सेम डाइट, फिर भी कम रिजल्ट? आखिर क्यों पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए वजन घटाना है ज्यादा मुश्किल
महिलाओं के लिए पुरुषों की तुलना में वजन कम करना ज्यादा मुश्किल होता है, क्योंकि उनकी बायोलॉजी अलग होती है। उनके शरीर में फैट ज्यादा और मांसपेशियां कम ...और पढ़ें

महिलाओं का वजन आसानी से कम क्यों नहीं होता? (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने देखा होगा कि एक जैसी डाइट या एक्सरसाइज करने के बावजूद अक्सर पुरुषों का वजन आसानी से कम हो जाता है, लेकिन महिलाओं को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
महिलाओं के लिए यह स्थिति निराश करने वाली हो सकती है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसका दोष महिलाओं की बायोलॉजी को देते हैं। जी हां, दरअसल, महिलाओं और पुरुषों की बायोलॉजी में अंतर होता है, जिसकी वजह से महिलाओं को वजन कम करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। आइए जानें ऐसा क्यों होता है।
शरीर की बनावट
पुरुषों और महिलाओं के शरीर की बनावट में अंतर होता है। आमतौर पर महिलाओं के शरीर में फैट ज्यादा और मांसपेशियां कम होती हैं। हमारा मेटाबॉलिज्म काफी हद तक हमारी मांसपेशियों पर निर्भर करता है। मांसपेशियों की कमी के कारण महिलाओं का बेसिक मेटाबॉलिक रेट कम होता है, जिसका मतलब है कि आराम करते समय उनका शरीर पुरुषों के मुकाबले कम कैलोरी जलाता है।
दिलचस्प बात यह है कि महिलाओं में ज्यादा फैट होना इवॉल्यूशन का हिस्सा है। यह एक्स्ट्रा फैट प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर के लिए बहुत जरूरी साबित होता है। इसके अलावा, पुरुषों और महिलाओं की हड्डियों की बनावट अलग होती है और उनके शरीर में फैट भी अलग-अलग जगहों पर जमा होता है। महिलाओं में फैट पूरे शरीर में फैली होती है, इसलिए उन्हें अपने रूप-रंग में बदलाव देखने के लिए अक्सर ज्यादा वजन घटाने की जरूरत पड़ती है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
प्रेग्नेंसी
महिलाओं को अपने जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर हार्मोनल बदलावों का सामना करना पड़ता है। प्रेग्नेंसी के दौरान वजन और शरीर का फैट बढ़ना स्वाभाविक है, जो बच्चे के जन्म के बाद भी बनी रह सकती है। नए माता-पिता के लिए पूरी नींद और एक्सरसाइज के लिए समय निकालना मुश्किल होता है, जो वजन घटाने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, ब्रेस्ट फीडिंग कराने से कैलोरी जलती है, जो वजन घटाने में सहायक हो सकती है।
इसके बाद आता है मेनोपॉज का स्टेज। इस दौरान हार्मोन की कमी और धीमे मेटाबॉलिज्म के कारण वजन बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है, खासकर पेट के हिस्से में। उम्र के साथ मांसपेशियों का कम होना भी पहले जैसा वजन बनाए रखना मुश्किल बना देता है।
हार्मोनल इंबैलेंस
महिलाओं में हार्मोनल इंबैलेंस की समस्या काफी आम है। पीसीओएस जैसी स्थिति करीब 5% से 10% महिलाओं को प्रभावित करती है, जिससे वजन घटाना बहुत मुश्किल हो जाता है और पीरियड्स में अनियमितता आती है। इसके अलावा, कुशिंग सिंड्रोम, हाशिमोटो रोग और हाइपोथायरायडिज्म जैसी बीमारियां भी महिलाओं में ज्यादा पाई जाती हैं, जो हार्मोनल इंबैलेंस पैदा कर वजन बढ़ाने का कारण बनती हैं।
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