Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पढ़ाई में तेज और व्यवहार में समझदार; बच्चों का भविष्य के लिए आज ही अपनाएं 'जापानी पेरेंटिंग' के ये सीक्रेट्स

    By Meenakshi NaiduEdited By: Swati Sharma
    Updated: Mon, 27 Jul 2026 07:30 AM (IST)

    जापानी पेरेंटिंग बच्चों को जिम्मेदार, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए असरदार तरीके सिखाती है। ...और पढ़ें

    जापानी पेरेंटिंग स्टाइल से लें सीख (Picture Courtesy: Freepik)

    जापानी पेरेंटिंग स्टाइल से लें सीख (Picture Courtesy: Freepik)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा न सिर्फ पढ़ाई में अच्छा हो, बल्कि समझदार, अनुशासित और आत्मनिर्भर भी बने।आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चों को सही दिशा देना किसी चैलेंज से कम नहीं है। ऐसे में जापान की पेरेंटिंग स्टाइल दुनियाभर में सराही जाती है।

    जापान की परवरिश पद्धति बच्चों को जिम्मेदार, सेंसिटिव और आत्मनिर्भर बनाती है। आइए जानते हैं जापानी पेरेंटिंग के कुछ खास टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने बच्चे का भविष्य मजबूत बना सकते हैं।

    जापान की पेरेंटिग टिप्स

    • छोटी उम्र से जिम्मेदारी सिखाना- जापान में बच्चे बहुत कम उम्र से ही अपने छोटे-छोटे काम खुद करना सीख जाते हैं। स्कूल बैग तैयार करना, कमरे को व्यवस्थित रखना या घर के छोटे कामों में मदद करना,ये सब उनकी रूटीन का हिस्सा होता है। इससे वे सेल्फ कॉन्फिडेंट बनते हैं और उनमें रिस्पॉन्सबिलिटी की भावना विकसित होती है।
    • अनुशासन पर खास जोर- जापानी पेरेंटिंग में अनुशासन को सख्ती नहीं, बल्कि आदत के रूप में सिखाया जाता है। बच्चों को समय का महत्व, नियमों का पालन और दूसरों का सम्मान करना सिखाया जाता है। वहां स्कूलों में भी बच्चे खुद अपनी क्लास की सफाई करते हैं, जिससे उनमें सामूहिक जिम्मेदारी की भावना आती है।
    • इमोशनल बॉन्डिंग- जापानी माएं शुरुआती वर्षों में बच्चों के साथ गहरा भावनात्मक संबंध बनाती हैं। इसे “अमाे” की भावना कहा जाता है, जिसमें बच्चा खुद को सुरक्षित और प्यार से घिरा महसूस करता है। इससे बच्चे का मानसिक विकास बेहतर होता है और वह आत्मविश्वासी बनता है
    • समूह में काम करने की आदत- जापान की संस्कृति में बच्चों को टीमवर्क, सहयोग और सामूहिक सोच सिखाई जाती है।इससे वे समाज में बेहतर तरीके से घुल-मिल पाते हैं।
    • स्क्रीन टाइम सीमित रखना- जापानी माता-पिता बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखकर क्रिएटिव एक्टिविटीज की ओर प्रेरित करते हैं। किताबें पढ़ना, बाहर खेलना और कला से जुड़ना उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है, जिससे उनका संपूर्ण विकास होता है।
    • गलतियों से सीखने का अवसर- वहां बच्चों को हर छोटी गलती पर डांटने की जगह समझाया जाता है। उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का मौका दिया जाता है।इससे उनमें आत्मनिर्भरता और समस्या-समाधान की क्षमता बढ़ती है।
    • शिक्षा से ज्यादा चरित्र निर्माण- वहां केवल नंबर्स पर ध्यान नहीं दिया जाता, बल्कि ईमानदारी, विनम्रता और सहानुभूति जैसे गुणों को प्राथमिकता दी जाती है।