जिसे आप 'पंचायत' का हिट सॉन्ग मान रहे हैं, वो है बिहार का सालों पुराना लोकगीत; मजेदार है इस गाने की कहानी
पंचायत सीरीज का हिट गाना ऐ राजा जी बिहार का एक मशहूर लोकगीत है, जिसे बच्चे के जन्म पर गाया जाता है। ...और पढ़ें

बिहार का खास लोकगीत है ऐ राजा जी (Picture Courtesy: YouTube)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पंचायत सीरीज का ऐ राजा जी गाना तो आपने सुना ही होगा। मनोज तिवारी की आवाज में गाया गया ये गाना लोगों को खूब पसंद आया था, लेकिन क्या आप जानते हैं ये गाना एक लोकगीत से लिया गया है?
जी हां, ये गाना बिहार का एक मशहूर लोकगीत है, जिसे यूपी के भी कुछ इलाकों में गाया जाता है। आइए जानें क्या है ऐ राजा जी गाने का बिहार से कनेक्शन।
क्यों गाया जाता है ये लोकगीत?
असल में यह लोकगीत एक सोहर है, जिसे बच्चे के जन्म पर गाया जाता है। बिहार और पूर्वांचल के इलाकों में जब बच्चों का जन्म होता है, तो छठी यानी जन्म के छठे दिन महिलाएं ढोलक-मंजीरे के साथ इकट्ठा होती हैं और मिलकर सोहर गाती हैं।
सोहर की एक-एक पंक्ति में नवजात शिशु के लिए ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद भरा होता है और जब महिलाएं एक साथ मिलकर ढोलक बजाते हुए सोहर गाती हैं, तो घर का पूरा वातावरण ही खुशी से भर जाता है। सोहर नए सदस्य के स्वागत के लिए तो गाया ही जाता है। साथ ही, इसमें बच्चे के उज्जवल भविष्य की कामना, लंबी उम्र और परिवार की उम्मीदें भी छिपी होती हैं।
इन गीतों के जरिए एक मां की तकलीफ और दर्द को भी बयां किया जाता है, जो वो अपने बच्चे को जन्म देने के लिए सहती है। मां के त्याग और अपने बच्चे के लिए उसके प्यार को बहुत ही खूबसूरत तरीके से सोहर के जरिए पेश किया जाता है।
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कैसे हुई सोहर की शुरुआत?
सोहर गान की शुरुआत कब और किसने की इसका कोई ठोस जवाब नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसकी शुरुआत वैदिक काल से चली आ रही है। उस जमाने में जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता था, तो आस-पास की महिलाएं इकट्ठा होती और गीतों के जरिए बच्चे को आशीर्वाद देती थीं और ऐसी ही सोहर की शुरुआत हुई।
आज भी सोहर में भगवान राम और कृष्ण के जन्म का वर्णन मिलता है, जिसे महिलाएं गाकर कामना करती हैं कि घर आया नया मेहमान भी इन्हीं की राह पर चले और माता-पिता का नाम रोशन करे।