'यार बाहर जाना जरूरी है क्या...' आप भी ऐसा ही सोचते हैं? एक्सपर्ट ने बताया इसके पीछे का 'माइंड गेम'
भीड़-भाड़ से दूर, घर के एक कोने में सुकून ढूंढना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि आपके दिमाग की खास बनावट है। आइए, साइकोलॉजिस्ट से इस बारे में डिटेल में समझते ह ...और पढ़ें

साइकोलॉजिस्ट ने डिकोड किया 'Homebody' होने का विज्ञान (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम सभी का स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। कुछ लोगों को दोस्तों के साथ बाहर जाना, भीड़-भाड़ और शोर-शराबे में मजा आता है, जबकि कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने घर की शांति और अकेलापन सबसे ज्यादा पसंद होता है।
दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली के अनुसार, यह हमारे व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा है। मनोविज्ञान की भाषा में इसे इस तरह समझा जा सकता है कि 'इंट्रोवर्ट' लोग अकेले समय बिताकर खुद को रिचार्ज करते हैं, जबकि 'एक्स्ट्रोवर्ट' दूसरों के बीच रहकर एनर्जेटिक फील करते हैं (Psychology of Staying Home)।

(Image Source: AI-Generated)
कुछ लोगों को घर की चारदीवारी इतनी प्यारी क्यों होती है?
दरअसल, ऐसे लोगों का दिमाग बाहरी चीजों के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होता है। बाहर का शोर, तेज आवाज, बहुत ज्यादा भीड़ और लगातार होने वाली बातचीत उनके दिमाग को बहुत जल्दी थका देती है। इसके उलट, घर का शांत और अपनी पसंद का माहौल उन्हें मानसिक रूप से संतुलित रखने में मदद करता है। घर उनके लिए एक 'सेफ स्पेस' की तरह काम करता है, जहां वे बिना किसी बाहरी मानसिक दबाव के सुकून से रह सकते हैं।
घर में मिलती है 'इमोशनल सिक्योरिटी'
घर में सुकून मिलने का एक और बड़ा कारण 'भावनात्मक सुरक्षा' है। जब हम बाहर होते हैं, तो अक्सर समाज की कई उम्मीदों का सामना करना पड़ता है। लोग हमें जज करते हैं और कई बार दूसरों से हमारी तुलना भी होती है। बहुत से लोग इन सब चीजों से असहज महसूस करते हैं, लेकिन अपने घर के अंदर किसी तरह का कोई दिखावा नहीं करना पड़ता और न ही कोई सामाजिक दबाव होता है। यही कारण है कि ऐसे लोग भीड़-भाड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपने निजी स्पेस में रहना ज्यादा पसंद करते हैं, जिससे उनका तनाव काफी कम रहता है।
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दिमाग ही तय करता है आपका 'कम्फर्ट जोन'
अगर हम इसके पीछे के विज्ञान को समझें, तो यह हमारे दिमाग में मौजूद 'डोपामाइन' और अन्य न्यूरोकेमिकल्स के स्तर से जुड़ा मामला है। कुछ लोगों के दिमाग को खुशी और संतुष्टि के लिए ज्यादा बाहरी उत्तेजना या सोशल एक्टिविटीज की जरूरत होती है। वहीं, कुछ लोग बहुत कम उत्तेजना और शांति में ही पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए, यह समझना जरूरी है कि हर इंसान का 'कम्फर्ट जोन' अलग-अलग होता है। अगर आपको बाहर जाने के बजाय घर में रहना ज्यादा पसंद है, तो यह पूरी तरह से नॉर्मल है और आपको खुद को बदलने की कोई जरूरत नहीं है।
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