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    ऑफिस के बाद कॉल उठाना बंद! क्यों 'जी-तोड़ मेहनत' को सफलता की बजाय सनक मान रहे Gen-Z

    Updated: Tue, 21 Apr 2026 03:13 PM (IST)

    ऑफिस के बाद अगर आप फोन किनारे रखकर अपनी फैमिली या खुद के साथ वक्त बिताना चुनते हैं, तो आप बिल्कुल आज की नई पीढ़ी यानी 'Gen Z' की तरह सोचते हैं। ...और पढ़ें

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    काम से ज्यादा खुद से प्यार: जानिए क्यों Gen Z ने 'हसल कल्चर' को कह दिया है 'ना' (Image Source: AI-Generated) 

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपको भी ऐसा लगता है कि सक्सेसफुल होने के लिए दिन-रात काम करना, छुट्टियां न लेना और अपनी पर्सनल लाइफ को पीछे छोड़ देना जरूरी है? पिछले एक दशक में 'हसल कल्चर' के नाम पर इसी मानसिकता को कामयाबी का पैमाना माना गया।

    मिलेनियल्स की पीढ़ी ने इस लाइफस्टाइल को खूब अपनाया, लेकिन आज की नई पीढ़ी यानी Gen-Z ने इस पुरानी सोच को सिरे से नकार दिया है। जी हां, उनके लिए लगातार काम करते रहना सफलता नहीं, बल्कि एक 'टॉक्सिक' आदत है।

    दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली के मुताबिक, काम को लेकर नजरिए में यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इस नई पीढ़ी की सोच आखिर है क्या।

    Gen Z Work Culture

    (Image Source: AI-Generated) 

    मानसिक शांति और वर्क-लाइफ बैलेंस है प्राथमिकता

    Gen-Z यह साफ कर चुकी है कि सिर्फ ज्यादा घंटे काम करना कामयाबी की गारंटी नहीं है। यह पीढ़ी अपने करियर के साथ-साथ अपनी मेंटल हेल्थ, पर्सनल टाइम और जीवन की शांति को बराबर अहमियत देती है। इनके लिए काम और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन (Work-Life Balance) कोई ऐशो-आराम की चीज नहीं, बल्कि एक बुनियादी जरूरत है। यही वजह है कि वे काम के अत्यधिक बोझ, बर्नआउट और खराब वर्क एनवायरमेंट के खिलाफ बेझिझक अपनी आवाज उठाते हैं।

    ऑफिस के बाहर अपनी बाउंड्रीज सेट करना

    मिलेनियल्स के दौर में जहां सोशल मीडिया पर भी देर रात तक काम करने को गर्व के साथ दिखाया जाता था, वहीं Gen-Z का मानना है कि बिना रुके काम करने से आप न सिर्फ बुरी तरह थकते हैं, बल्कि आपकी सोचने-समझने की क्रिएटिविटी भी खत्म होने लगती है।

    इस पीढ़ी की सबसे अच्छी बात यह है कि वे काम को लेकर अपनी सीमाएं तय करना बखूबी जानते हैं। ऑफिस की शिफ्ट खत्म होने के बाद ये किसी काम के मैसेज या ईमेल का जवाब देने से बचते हैं और इसे बिल्कुल भी गलत नहीं मानते। काम के बाद का समय इनके लिए फैमिली के साथ बिताने, अपने शौक पूरे करने या सिर्फ आराम करने के लिए होता है।

    Workplace boundaries

    (Image Source: AI-Generated)

    शोषण से बचने का नया तरीका बन रहा 'क्वाइट क्विटिंग'

    इसी नई सोच से 'क्वाइट क्विटिंग' का कॉन्सेप्ट सामने आया है। कुछ लोगों को लग सकता है कि इसका मतलब काम से जी चुराना है, लेकिन ऐसा नहीं है। इसका सीधा सा अर्थ है- सिर्फ उतना ही काम करना, जितनी आपकी जिम्मेदारी है। इस पीढ़ी का लक्ष्य हमेशा एक्स्ट्रा काम करके खुद का शोषण होने से बचाना है। सोशल मीडिया और टेक्नोलॉजी की मदद से युवाओं ने एक-दूसरे के साथ अपने एक्सपीरिएंस शेयर किए हैं, जिससे यह जागरूकता फैली है कि जिंदगी में काम के अलावा भी बहुत कुछ जरूरी है।

    घंटों तक काम नहीं, 'स्मार्ट वर्क' पर है भरोसा

    अक्सर कुछ लोगों को लगता है कि Gen-Z की यह सोच उन्हें कम मेहनती बना रही है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज के युवा 'जी तोड़' मेहनत के बजाय 'स्मार्ट तरीके' से काम करने में यकीन रखते हैं। वे अपना पूरा ध्यान काम के आउटपुट और प्रोडक्टिविटी पर लगाते हैं, न कि इस बात पर कि उन्होंने कितने घंटे ऑफिस में बिताए। उनका एक ही टारगेट है- कम समय में बेहतर काम करना और बचे हुए समय को अपनी पर्सनल लाइफ और हैप्पीनेस के लिए यूज करना।

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