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    आज आसमान में दिखेगा ब्लू मून, क्या बदल जाएगा चांद का रंग; जानें क्यों इतनी खास है यह पूर्णिमा?

    Updated: Sun, 31 May 2026 02:50 PM (IST)

    31 मई को इस महीने का दूसरा फुल मून दिखेगा। यह फुलमून एक नहीं बल्कि दो-दो वजहों से खास होने वाला है। ...और पढ़ें

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    क्यों खास है 31 मई का ब्लू मून? (Picture Courtesy: Freepik)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मई का महीना खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने के वालों के लिए बेहद खास है। आज यानी 31 मई को एक बेहद दुर्लभ नजारा दिखने वाला है।

    आज इस महीने का दूसरा फुल मून दिखाई देगा, जिसे ब्लू मून कहते हैं। अब अगर आप सोच रहे हैं कि क्या इस दिन चांद नीले रंग का दिखेगा? तो आइए जानें क्यों इतनी खास है आज की यह पूर्णिमा। 

    क्या वाकई नीला दिखाई देगा चांद?

    ब्लू मून नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल दिमाग में यही आता है कि क्या इस दिन चांद का रंग बदलकर नीला हो जाएगा? तो इसका जवाब है, नहीं। इस दिन रोज जैसा दिखता है, वैसा ही नजर आने वाला है। चांद के रंग और आकार में कोई बदलाव नहीं होगा। एस्ट्रोनॉमी में जब किसी एक ही अंग्रेजी कैलेंडर महीने में दो बार पूर्णिमा आती है, तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को ब्लू मून कहा जाता है। 

    ल्यूनर साइकिल लगभग 29.5 दिनों का होता है और हमारे कैलेंडर के महीने 30 या 31 दिनों के होते हैं, इसलिए समय के इस अंतर के कारण कभी-कभी एक ही महीने में दो फुल मून देखने को मिलते हैं। 

    मई की शुरुआत में ही पहला फुल मून दिख चुका है और आज 31 मई को महीने का दूसरा फुल मून दिखाई देगा। साथ ही, एक ही महीने में दो पूर्णिमा यानी ब्लू मून की स्थिति हर दो या तीन साल में केवल एक बार बनती है। इसलिए भी यह घटना काफी खास है।

    Full Moon

    (Picture Courtesy: Freepik)

    इस बार का ब्लू मून क्यों है सबसे खास? 

    आज होने वाली यह घटना सिर्फ एक साधारण ब्लू मून नहीं है, बल्कि इसके साथ एक और दिलचस्प घटना जुड़ रही है। यह साल 2026 का सबसे दूरी पर स्थित माइक्रोमून भी होगा।

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    चंद्रमा पृथ्वी के चक्कर पूरी तरह गोल घेरे में नहीं, बल्कि एक एलिप्टिकल एक्सिस में लगाता है। चक्कर काटते समय जब चांद पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु पर होता है, तो उस पोजिशन को एपोजी कहा जाता है।

    आज जब चंद्रमा फुल मून फेज में होगा, तब वह पृथ्वी से अपनी सबसे ज्यादा दूरी पर होगा। पृथ्वी से बहुत दूर होने के कारण आसमान में इसका आकार आम पूर्णिमा के मुकाबले थोड़ा छोटा दिखाई देगा। हालांकि, इंसानी आंखों से इस अंतर को पकड़ पाना मुश्किल होगा।

    कब और कैसे देखें यह नजारा?

    यह ब्लू मून और माइक्रोमून का खूबसूरत संगम आज के दिन दुनियाभर के स्काईवॉचर्स के लिए एक बेहतरीन मौका होगा। इसे देखने के लिए किसी खास चश्मे या टेलिस्कोप की जरूरत नहीं है। आप इसे अपने घर की छत या किसी भी खुले मैदान से साफ आसमान होने पर सीधे अपनी आंखों से देख सकते हैं।