158 साल बाद हिमालय के पहाड़ों में दिखा ये दुर्लभ पौधा, तवांग की चुना घाटी में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी
भारत की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, हिमालय के ऊंचे बर्फीले पहाड़ यूं ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं करते। ...और पढ़ें

तवांग जिले में पाया गया दुर्लभ पौधा 'सायनैंथस हूकेरी' (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्स्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है, हिमालय के ऊंचे बर्फीले पहाड़ यूं ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित नहीं करते। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हिमालय केवल इन पहाड़ों के लिए ही नहीं जाना जाता, यहां अनेकों ऐसे दुर्लभ पेड़-पौधे और जड़ी बूटियां हैं जो इस जगह को खास बनाती हैं। सिर्फ खास ही नहीं बनाती बल्कि दुनियाभर में पहचान भी दिलाती हैं।
आज हम हिमालय की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में एक बेहद दुर्लभ फूल वाला हिमालयी पौधा पाया गया है। पौधे की यह खोज भारत की फली-फूली जैव विविधता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
तवांग जिले में पाया गया दुर्लभ पौधा
अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में मागो नामक गांव के पास एक चुना घाटी है, यहां वैज्ञानिकों ने करीब 3600 मीटर की ऊंचाई पर एक सर्वे किया। इस दौरान उन्हें 158 साल पुराना 'सैयान्थस हुकेरी' नाम का दुर्लभ हिमालयी पौधा मिला। इस पौधे को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे आखिरी बार साल 1867 में सिक्किम में देखा गया था। इसकी जानकारी ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक जोसेफ डाल्टन हूकर ने दी थी।
कैंपानुलेसी फैमिली से है नाता
सायनैंथस हूकेरी कैंपानुलेसी (Campanulaceae) मतलब बेलफ्लावर फैमिली का एक दुर्लभ फूल वाला पौधा है। यह नाजुक सा पौधा पूर्वी हिमालय के ऊंचे और ठंडे इलाकों में उगता है। 'सैयान्थस हुकेरी' पौधे में नीले और बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं। इन फूलों की शेप घंटी के जैसी दिखती है।
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'सैयान्थस हुकेरी' क्यों खास है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में इसकी 50 से भी कम मैच्योर प्रजातियां बची हैं और इसकी दुर्लभता ही पौधे को खास बनाती है। 150 साल बाद 'सैयान्थस हुकेरी' के मिलने की जानकारी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस की एक बहुत ही फेमस इंटरनेशनल कंजर्वेशन मैगजीन 'ओरिक्स' में भी पब्लिश की गई है।
वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी
वैज्ञानिकों ने पौधे को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि क्योंकि खोज में ऐसे 50 से भी कम मैच्योर पौधे पाए गए हैं, ऐसे में इसे IUCN लिस्ट में भारत की लुप्त होने के खतरे वाली पौधों की प्रजाति यानी एन्डेन्जर्ड लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए। इस तरह पौधे को दुनिया में पहचान मिलने के साथ ही उसके सरंक्षण के लिए भी कदम उठाने की बात कही गई है।