GenZ नहीं करना चाहते किसी को डेट! रील्स की दुनिया में गुम हो रहे हैं सगे रिश्ते, स्टडी में खुलासा
बदलते इस दौर में लोग साथ में रहने के बजाय सोशल मीडिया और वर्चुअल वर्ल्ड में ज्यादा सक्रिय रहने लगे हैं। ...और पढ़ें

जेन जी में रिलेशनशिप में रिजेक्शन का डर (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बदलते इस दौर में लोग साथ में रहने के बजाय सोशल मीडिया और वर्चुअल वर्ल्ड में ज्यादा सक्रिय रहने लगे हैं। रील्स का बढ़ता ट्रेंड इसी बात का सबूत है। शायद यही वजह है कि लोग रिश्ते बनाने में पिछड़ते जा रहे हैं और अनहेल्दी रिलेशनशिप की तादाद बढ़ रही है। फिर हम ऐसे रिश्तों से निकलने के लिए रेड फ्लैग जैसी बातें भी पार्टनर में तलाशने लगते हैं। हाल ही की एक स्टडी भी ऐसा ही कुछ खुलासा करती है। दरअसल, स्टडी में कहा गया कि आजकल के युवा रोमांटिक रिश्ते की शुरुआत करने से डर रहे हैं।
जेन जी में रिलेशनशिप में रिजेक्शन का डर
ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के व्हीटली इंस्टिट्यूट और गैर लाभकारी संस्था इंस्टिट्यूट फॉर फैमिली स्टडीज द्वारा जारी एक स्टडी कहती है कि जेन-जी में रिलेशनशिप को लेकर डर और शर्मिंदगी बढ़ रही है। बता दें कि यह स्टडी अमेरिका के 22-35 साल के युवाओं में की गई, जिसमें हर 3 में से 2 पुरुष और हर 5 में से 4 महिलाएं रोमांटिक रिश्ते को शुरू नहीं करना चाहते। इसके पीछे की वजह उनमें नए रिश्ते को शुरू करने का आत्मविश्वास कम होना है।
स्टडी की माने तो करियर पर फोकस, फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की दौड़, सोशल मीडिया का दबाव, अकेलापन और डिप्रेशन के चलते आजकल की यंग जेनरेशन नए रिश्ते से बचना चाहती है क्योंकि उनमें रिजेक्शन, शर्मिंदगी और इमोशनली कमजोर होने का डर घर कर गया है।
डेटिंग और रिलेशनशिप हो रही खराब
एक्स्पर्ट्स का इस बारे में कहना है कि युवाओं का ये खराब पैटर्न उनकी डेटिंग लाइफ और रिलेशनशिप को बिगाड़ रहा है। जेन-जी में यह डर इसलिए बन गया है क्योंकि किसी को डेट करना किसी रिस्क से कम नहीं और उसमें भविष्य में होने वाले मानसिक नुकसान के बारे में पता नहीं होता।
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दूसरे शब्दों में कहें तो नई जेनरेशन में ब्रेकअप और उसके बाद की स्थिति को लेकर मन में डर बैठ गया है। इसी वजह से जेन जी पीढ़ी खुद की इन चीजों से सुरक्षा कर रही है और खुद में ही सिमटती जा रही है। नतीजतन अकेलेपन का भी शिकार हो रही है। डेटिंग और रिलेशनशिप को लेकर कम उत्साह को देखते हुए यह स्टडी इसे अकेलेपन की महामारी की शुरुआत बता रही है।