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    आखिर तोते इंसानों की आवाज की हूबहू नकल कैसे कर लेते हैं? जवाब जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

    Updated: Tue, 05 May 2026 03:53 PM (IST)

    आपने देखा होगा कि तोते इंसानों की तरह आवाज निकाल लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वो ऐसा कैसे कर लेते हैं? इसके पीछे का साइंस काफी दिलचस्प है। ...और पढ़ें

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    तोते ही इंसानों की तरह कैसे बोल लेते हैं? (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर हमने देखा है कि पालतू तोते घर के सदस्यों का नाम पुकारते हैं, नमस्ते कहते हैं या फोन की घंटी बजते ही हेलो बोलने लगते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब अन्य पक्षी हमारी तरह बात नहीं कर पाते, तो तोते में ऐसी क्या खास बात होती है? 

    क्या वे सिर्फ हमारी आवाज की नकल करते हैं या वाकई उन्हें हमारी बातों का मतलब भी समझ आता है? ये सवाल जितने दिलचस्प हैं, साइंस के पास इनके उतने ही रोचक जवाब भी मौजूद हैं। आइए समझते हैं कि आखिर तोते इंसानों की तरह कैसे बोल लेते हैं और इसके पीछे का विज्ञान क्या है।

    तोता आवाज कैसे निकालता है?

    इंसान अपनी आवाज के लिए गले में स्थित लैरिंक्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन तोतों के पास यह अंग नहीं होता। इसके बजाय, उनके सीने में सांस की नली के नीचे एक खास अंग होता है जिसे सिरिंक्स कहा जाता है। तोते अपनी सांसों और सिरिंक्स के आसपास की मांसपेशियों को इतनी बेहतर तरीके से नियंत्रित करते हैं कि वे इंसानी शब्दों की हूबहू नकल कर पाते हैं।

    Parrot

    (Picture Courtesy: Freepik)

    तोते नकल क्यों करते हैं?

    तोते सामाजिक प्राणी होते हैं और झुंड में रहना पसंद करते हैं। वे अपनी आवाज का इस्तेमाल चेतावनी देने, साथी को रिझाने या अपने इलाके की रक्षा के लिए करते हैं। जब एक तोता इंसानों के साथ रहता है, तो वह उस परिवार को ही अपना परिवार मान लेता है।

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    एक सोशल बर्ड होने के कारण वह अपने साथियों के साथ घुलने-मिलने की कोशिश करता है। वह दूसरे पक्षियों की आवाज निकालने के बजाय उन शब्दों को दोहराने लगता है जो उसके आस-पास सबसे ज्यादा बोले जाते हैं। खासतौर से वे शब्द जिनसे इंसान कोई रिएक्शन देते हैं, तोता उन्हें जल्दी सीखता है।

    क्या बातों का मतलब भी समझते हैं?

    तोते आपकी बातों का मतलब नहीं समझ पाते हैं। यह एक तरह का एसोसिएटिव लर्निंग है, जिसके कारण वे इंसानों के साथ रहकर उनकी आवाज की नकल करने लगते हैं।

    तोते शब्दों को रिएक्शन के साथ जोड़ते हैं। मान लीजिए कोई कमरे में आता है और हर बार हैलो कहता है, तो तोता उस शब्द को किसी के आने से जोड़ लेगा। उसे पता होगा कि किसी के आने पर यह आवाज निकालनी है, लेकिन उसे इसका मतलब समझ नहीं आता।