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    गोल घेरे में ही क्यों खेला जाता है गरबा? शक्ति की उपासना से जुड़ी है गुजरात के इस मशहूर लोकनृत्य की कहानी

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 05:04 PM (IST)

    गरबा गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसे मां अंबा की अराधना से जोड़कर देखा जाता है। ...और पढ़ें

    क्यों खास है गुजरात का गरबा? (AI Generated Image)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात का नाम लेते ही दिमाग में सबसे पहला शब्द आता है गरबा। यह गुजरात का पारंपरिक लोकनृत्य है, जो आज देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। गरबा सॉन्ग शुरू होते ही, इसकी धुन पर पांव अपने आप थिरकने लगते हैं। 

    अब नवरात्र के शुभ अवसर पर गरबा गुजरात की सीमाओं को पार करके देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं इस डांस की शुरुआत कैसे हुई थी और इसकी खासियत क्या-क्या है? आइए जानें गरबा की कहानी।

    कैसे हुई गरबा की शुरुआत?

    गरबा गर्भ शब्द से बना है। पारंपरिक रूप से, इस नृत्य के बीच में मिट्टी के एक घड़े को रखा जाता है, जिसमें छोटे-छोटे छेद होते हैं और उसके अंदर दीपक जलाया जाता है। इस घड़े को गरबो कहा जाता है और इसके चारों ओर घूमकर गरबा किया जाता है। 

    माना जाता है कि ये घड़े में जल रहा दीपक जीवन का प्रतीक है और इसके चारों ओर घूमकर नृत्य करना शक्ति की अराधना का प्रतीक माना जाता है। इस दीप के चारों ओर गरबा करना प्रकृति और शक्ति के नौ रूपों की अराधना माना जाता है। मां अंबा जो इस सृष्टि का आधार हैं, गरबा उन्हीं की अराधना के लिए किया जाता है।

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    क्या है गरबा की खासियत?

    दूर से देखने में गरबा एक नॉर्मल डांस फॉर्म लग सकता है, लेकिन यह कई मायनों में खास है। गरबा हमेशा ग्रुप में खेला जाता है। गांव-समाज के लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं और एक साथ कदम और ताल मिलाकर गरबा खेलते हैं।  

    इस डांस में पैरों की ताल, हाथों की ताल और घूमर का शानदार मेल देखने को मिलता है। लोग एक सर्कल में घूमते हैं और ताली बजाकर, कदम ताल मिलाकर एक साथ गरबा खेलते हैं। आमतौर पर इसके लिए किसी खास वाद्य यंत्र की जरूरत नहीं होती। हाथों की ताली, चुटकी और पैरों की गति ही इस डांस की असली खासियत हैं। 

    शुरुआत में इसे धीमी गति से शुरू किया जाता है और धीरे-धीरे नृत्कों की गति बढ़ती है। गरबा में डांडिया का भी इस्तेमाल किया जाता है। डांडिया को आपस में टकराकर खेला जाता है, जिससे एक समूह में मधुर आवाज निकलती है। 

    कैसा होता है पहनावा?

    गरबा का पहनावा भी काफी खास होता है। महिलाएं रंग-बिरंगी चनिया-चोली पहनती हैं। ये पोशाक चटकीले रंगों के होती है, जिसपर मिरर वर्क, कौड़ियों और गोटा-पट्टी का का बहुत खूबसूरत काम किया होता है। इसके साथ ओढ़नी और ऑक्सीडाइज्ड या चांदी के गहने पहने जाते हैं। 

    वहीं पुरुष गरबा के लिए केडियूं और धोती पहने हैं। केडियूं एक घेरदार कुर्ता होता है, जिसपर कढ़ाई और शीशे का काम होता है। इसके साथ वे रंग-बिरंगी गुजराती पगड़ी पहनेते हैं और ऑक्सीडाइज्ड जूलरी पहनते हैं।