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    राजस्थानी लोकगीत, जिस पर 30 किलो का लहंगा पहन दीपिका पादुकोण ने किया था डांस; आज भी है नंबर-1

    Updated: Sat, 20 Jun 2026 10:18 AM (IST)

    फिल्म पद्मावत में दीपिका पादुकोण में राजस्थान के मशहूर लोकनृत्य घूमर पर डांस किया था। घूमर राजस्थान की संस्कृति का अटूट हिस्सा है। ...और पढ़ें

    घूमर कैसे बना राजपुताना शान का हिस्सा? (Picture Courtesy: YouTube)

    घूमर कैसे बना राजपुताना शान का हिस्सा? (Picture Courtesy: YouTube)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। साल 2018 में आई दीपिका पादुकोण की फिल्म पद्मावत का घूमर गाना दर्शकों के दिलों पर आज भी राज करता है। इस गाने पर दीपिका ने 30 किलो का लहंगा पहनकर घूमर किया था। दीपिका पर फिल्माया गया ये गाना दरअसल में राजस्थान के मशहूर लोकनृत्य घूमर से प्रेरित है। 

    घूमर राजस्थान की संस्कृति में ऐसे रचा-बसा है कि इन दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। 'म्हारी घूमर छै नखराली ए मा...' की गूंज कानों में पड़ते ही, आंखों के सामने राजपूताना वैभव, रंग-बिरंगे घूमते लहंगे और थिरकते कदमों की एक खूबसूरत तस्वीर उभर आती है। यह राजस्थान की आत्मा और नारीत्व के गौरव का प्रतीक है। आइए जानें राजस्थान के घूमर का इतिहास और खासियत। 

    भील जनजाति से महलों की शान तक

    घूमर शब्द घूम से बना है, जिसका मतलब है डांस करते समय लहंगे का घेरदार घेरा। माना जाता है कि घूमर की शुरुआत मध्यकाल में राजस्थान की भील जनजाति ने की थी। वे सरस्वती की आराधान और सामाजिक उत्सवों पर घूमर गाते और नृत्य थे।

    समय के साथ घूमर राजघरानों तक पहुंचा और राजपूत राजाओं ने इस कला को खूब सराहा और संरक्षण दिया। महलों में कदम रखते ही घूमर का स्वरूर और भव्य हो गया। राजपुताना की रानियां और राजकुमारियां खास तौर पर केवल महिलाओं की मौजूदगी में इस गीत पर थिरकती थीं और धीरे-धीरे यह शाही मर्यादा का प्रतीक बन गया।

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    (AI Generated Image)

    क्यों खास है घूमर

    घूमर पूरी तरह से महिलाओं को समर्पित है। घूमर के गीत के बोल अक्सर मां-बेटी के संवाद या प्रेमी-प्रेमिका के मनुहार से जुड़े होते हैं। इस पर नृत्य करते समय महिलाएं अपने चेहरे पर घूंघट रखती हैं और बड़े ही ठहराव के साथ नृत्य करती हैं, जो राजपूती शान और मर्यादा को दिखाता है। 

    घूमर में महिलाओं के पैरों की चाल देखने लायक होती है। इसमें 8 चरणों की एक खास कलाबाजी होती है, जिसे सवाई कहा जाता है। इस सवाई के साथ जब महिलाएं गोल घेरे में चक्कर काटती हैं, तो उनका लहंगा एक सुंदर चक्र जैसा लगता है, जिसे घूम कहते हैं।

    घूमर की खासियत इसके पारंपरिक पहनावे के बिना अधूरी है। महिलाएं चटकीले रंगों का चौरासी कली का घाघरा और कुर्ती-कांचली पहनती हैं। इसके साथ ही राजस्थानी आभूषण जैसे बोरला, चूड़ा, बाजूबंद और करधनी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

    दुनियाभर में छाया घूमर

    आज के समय में घूमर केवल तीज-त्योहारों, गणगौर पूजा या शादियों तक सीमित नहीं रह गया है। इंटरनेशनल स्टेज से लेकर बॉलीवुड फिल्मों, जैसे पद्मावत तक ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई है।