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    क्या आप भी बच्चे को हर वक्त रखते हैं बिजी? जानिए सही विकास के लिए क्यों जरूरी है उनका बोर होना

    By Meenakshi NaiduEdited By: Swati Sharma
    Updated: Mon, 15 Jun 2026 06:30 PM (IST)

    बच्चों को दिन में कुछ खाली समय देना जरूरी है। बोरियत के डर से उन्हें हर वक्त बिजी रखना उनके विकास में बाधा डाल सकता है। ...और पढ़ें

    बच्चों को दिन में दें थोड़ा खाली वक्त (AI Generated Image)

    बच्चों को दिन में दें थोड़ा खाली वक्त (AI Generated Image)

    HighLights

    1. बोरियत बच्चों में रचनात्मकता और कल्पना शक्ति बढ़ाती है

    2. खाली समय आत्म-खोज और धैर्य सीखने का मौका देता है

    3. यह मानसिक स्वास्थ्य सुधारता है, तनाव और चिड़चिड़ापन घटाता है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आजकल पेरेंट्स हर वक्त यहीं चाहते हैं कि उनका बच्चा कुछ न कुछ नया सीखता रहे और बिजी रहे। दिनभर कोचिंग, गेम्स, होमवर्क, और स्क्रीन टाइम से बच्चों का शेड्यूल इतना भर जाता है कि उनके पास खुद के लिए समय नहीं बचता। 

    हम सोचते हैं कि बोरियत बच्चों के विकास में रुकावट है, लेकिन यह बिल्कुल सच नही हैं। दिन में थोड़ा खाली समय बच्चों के लिए जरूरी है, ताकि नई चीजें सोचने और भावनात्मक विकास के लिए वक्त मिल सके। आइए जानें दिन में थोड़ा खाली समय होना बच्चों के लिए क्यों जरूरी है। 

    क्यों जरूरी है बच्चों के लिए खाली समय?

    • बोरियत से जन्म लेती है क्रिएटिविटटी- जब बच्चे को कोई एक्टिविटी करने नहीं दी जाती, तो उसका दिमाग खुद से मनोरंजन और सीखने के तरीके खोजता है। इस समय बच्चों की क्रिएटिविटी और इमैजिनेशन को बढ़ावा मिलता है। बोर होते समय बच्चे अक्सर नए गेम्स, कहानियां या ड्रॉइंग्स खुद बना लेते हैं। 
    • यह आत्म-खोज का मौका देता है- लगातार व्यस्त रहने वाले बच्चों को अपने अंदर झांकने का अवसर नहीं मिलता, लेकिन जब वे बोर होते हैं, तो उन्हें अपनी हॉबीज, विचारों और इच्छाओं के बारे में सोचने का समय मिलता है। यह आत्म-समझ आगे चलकर उन्हें और ज्यादा आत्मविश्वासी और स्वतंत्र बनाती है।
    • बोरियत सिखाती है धैर्य- आज की इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन वाली दुनिया में बच्चे हर चीज तुरंत चाहते हैं। जब वे बोर होते हैं, तो उन्हें इंतजार करना और खुद को शांत रखना सीखने का मौका मिलता है। यह प्रक्रिया उनके मानसिक धैर्य और फोकस को मजबूत बनाती है, जो आगे चलकर पढ़ाई और जीवन के हर क्षेत्र में मददगार होती है।
    • इमैजिनेशन को देती है नई उड़ान- जब बच्चे के पास कोई तय काम नहीं होता, तो वह अपनी कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करता है, खिलौनों से नई दुनिया बनाना, कहानी गढ़ना या प्रकृति को देखना। यह फ्री थिंकिंग उनकी क्रिएटिविटी और इनोवेटिव सोच को बढ़ाती है।
    • मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद- लगातार बिजी रहने या स्क्रीन में डूबे बच्चे मानसिक रूप से थक जाते हैं। कुछ समय का खाली वक्त उनके दिमाग को रीसेट करने का मौका देती है, जिससे स्ट्रेस ,एंजाइटी और  चिड़चिड़ापन कम होता है।
    • जीवन की सादगी का एहसास कराती है- एक्साइटमेंट की खोज बच्चों को इंस्टेंट प्लेजर की लत लगा देती है। बोरियत उन्हें सिखाती है कि खुशी हमेशा किसी गतिविधि या गैजेट में नहीं होती, बल्कि सादगी में भी आनंद पाया जा सकता है जैसे प्रकृति कि देखना, बातें करना या खुद से खेलना।
    • माता-पिता की भूमिका- पैरेंट्स को यह समझना चाहिए कि हर वक्त बच्चे को व्यस्त रखना जरूरी नहीं। उन्हें खुद से सोचने, खेलने और फैसले लेने का मौका दें। जरूरत पड़े तो हल्का गाइड करें, लेकिन हर बार मनोरंजन या सॉल्यूशन न दें।