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    पुराने जमाने के घरों में लगाए जाते थे दो पल्ले वाले दरवाजे, क्यों बनाए जाते थे इस खास डिजाइन के किवाड़?

    Updated: Sun, 21 Jun 2026 01:06 PM (IST)

    पुराने समय के घरों में दो पल्ले के दरवाजे लगाने के पीछे कई व्यवहारिक कारण छिपे होते थे। ...और पढ़ें

    गांवों के पुराने घरों में क्यों होते थे दो पल्ले वाले भारी दरवाजे? (AI Generated Image)

    गांवों के पुराने घरों में क्यों होते थे दो पल्ले वाले भारी दरवाजे? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपके घर में और आपके आस-पड़ोस के घरों में आप देखेंगे, तो आपको सिंगल पैनल वाले डोर या स्लाइडिंग दरवाजे देखने को मिलेंगे। ये एक किवाड़ के दरवाजे अब सिर्फ शहरों में ही नहीं, बल्कि गांवों के नए घरों में भी देखने को मिलते हैं, लेकिन पुराने मसमय में दो पल्ले के दरवाजे हुआ करते थे। 

    जी हां, अगर आप गांव में अपने दादा-नाना के जमाने के घरों को देखेंगे, तो आपको दो पल्ले वाले दरवाजे ही देखने को मिलेंगे। अब सवाल आता है कि आखिर पहले के समय में ऐसे दरवाजे क्यों बनाए जाते थे? दरअसल, इन दो पल्ले के भारी-भरकम दरवाजों के पीछे आर्किटेक्चर और उस समय की जरूरतों से जुड़े कारण छिपे हैं। आइए जानें क्यों पहले हुआ करते थे दो पल्ले के दरवाजे। 

    चौड़े रास्ते की सुविधा

    पुराने जमाने में परिवार बड़े होते थे और सभी साथ रहते थे। ऐसे में शादियों या किसी खास आयोजन पर घर में लोगों की भीड़ बढ़ जाती थी। ऐसे में दो पल्ले दरवाजों का फायदा होता था कि इन्हें पूरा खोलने पर बहुत चौड़ा रास्ता मिल जाता था, जिसे अंदर-बाहर जाना आसान हो जाता था। साथ ही, भारी सामान, जैसे- अनाज के बड़े बोरे या शादी के समय बड़े बक्से आदि आसानी से घर के अंदर-बाहर आ-जा सकते थे। 

    Double Leaf door (1)

    (AI Generated Image)

    घर की प्राइवेसी

    घर की प्राइवेसी के लिए भी पहले लोग दो पल्ले के दरवाजे लगवाते थे। अगर किसी बाहरी व्यक्ति से बात करनी हो या कोई छोटा सामान लेना-देना हो, तो पूरा दरवाजा खोलने के बजाय सिर्फ एक पल्ला खोला जाता था। इससे घर के अंदर कोई झांक नहीं पाता और प्राइवेसी बनी रहती थी। 

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    भारी लकड़ी का वजन संभालना

    पुराने समय में दरवाजे आज की तरह प्लाईवुड या खोखले बोर्ड से नहीं बनते थे। इन्हें सागौन, शीशम, महुआ या नीम की भारी लकड़ी से बनाया जाता था। सिंगल पैनल का बड़ा दरवाजा बनाने पर उसका वजन इतना ज्यादा हो जाता था कि उसे संभालने के लिए दीवारों और कब्जों पर बहुत भारी दबाव पड़ता था। ऐसा दरवाजा जल्दी ही टूट सकता था। दरवाजे को दो हिस्सों में बांटने से वजन बराबर दो भागों में बंट जाता था, जिससे उन्हें खोलना और बंद करना बहुत आसान हो जाता था और दरवाजे सदियों तक बिना खराब हुए टिके रहते थे।

    रोशनी और हवा का वेंटिलेशन

    पुराने घरों को इस तरह डिजाइन किया जाता था कि अंदर रोशनी और हवा आराम से आ सकें। दो पल्ले के दरवाजों को आधा या पूरा खोलकर हवा के फ्लो को कंट्रोल किया जा सकता था, जिससे क्रॉस वेंटिलेशन होता था। वहीं अगर बहुत तेज हवा चलने पर एक पल्ला बंद कर दिया जाए, तो हवा घर में भी आएगी, लेकिन उसका तेज झोंका नहीं आएगा।