कैसे पहचानें शिशु के कान का दर्द? हर पेरेंट्स के काम आएंगे ये जरूरी संकेत
शिशु का रात में एकदम से रोने लगना पेरेंट्स को चिंता में डाल देता है, वो समझ ही नहीं पाते कि बच्चे के रोने की वजह क्या है। ...और पढ़ें

नवजात शिशु के कान का दर्द पहचानने के तरीके (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवजात शिशु का रात में एकदम से रोने लगना पेरेंट्स को चिंता में डाल देता है, वो समझ ही नहीं पाते कि बच्चे के रोने की वजह क्या है। वहीं, जान लेने वाली बात यह है कि 1 साल से छोटे बच्चे और उसमें भी 6 महीने या उससे छोटे बच्चे कान के इन्फेक्शन के मामले में सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इस समय उनका इम्यून सिस्टम और यूस्टेशियन ट्यूब अभी विकसित नहीं हुआ होता।
नवजात शिशु के कान में दर्द को कैसे पहचानें?
अब क्योंकि नन्हा शिशु बोल नहीं सकता तो पेरेंट्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि उसके रोने की वजह का खुद से ही पता लगाया जाए। आइए जानते हैं उन संकेतों के बारे में जिनकी मदद से शिशु के कान में दर्द की पहचान की जा सकती है:
शिशु रोते समय अगर अपना हाथ वहां बार-बार ले जाए या कान को पकड़ने, खींचने या रगड़ने की कोशिश करे तो यह कान के दर्द का संकेत है।
बेवजह और लगातार बच्चे का रोना भी उनके शरीर में किसी तकलीफ का संकेत है।
लेटाने पर बच्चा अगर जोर से रोने लगे तो इस साइन को भी अनदेखा न करें। दरअसल, जब शिशु को लेटाते हैं तो इससे उनके कानों पर दबाव पड़ता है।
बच्चा लाख कोशिशों के बाद भी अगर सो नहीं पाए।
नन्हें बच्चे से बात करते समय यह संकेत मिलता है कि उसे सुनाई दे रहा है। लेकिन अगर बच्चे के कान में इन्फेक्शन हो तो उसे सुनने में भी परेशानी होगी।
कान के इन्फेक्शन में बुखार या हरारत को नजरअंदाज न करें।
दर्द में शिशु को दूध पीने में भी परेशानी होती है, क्योंकि इससे भी उनके कान पर प्रेशर पड़ता है।
बच्चे को दस्त, उल्टी होना या भूख बहुत कम लगना कान में इन्फेक्शन की तरफ इशारा हो सकता है।
बच्चा अगर बैठ सकता है तो कान में दर्द के समय वह संतुलन नहीं बना पाता।
शिशु में कान का इन्फेक्शन होने के कारण
शिशु में कान के इन्फेक्शन की ज्यादातर वजह बैक्टीरिया और वायरस होते हैं, क्योंकि बच्चे बहुत सेंसीटिव होते हैं। इसके चलते उन्हें सर्दी-जुकाम या कोई एलर्जी हो जाती है। ऐसी कंडीशन में शिशु की यूस्टेशियन ट्यूब ब्लॉक हो जाती है और कान के पर्दे के पीछे फ्लूड जमा होने लगता है।