Gen-Z में बढ़ा खिलौनों का क्रेज, क्यों बड़े होकर भी 'बचपन' नहीं छोड़ पा रहे हैं आज के युवा?
अब वो दौर बीत चुका है, जब खिलौने सिर्फ बच्चों को पसंद आते थे। आज के युवा भी खिलौनों को खूब पसंद कर रहे हैं और खरीद भी रहे हैं। इनमें जेन-जी की संख्या ...और पढ़ें

जेन-जी को क्यों पसंद आ रहे हैं खिलौने? (Picture Courtesy: Freepik)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के दौर में अगर आप किसी युवा के हाथ में प्यारा सा खिलौना या उनके बैग पर लटकती कोई छोटी सी डॉल देखें, तो हैरान न हों। दरअसल, अब ये खिलौने केवल बच्चों का शौक नहीं रहे, बल्कि एक बड़े वैश्विक बदलाव का हिस्सा हैं।
जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी आए दिन किसी न किसी नए ट्रेंड के लिए जानी जाती है। उसी में एक नया दौर खिलौनों का भी है। पिछले साल 'लबुबू डॉल्स' (Labubu Dolls) की जबरदस्त मांग ने यह साबित कर दिया कि प्लश टॉयज अब सिर्फ पालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं को भी खूब पसंद आ रहे हैं।
आंकड़ों में खिलौनों का जादू
ग्लोबल रिसर्च फर्म सिरकाना की एक रिपोर्ट चौंकाने वाले आंकड़े पेश करती है। इस साल ब्रिटेन में करीब 43% वयस्कों ने अपने लिए या किसी दूसरे बड़े व्यक्ति के लिए खिलौने खरीदे। लेकिन जब बात जेन-जी की आती है, तो यह आंकड़ा बढ़कर 76% तक पहुंच जाता है। आज के युवा न केवल लबुबू डॉल्स, बल्कि जेलीकैट जैसे ब्रांड्स के खिलौने बड़ी संख्या में इकट्ठा कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर अपनी इस कलेक्शन को गर्व से दिखा भी रहे हैं।
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(Picture Courtesy: Freepik)
टॉय कंपनियों हो रही है चांदी
युवाओं की इस नई पसंद ने खिलौना बनाने वाली कंपनियों की किस्मत बदल दी है। लबुबू बनाने वाली कंपनी 'पॉप मार्ट' के नेट प्रॉफिट में लगभग 400% का भारी उछाल देखा गया है। वहीं, मशहूर ब्रांड जेलीकैट की 2024 की कमाई में 66% की बढ़ोतरी हुई और उनका मुनाफा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। यह साफ दिखाता है कि खिलौनों का बाजार अब जेन-जी के दम पर नई ऊंचाइयां छू रहा है।
क्या है इस ट्रेंड के पीछे की वजह?
इस दिलचस्प बदलाव को 'जॉय इकोनॉमी' कहा जा रहा है। आज का युवा एक ऐसे दौर में जी रहा है, जहां आर्थिक दबाव, महंगाई, युद्ध और भविष्य की अनिश्चितताएं हर तरफ हैं। ऐसे तनाव भरे माहौल में, खिलौने उन्हें बचपन की उन खुशियों और सुकून की याद दिलाते हैं जहां कोई जिम्मेदारी नहीं थी। यह उनके लिए मानसिक शांति पाने और हकीकत से थोड़ी देर के लिए दूर भागने का एक जरिया बन गया है।
खिलौने अब केवल खेलने की वस्तु नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा बन गए हैं। जेन-जी का यह ट्रेंड बताता है कि दुनिया चाहे कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाए, सादगी और बचपन की यादें आज भी सबसे बड़ी खुशी का जरिया हैं।
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