और पढ़ें

क्या आपको भी परेशान करती हैं छोटी-छोटी आवाजें? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी के चिप्स चबाने की आवाज, चाय की चुस्की, या पेन की टिक-टिक से आपको अचानक तेज गुस्सा आ गया हो? आम लोगों के लिए ये आवाजें बेहद सामान्य हो सकती हैं, लेकिन कुछ लोगों के लिए ये किसी मेंटल टॉर्चर जैसी होती हैं।
अगर आपके या आपके किसी करीबी के साथ ऐसा होता है, तो यह मामूली चिड़चिड़ापन नहीं है। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे मिसोफोनिया कहा जाता है। आइए समझें कि क्यों कुछ लोगों के लिए मामूली आवाज भी इतनी परेशान करने वाली बन जाती है।
क्या होता है मिसोफोनिया?
मिसोफोनिया दो शब्दों से मिलकर बना है मिसोस यानी नफरत और फोन यानी आवाज। इसका सीधा मतलब है आवाज से नफरत होना। यह एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल कंडीशन है, जिसमें व्यक्ति कुछ खास आवाजों की तरफ ज्यागा सेंसिटिवि हो जाता है।
किन आवाजों से ट्रिगर होता है मिसोफोनिया?
मिसोफोनिया से पीड़ित लोगों को हर आवाज से परेशानी नहीं होती, बल्कि कुछ खास आवाजें उनके अंदर तेज रिएक्शन पैदा करती हैं। इन आवाजों को ट्रिगर कहा जाता है। यह स्थिति हर व्यक्ति में अलग हो सकती है किसी के लिए सिर्फ एक आवाज ट्रिगर हो सकती है, तो किसी के लिए कई आवाजें।
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सबसे आम ट्रिगर्स में शामिल हैं-
- मुंह से जुड़ी आवाजें- खाना चबाना, होंठ थपथपाना, जोर-जोर से सांस लेना, खर्राटे या च्युइंग गम चबाने की आवाज।
- रोजमर्रा की आवाजें- कीबोर्ड पर टाइपिंग, पेन की टिक-टिक, घड़ी की सुइयों की आवाज, नल से पानी टपकने की आवाज या कार के वाइपर की आवाज।
मिसोफोनिया के लक्षण कैसे होते हैं?
- अचानक बहुत तेज गुस्सा आना।
- घबराहट, बेचैनी और एंग्जायटी महसूस होना।
- आवाज पैदा करने वाले व्यक्ति के लिए चिड़चिड़ापन महसूस होना।
इसके कुछ फिजिकल रिएक्शन भी हो सकते हैं, जैसे-
- दिल की धड़कन का अचानक बढ़ जाना।
- ब्लड प्रेशर बढ़ना।
- सीने में भारीपन या जकड़न महसूस होना।
- बहुत पसीना आना या शरीर के रोएं खड़े होना।
इतना ही नहीं, कुछ लोगों के लिए यह स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि वे उन जगहों में जाने से बचने लगते हैं, जहां ट्रिगर करने वाली आवाज की संभावना हो या आवाज सुनते ही उस जगह को छोड़कर तुरंत चले जाते हैं।
कुछ स्थितियों में व्यक्ति काफी आक्रामक भी हो जाता है। आवाज बंद करने के लिए सामने वाले को टोकना, चिल्लाना या बहस करना या कुछ मामलों में हिंसक भी हो जाता है।
इसका इलाज क्या है?
मिसोफोनिया से पीड़ित लोग जानबूझकर ऐसा नहीं करते। यह उनके दिमाग की बनावट के कारण होता है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ तरीकों से इसे काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है-
- ट्रिगर करने वाली आवाजों को पहचानें।
- ट्रिगर के समय ईयर प्लग्स या नॉइस कैंसलिंग ईयर फोन्स का इस्तेमाल करें।
- व्हाइट नॉइज मशीनों का इस्तेमाल करें।
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