बात-बात पर चिढ़ जाता है आपका टीनएज बच्चा? इन आसान टिप्स से पेरेंट्स सुधार सकते हैं बातचीत का तरीका
टीनएज में बच्चों में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं, जिससे माता-पिता और बच्चों के बीच बातचीत में दिक्कतें आती हैं। ...और पढ़ें

टीनएज बच्चों के साथ कैसे करें बात? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। टीनएज के दौरान बच्चों के शरीर में कई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं। ये बदलाव उनके लिए काफी कन्फ्यूजिंग होते हैं। इस उम्र में अक्सर माता-पिता को शिकायत होती है कि उनका बच्चा चिड़चिड़ा हो गया है, बात नहीं सुनता या उनसे पहले की तरह बात नहीं करता।
वहीं, बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता उन्हें समझ नहीं पा रहे हैं। इसलिए वे पेरेंट्स से दूरी बनाने लगते हैं। अगर आपके और आपके टीनएजर बच्चे के बीच भी बातचीत से जुड़ी परेशानियां आ रही हैं, तो निराश न हों। कुछ बदलावों के जरिए आप इस कम्युनिकेशन गैप को कम कर सकते हैं और अपने रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं।
लेक्चर देने के बजाय सुनना सीखें
बातचीत का मतलब सिर्फ अपनी बात कहना नहीं होता। आपको सामने वाले की भी बात सुननी होती है। टीनएजर्स की सबसे बड़ी शिकायत ही यही होती है कि उनके माता-पिता उनकी बात नहीं सुनते या पहले से ही डांटना शुरू कर देते हैं। इसलिए जब बच्चा बात करे, तो उसे बीच में न टोकें। उसकी बात पूरी होने दें और समझने की कोशिश करें कि वह क्यों ऐसा कह रहा है। बच्चों को महसूस करवाएं कि आप उनकी बात सुन रहे हैं और समझने की कोशिश कर रहे हैं।
उनकी प्राइवेसी और स्पेस का ध्यान रखें
टीनएज में हर बच्चा आत्मनिर्भर बनना चाहता है। वह अपने फैसले खुद लेना चाहता है और अपने लिए पर्सनल स्पेस चाहता है। हालांकि, पेरेंट्स को चिंता रहती है कि इस कच्ची उम्र में बच्चा किसी गलत राह पर न निकल जाए। इसलिए वे उनकी स्पेस और प्राइवेसी का सम्मान नहीं करते। इसके कारण भी बच्चा दूरी बनाने लगता है। इसलिए बच्चों का फोन चेक न करें, उनकी हर बात पर शक न करें, उनके कमरे में जाने से पहले दरवाजा नॉक करें। ये छोटी-छोटी आदतें बच्चों का विश्वास जीतती हैं और वे खुलकर आपसे बात करना शुरू कर पाएंगे।
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फ्रेंडली बनें, फ्रेंड नहीं
पेरेंट्स और बच्चों के बीच फ्रेंडली माहौल होना जरूरी है, लेकिन आपको उनका दोस्त नहीं बनना है। उनके पास दोस्त हैं, आपको उनके पेरेंट की भूमिका में ही रहना है और उन्हें यकीन दिलाएं कि किसी भी मुसीबत में आप उनकी मदद करेंगे और उन्हें सपोर्ट करेंगे, ताकि वे आपसे गाइडेंस लेने में हिचकिचाएं नहीं।
बातचीत का सही समय चुनें
अगर बच्चा थका हुआ है या पहले से परेशान है, तो किसी भी गंभीर मुद्दे पर उस समय बात न करें। इससे बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं। जब उनका मूड लाइट हो, तब उनसे बात करें। अपने बातचीत का तरीका भी लाइट रखें, ताकि उन्हें ये न लगे कि आप उन्हें स्ट्रेस दे रहे हैं या जज कर रहे हैं।
क्या करें और क्या न करें?
- बच्चों की कोशिशों की तारीफ करें और दूसरे बच्चों से उनकी तुलना न करें।
- उनके दोस्तों और पहनावे का मजाक न उड़ाएं।
- गुस्सा आने पर खुद को शांत करें, फिर बात करें।
- चिल्लाकर या नाराजगी दिखाकर अपनी बात मनवाने की कोशिश न करें।