ज्यादातर टीके बीमारी से पहले लगते हैं, फिर रेबीज में ऐसा क्यों नहीं? AIIMS के डॉक्टर ने बताई वजह
बचपन से हम यही देखते आए हैं कि किसी भी बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन हमेशा बीमारी होने से पहले लगाई जाती है, मगर कभी सोचा है कि रेबीज में ऐसा क्यों नह ...और पढ़ें

बीमारी से पहले लगती हैं वैक्सीन, तो कुत्ते के काटने के बाद क्यों लगता है रेबीज का टीका? (Image Source: Magnific)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हम देखते हैं कि किसी भी बीमारी से बचने के लिए वैक्सीन बीमारी होने से पहले लगाई जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रेबीज की वैक्सीन हमेशा कुत्ते के काटने के बाद ही क्यों दी जाती है? आइए, AIIMS (नई दिल्ली) के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला से समझते हैं इसके पीछे का विज्ञान।

(Image Source: Magnific)
बहुत ही धीमा है रेबीज का वायरस
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर शेयर की गई एक वीडियो में डॉ. राहुल बताते हैं, "जैसे ही कोई कुत्ता काटता है, उसकी लार से रेबीज का वायरस हमारे शरीर के घाव तक पहुंच जाता है, लेकिन यह वायरस स्वभाव से बहुत ही धीमा होता है। यह सबसे पहले घाव के आस-पास मौजूद मांसपेशियों और कनेक्टिव टिशू में अपनी संख्या बढ़ाता है। इसके बाद यह हमारे शरीर की नसों से होता हुआ हमारी रीढ़ की हड्डी और फिर ऊपर दिमाग तक पहुंचता है।"
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दिमाग तक पहुंचने का भयंकर खतरा
जब यह वायरस दिमाग में पहुंच जाता है, तो यह ब्रेनस्टेम और लिम्बिक एरिया को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। इसके परिणामस्वरूप एन्सेफलाइटिस के लक्षण सामने आने लगते हैं। यह एक बेहद खतरनाक स्थिति है, जिसका फिलहाल कोई इलाज नहीं है और इसमें मृत्यु दर लगभग 100% होती है।
वैक्सीन से कैसे बचती है जान?
राहत की बात यह है कि इस जानलेवा बीमारी से वैक्सीन के जरिए 100% तक बचा जा सकता है। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि रेबीज के वायरस को घाव की जगह से दिमाग तक पहुंचने में कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक का समय लग सकता है (औसतन 2 से 3 महीने)।
दिमाग तक वायरस के पहुंचने और एन्सेफलाइटिस के लक्षण सामने आने से पहले हमें जो यह समय मिलता है, वह बहुत कीमती होता है। इस बीच अगर हमारा इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने के लिए तैयार हो जाए, तो हम रेबीज को आसानी से हरा सकते हैं। यही काम रेबीज की वैक्सीन करती है।
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(Image Source: NICD)
जब घाव बहुत गहरा हो
अगर कुत्ते ने बहुत बुरी तरह से काटा है और घाव काफी गहरा है, तो यह संभव है कि शरीर में वायरस की मात्रा हुत ज्यादा हो। ऐसी स्थिति में वायरस तेजी से दिमाग की तरफ फैल सकता है और केवल रेबीज की वैक्सीन असरदार नहीं रह जाती।
ऐसे गंभीर मामलों में मरीज को वैक्सीन के साथ-साथ 'रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन' भी दिया जाता है। यह एक तरह की रेडीमेड एंटीबॉडी होती है। जब तक शरीर में रेबीज की वैक्सीन अपना काम शुरू करती है, तब तक यह इम्युनोग्लोबुलिन वायरस से लड़कर हमारे शरीर को तुरंत सुरक्षा प्रदान करता है।
यह समझना बहुत जरूरी है कि अगर रेबीज की बीमारी हो जाए, तो मौत लगभग निश्चित है, लेकिन सही समय पर वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन लेकर इस खतरे को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है और मरीज की जान 100% बचाई जा सकती है।
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